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गांधीनगर की टंकी का ओवरहेड हुआ क्षतिग्रस्त
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ललितपुर। मोहल्ला गांधीनगर के निवासियों के सामने शुद्घ पेयजल का संकट उत्पन्न हो गया है। यहां बनी पानी की टंकी का ओवरहेड क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे टंकी में भरे शुद्घ पानी को दूषित होने से बचाना मुश्किल हो रहा है।
जल संस्थान ने वर्षों ने नागरिकों को सुचारु जलापूर्ति करने के लिए शहर को लोअर जोन व हायर जोन में बांटा था। हायर जोन के लोगों को गांधीनगर की टंकी से आपूर्ति की जाती है। कुछ वर्षों से नेहरू नगर में पेयजल का संकट उत्पन्न होने लगा था। इस समस्या से निपटने के लिए गांधीनगर टंकी के समीप एक नई टंकी का निर्माण किया। इससे नेहरू नगर के लिए जलापूर्ति की जाने लगी। वहीं, गांधीनगर की पुरानी टंकी से पूर्व की भांति गांधीनगर, नई बस्ती में जलापूर्ति की जाती रही। वर्तमान में करीब दो हजार परिवारों की प्यास इस टंकी से बुझाई जा रही है। विभाग के पास समस्या यह है कि यदि इस टंकी को उपयोग में लेना बंद करते हैं तो नेहरू नगर के साथ गांधीनगर, नईबस्ती में भी पेयजल का भीषण संकट खड़ा हो जाता है। विकल्प के अभाव में विभाग द्वारा इस टंकी को उपयोग में लिया जा रहा है। करीब तीन दशक पुरानी टंकी का ओवरहेड धीरे-धीरे दरकने लगा है। करीब एक साल पहले जल संस्थान ने टंकी के शुद्घ पानी को दूषित होने से बचाने के लिए त्रिपाल बंधवा दी थी लेकिन अब वह भी फट गई। इसके अलावा टंकी के ऊपरी हेड का क्षतिग्रस्त हिस्सा बढ़ा हो गया है। इससे अब जल संस्थान के कर्मी टंकी पर चढ़ने से भय खाने लगे हैं। इससे इसे ढकना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में लोगों की पानी को लेकर शिकायतें बढ़ने लगी हैं।
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गांधीनगर टंकी के ऊपरी हिस्से को त्रिपाल से ढंक दिया गया था, अब वह फट गई है। टंकी की ऊंचाई अधिक होने से श्रमिक ऊपर चढने से डरते हैं। इस वजह से इसे दोबारा ढंकने में परेशानी आ रही है।
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राहुल सिंह
अवर अभियंता, जल संस्थान
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जल संस्थान ने वर्षों ने नागरिकों को सुचारु जलापूर्ति करने के लिए शहर को लोअर जोन व हायर जोन में बांटा था। हायर जोन के लोगों को गांधीनगर की टंकी से आपूर्ति की जाती है। कुछ वर्षों से नेहरू नगर में पेयजल का संकट उत्पन्न होने लगा था। इस समस्या से निपटने के लिए गांधीनगर टंकी के समीप एक नई टंकी का निर्माण किया। इससे नेहरू नगर के लिए जलापूर्ति की जाने लगी। वहीं, गांधीनगर की पुरानी टंकी से पूर्व की भांति गांधीनगर, नई बस्ती में जलापूर्ति की जाती रही। वर्तमान में करीब दो हजार परिवारों की प्यास इस टंकी से बुझाई जा रही है। विभाग के पास समस्या यह है कि यदि इस टंकी को उपयोग में लेना बंद करते हैं तो नेहरू नगर के साथ गांधीनगर, नईबस्ती में भी पेयजल का भीषण संकट खड़ा हो जाता है। विकल्प के अभाव में विभाग द्वारा इस टंकी को उपयोग में लिया जा रहा है। करीब तीन दशक पुरानी टंकी का ओवरहेड धीरे-धीरे दरकने लगा है। करीब एक साल पहले जल संस्थान ने टंकी के शुद्घ पानी को दूषित होने से बचाने के लिए त्रिपाल बंधवा दी थी लेकिन अब वह भी फट गई। इसके अलावा टंकी के ऊपरी हेड का क्षतिग्रस्त हिस्सा बढ़ा हो गया है। इससे अब जल संस्थान के कर्मी टंकी पर चढ़ने से भय खाने लगे हैं। इससे इसे ढकना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में लोगों की पानी को लेकर शिकायतें बढ़ने लगी हैं।
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गांधीनगर टंकी के ऊपरी हिस्से को त्रिपाल से ढंक दिया गया था, अब वह फट गई है। टंकी की ऊंचाई अधिक होने से श्रमिक ऊपर चढने से डरते हैं। इस वजह से इसे दोबारा ढंकने में परेशानी आ रही है।
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राहुल सिंह
अवर अभियंता, जल संस्थान