{"_id":"590b83004f1c1b9b654411a2","slug":"electricity-system-lalitpur","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेवजह लगा दीं करोड़ों की मशीनें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेवजह लगा दीं करोड़ों की मशीनें
lalitpur
Updated Fri, 05 May 2017 01:07 AM IST
विज्ञापन
प्रशासन
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ललितपुर। उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन द्वारा विद्युत सब स्टेशनों की स्थिति में सुधार और सुरक्षा के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसके तहत
जनपद के सब स्टेशनों पर कै पेसिटर बैंक, कंट्रोल पैनल, वीसीबी मशीनें लगाई गई हैं। कई जगह इन उपकरणों को बिना जरूरत के लगा दिया गया है। ऐसे में दो साल से यह उपकरण शोपीस बनकर रह गए हैं।
शहर में 66 और 33 केवी के तीन विद्युत सब स्टेशनों पर उच्च क्षमता के सात ट्रांसफार्मर रखे हैं। इनसे पूरे शहर समेत करीब डेढ़ सैकड़ा गांवों में बिजली आपूर्ति की जाती है। सब स्टेशनों के यार्ड में स्थापित इन उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा के लिए यहां करोड़ों रुपए का कैपेसिटर बैंक का ढांचा भी तैयार किया गया है। इसकी मदद से हाइटेंशन लाइनों में होने वाले वोल्टेज को नियंत्रित किया जा सकता है। जबकि, सब स्टेशन में ही ट्रांसफार्मर पैनल व कंट्रोल पैनल भी लगाए गए हैं। इससे ट्रांसफार्मर में कहीं भी फाल्ट होने की स्थिति से पूूर्व सचेत कर दिया जाता है और ट्रांसफार्मर के पूर्व सर्किट ब्रेकर भी लगा होता है, जो हाइटेंशन लाइनों में फाल्ट की स्थिति में फ्यूज उड़ा देता है। कुछ सब स्टेशनों पर बिना जरूरत के ही इन उपकरणों को लगा दिया गया है। यही वजह है कि करीब दो साल से यह उपकरण मात्र शोपीस बन कर रह गए हैं।
जंग खा रहे अग्निरोधक यंत्र
विद्युत सब स्टेशनों पर आग से सुरक्षा के लिए लाखों रुपए कीमत के करीब एक दर्जन अग्निरोधक यंत्रों का उपयोग नहीं होने से गल्ला मंडी सब स्टेशन पर यह कबाड़ में पड़े हैं। इनमें जंग लग चुकी है। वर्षों से विद्युत कर्मियों ने इन यंत्रों को चलाने का अभ्यास तक नहीं किया है। यदि यहां कभी आग लग जाती है तो विभाग को आग बुझाने में फायर बिग्रेड की मदद के अलावा अन्य कोई सहारा नहीं रहेगा। यहां तक कि आग बुझाने के लिए बजरी की बाल्टियां भी अस्त-व्यस्त पड़ी हुई हैं।
विज्ञापन
खतरे में काम कर रहे एसएसओ
गल्ला मंडी और बाईपास स्थित 66 व 33 केवी विद्युत सब स्टेशनों पर शिफ्टवार सब स्टेशन ऑपरेटर ड्यूटी करते हैं। लेकिन सब स्टेशनों की वीसीबी व ओसीबी मशीनों का ट्रिपिंग सिस्टम या फिर रिले पैनल में खराबी के कारण आपूर्ति ठप हो जाती है। कई मौकों पर विभिन्न फीडरों की इन मशीनों में ब्लास्ट तक हो चुके हैं। ऐसी ही घटना गत तीन दिन पूर्व बाईपास सब स्टेशन पर हो चुकी है, जिसमें अवर अभियंता और ड्यूटी पर तैनात एसएसओ आग की चपेट में गए थे।
