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खेतों की मिट्टी बीमार : मृदा परीक्षण में सल्फर की कमी उजागर

Tue, 18 Nov 2025 12:43 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 18 Nov 2025 12:43 AM IST
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Farm soil is sick: Soil testing reveals sulfur deficiency
किसानों को मिले मृदा स्वास्थ्य कार्ड , मिट्टी की सेहत सुधारने के सुझाव भी बताए गए
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कृषि विभाग ने खरीफ सीजन से पहले जिले की मिट्टी की पोषक स्थिति जानने के लिए 8,400 नमूने एकत्र किए थे। प्रयोगशाला जांच में अधिकांश नमूनों में सूक्ष्म पोषक तत्व सल्फर की कमी पाई गई। इस पर विभाग ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित करते हुए मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए आवश्यक उपाय भी बताए हैं।
खरीफ सीजन से पहले कृषि विभाग ने किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लेकर उनमें जीवांश कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस और अन्य पोषक तत्वों की जांच कराई। जांच रिपोर्ट में अनेक स्थानों पर मिट्टी में सूक्ष्म सल्फर का स्तर बेहद कम पाया गया। रिपोर्ट आने के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य मोबाइल कार्ड दिए गए, जिनमें उनकी मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की मात्रा, कमी वाले तत्वों का विवरण और उर्वरक प्रबंधन के सुझाव दर्ज हैं।
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जून माह से शुरू हुए इस अभियान के तहत किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने कार्ड में दिए गए निर्देशों के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करें। इससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ेगी और उत्पादन में भी सुधार होगा।खरीफ के दौरान मिट्टी परीक्षण कार्य पूरा हो चुका है। अब रबी सीजन में कृषि विभाग 3,600 किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लेने की तैयारी में है। प्रत्येक ब्लॉक से 2,000 नमूने लेकर उन्हें प्रयोगशाला में भेजा जाएगा, जहां मिट्टी के पोषक तत्वों की विस्तृत जांच की जाएगी।
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खरीफ में 3.32 लाख हेक्टेयर में हुई बोआई

जनपद में खरीफ की फसल का कुल रकबा लगभग 3.32 लाख हेक्टेयर है। विभाग ने इस बार करीब तीन लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा था, लेकिन बोआई के समय लगातार हुई बारिश से उड़द की फसल को भारी नुकसान पहुंचा। वहीं मूंगफली का उत्पादन बेहतर रहा, जो करीब 28,400 मीट्रिक टन आंका गया है। सोयाबीन की पैदावार भी संतोषजनक बताई जा रही है।

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सल्फर की कमी का फसलों पर प्रभाव

मिट्टी में सल्फर की कमी से पौधों की बढ़वार धीमी हो जाती है और नई पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं। सल्फर की कमी प्रोटीन, एंजाइम और क्लोरोफिल के निर्माण को प्रभावित करती है, जिससे पौधे कमजोर होकर देर से पकते हैं। फल और बीजों का आकार छोटा रह जाता है और समग्र उपज प्रभावित होती है।


वर्जन
जिले के सभी ब्लॉकों से लगभग 8,400 मिट्टी के नमूने लिए गए थे। रिपोर्ट आने के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित कर दिए गए हैं। - यशराज सिंह, उप कृषि निदेशक
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