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बोरिंग ने नहीं उगला पानी, सदमे से किसान की मौत
ब्यूरो
Updated Mon, 09 Nov 2015 01:20 AM IST
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ललितपुर। बुंदेलखंड में सूखे की मार झेल रहे किसानों की मौत का सिलसिला
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थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को एक और किसान की सदमे के कारण मौत हो
गई। दो बार बोरिंग कराने पर भी पानी नहीं निकलने से किसान परेशान था। उसने
किसान क्रेडिट कार्ड पर डेढ़ लाख रुपये का कर्ज ले रखा था।
महरौनी कोतवाली के अंतर्गत ग्राम सिलावन निवासी किसान मोतीलाल यादव (50) अपनी सात एकड़ जमीन पर खेती करता था। इस साल बरसात कम होने के कारण मोतीलाल ने खेत पर बोरिंग कराकर फसल की सिंचाई करने की योजना बनाई थी, जिससे बर्बाद होती खेती को बचाया जा सके। उसने जब पहली बार बोरिंग कराया, तो उसमें पानी नहीं निकला। किसान ने हिम्मत जुटाकर दूसरी बार बोरिंग कराया, जिसमें शनिवार को पानी नहीं निकला, जिससे किसान बुरी तरह सदमे में आ गया। करीब 30 हजार रुपये खर्च हो जाने के बाद भी बोरिंग में पानी नहीं मिलने से मोतीलाल काफी परेशान था। किसान क्रेडिट कार्ड से भी करीब डेढ़ लाख रुपये कर्ज ले रखा था। यह कर्ज भी उसे लंबे समय से परेशान कर रहा था।
मृतक के पुत्र बलवीर सिंह ने बताया कि बोरिंग में पानी नहीं निकलने के बाद से पिता परेशान थे। रविवार की सुबह करीब साढ़े सात बजे वह अपने खेत पर गए। काफी देर बाद भी वापस नहीं लौटने पर खेत पर जाकर देखा, तो वह अचेतावस्था में पड़े थे। आनन-फानन में उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद मृत घोषित कर दिया। पुत्र समेत परिजनों ने कहा कि मोतीलाल की मौत बोरिंग में पानी नहीं निकलने और बैंक के भारी कर्ज के सदमे से हुई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से किसान को राहत राशि प्रदान करने की मांग की है। इस मामले कोई पुलिस कार्रवाई नहीं की गई है।
महरौनी कोतवाली के अंतर्गत ग्राम सिलावन निवासी किसान मोतीलाल यादव (50) अपनी सात एकड़ जमीन पर खेती करता था। इस साल बरसात कम होने के कारण मोतीलाल ने खेत पर बोरिंग कराकर फसल की सिंचाई करने की योजना बनाई थी, जिससे बर्बाद होती खेती को बचाया जा सके। उसने जब पहली बार बोरिंग कराया, तो उसमें पानी नहीं निकला। किसान ने हिम्मत जुटाकर दूसरी बार बोरिंग कराया, जिसमें शनिवार को पानी नहीं निकला, जिससे किसान बुरी तरह सदमे में आ गया। करीब 30 हजार रुपये खर्च हो जाने के बाद भी बोरिंग में पानी नहीं मिलने से मोतीलाल काफी परेशान था। किसान क्रेडिट कार्ड से भी करीब डेढ़ लाख रुपये कर्ज ले रखा था। यह कर्ज भी उसे लंबे समय से परेशान कर रहा था।
मृतक के पुत्र बलवीर सिंह ने बताया कि बोरिंग में पानी नहीं निकलने के बाद से पिता परेशान थे। रविवार की सुबह करीब साढ़े सात बजे वह अपने खेत पर गए। काफी देर बाद भी वापस नहीं लौटने पर खेत पर जाकर देखा, तो वह अचेतावस्था में पड़े थे। आनन-फानन में उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद मृत घोषित कर दिया। पुत्र समेत परिजनों ने कहा कि मोतीलाल की मौत बोरिंग में पानी नहीं निकलने और बैंक के भारी कर्ज के सदमे से हुई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से किसान को राहत राशि प्रदान करने की मांग की है। इस मामले कोई पुलिस कार्रवाई नहीं की गई है।