जेई और एसडीओ से दूर कराएंगे कमियां
सब स्टेशनों पर कमियों को दूर करने की जिम्मेदारी अवर अभियंता व संबंधित एसडीओ की है। सब स्टेशनों पर यदि कहीं ऐसा मामला संज्ञान में आता है, तो जेई व एसडीओ को निर्देशित कर कमियां दूर कराई जाएंगी।
- गौरव कुमार, अधिशासी अभियंता विद्युत।
विज्ञापन
जनपद के सब स्टेशनों पर कै पेसिटर बैंक, कंट्रोल पैनल, वीसीबी मशीनें लगाई गई हैं। कई जगह इन उपकरणों को बिना जरूरत के लगा दिया गया है। ऐसे में दो साल से यह उपकरण शोपीस बनकर रह गए हैं।
शहर में 66 और 33 केवी के तीन विद्युत सब स्टेशनों पर उच्च क्षमता के सात ट्रांसफार्मर रखे हैं। इनसे पूरे शहर समेत करीब डेढ़ सैकड़ा गांवों में बिजली आपूर्ति की जाती है। सब स्टेशनों के यार्ड में स्थापित इन उच्च क्षमता के ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा के लिए यहां करोड़ों रुपए का कैपेसिटर बैंक का ढांचा भी तैयार किया गया है। इसकी मदद से हाइटेंशन लाइनों में होने वाले वोल्टेज को नियंत्रित किया जा सकता है। जबकि, सब स्टेशन में ही ट्रांसफार्मर पैनल व कंट्रोल पैनल भी लगाए गए हैं। इससे ट्रांसफार्मर में कहीं भी फाल्ट होने की स्थिति से पूूर्व सचेत कर दिया जाता है और ट्रांसफार्मर के पूर्व सर्किट ब्रेकर भी लगा होता है, जो हाइटेंशन लाइनों में फाल्ट की स्थिति में फ्यूज उड़ा देता है। कुछ सब स्टेशनों पर बिना जरूरत के ही इन उपकरणों को लगा दिया गया है। यही वजह है कि करीब दो साल से यह उपकरण मात्र शोपीस बन कर रह गए हैं।
विज्ञापन
जंग खा रहे अग्निरोधक यंत्र
विद्युत सब स्टेशनों पर आग से सुरक्षा के लिए लाखों रुपए कीमत के करीब एक दर्जन अग्निरोधक यंत्रों का उपयोग नहीं होने से गल्ला मंडी सब स्टेशन पर यह कबाड़ में पड़े हैं। इनमें जंग लग चुकी है। वर्षों से विद्युत कर्मियों ने इन यंत्रों को चलाने का अभ्यास तक नहीं किया है। यदि यहां कभी आग लग जाती है तो विभाग को आग बुझाने में फायर बिग्रेड की मदद के अलावा अन्य कोई सहारा नहीं रहेगा। यहां तक कि आग बुझाने के लिए बजरी की बाल्टियां भी अस्त-व्यस्त पड़ी हुई हैं।
विज्ञापन
खतरे में काम कर रहे एसएसओ
गल्ला मंडी और बाईपास स्थित 66 व 33 केवी विद्युत सब स्टेशनों पर शिफ्टवार सब स्टेशन ऑपरेटर ड्यूटी करते हैं। लेकिन सब स्टेशनों की वीसीबी व ओसीबी मशीनों का ट्रिपिंग सिस्टम या फिर रिले पैनल में खराबी के कारण आपूर्ति ठप हो जाती है। कई मौकों पर विभिन्न फीडरों की इन मशीनों में ब्लास्ट तक हो चुके हैं। ऐसी ही घटना गत तीन दिन पूर्व बाईपास सब स्टेशन पर हो चुकी है, जिसमें अवर अभियंता और ड्यूटी पर तैनात एसएसओ आग की चपेट में गए थे।
जेई और एसडीओ से दूर कराएंगे कमियां
सब स्टेशनों पर कमियों को दूर करने की जिम्मेदारी अवर अभियंता व संबंधित एसडीओ की है। सब स्टेशनों पर यदि कहीं ऐसा मामला संज्ञान में आता है, तो जेई व एसडीओ को निर्देशित कर कमियां दूर कराई जाएंगी।
- गौरव कुमार, अधिशासी अभियंता विद्युत।