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मिसाल : वीबी–जी राम जी में महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर, महिला मेट के रूप में काम करके निभा रहीं जिम्मेदारी

Sat, 10 Jan 2026 12:39 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jan 2026 12:39 AM IST
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Example: Women in VB-G Ram Ji are becoming self-reliant, fulfilling their responsibilities by working as Mahila Mates
- आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ अपने परिवारों को दे रहीं बेहतर भविष्य
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- जिले में 85349 एक्टिव महिला श्रमिक और 814 महिला मेट हैं पंजीकृत

संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। वीबी–जी राम जी (मनरेगा) में महिलाओं की भागीदारी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। योजना से महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आर्थिक मदद भी कर रही हैं। जनपद के मनरेगा में महिला श्रमिकों के साथ महिला मेट भी बखूबी जिम्मेदारी निभा रही हैं। जिले की 415 ग्राम पंचायतों में 814 महिला मेट रजिस्टर्ड हैं, इनमें से करीब 442 एक्टिव रहकर महिला मेट के रूप में काम करने की जिम्मेदारी उठा रही हैं।



गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा अब वीबी–जी राम जी संचालित है। जिसके तहत ग्राम पंचायत के विकास कायों में जॉब कार्ड धारकों से काम कराया जाता है। जिसके एवज में इनको निर्धारित 252 रुपये की मजदूरी दी जाती है। पूर्व में सौ दिन काम दिया जाता था। जोकि अब बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। जनपद की 415 ग्राम पंचायतों में करीब 1.90 जॉब कार्डधारक हैं। जिसमें करीब 1.28 सक्रिय जॉब कार्डधारक हैं। वीबी–जी राम जी योजना में पुरुषों के साथ महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। पहले इस योजना में महिलाओं की संख्या कम थी, लेकिन अब उनकी सक्रियता और जिम्मेदारियों में काफी इजाफा हुआ है। खासतौर पर महिलाओं को महिला मेट की जिम्मेदारी मिलने से उनकी भागीदारी और आत्मनिर्भरता में वृद्धि हुई है। जिले में 814 महिला मेट रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 442 एक्टिव हैं। कार्य स्थल पर 20 मजदूरों के काम करने पर एक महिला मेट को तैनात किया जाता है। इनको जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण देकर काम की बारीकियां सिखाई गई थी।
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85349 महिला श्रमिकों में से 43500 को मिला काम

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले के सभी छह ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायतों में 85349 एक्टिव महिला श्रमिक हैं। जिसमें से इस वित्तीय वर्ष में 43500 महिला श्रमिकों को काम उपलब्ध कराया गया है। महिलाओं को काम मिलने से यह आर्थिक रूप से सशक्त बनी और अपनी गृहस्थी को चलाने में आर्थिक रूप से मदद की।
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26.76 लाख मानव दिवस का है इस वित्तीय वर्ष का लक्ष्य



मनरेगा (अब वीबी–जी राम जी) योजना ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की आर्थिक मदद का जरिया बना है। इस वित्तीय वर्ष में 26.76 लाख मानव कार्य दिवस सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिसमें दिसंबर तक 26.48 लाख कार्य दिवस पूरे हो चुके हैं। इनमें से महिलाओं का योगदान करीब 10 लाख कार्य दिवस रहा है।

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फोटो-41



कैप्शन - सुषमा

मनरेगा में महिला मेट के रूप में काम करती है। इससे उसे गांव में ही काम मिलता है और इस काम से मिलने वाली मजदूरी से उसे अपनी घर गृहस्थी को चलाने में काफी मदद मिलती है।



सुषमा, ग्राम मिर्चवारा ब्लॉक जखौरा

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फोटो-42

कैप्शन - रेखा देवी



मनरेगा के तहत वह महिला मेट के रूप में ग्राम पंचायत के विकास के लिए किए जाने वाले काम में महिला मेट के रूप में काम करती है। वह यहां पर काम करवाती है। महिला मेट के रूप में काम करने ने उसे आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है और अपने परिवार को बेहतर भविष्य के लिए सहयोग कर रही हैं।


रेखा देवी, ग्राम गिदवाहा, ब्लॉक मड़ावरा



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ग्रामीण इलाकों में रोजगार के साधन सीमित होने के बावजूद मनरेगा ने महिलाओं को आर्थिक मदद का जरिया दिया है। इसमें महिला श्रमिक के रूप में तो काम कर ही रही हैं। महिला मेट के रूप में भी काम करके अपने परिवार को चलाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।



रमेश कुमार यादव, डीसी मनरेगा
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