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ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, हैंडपंप सूखे, बढ़ा पेयजल संकट
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हैड़पंप से पानी भरते मोहल्ला वासी
- फोटो : LALITPUR
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ग्रामीण क्षेत्रों में 460 हैंडपंप, 80 तालाब सूखे
ललितपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर तालाब व हैंडपंप सूखने से पेयजल संकट बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में 460 हैंडपंप और 80 तालाब सूख गए हैं। इससे निपटने के लिए टैंकर से जलापूर्ति की जा रही है। मानसून में देरी होने से जून में 128 ग्राम पंचायतें टैंकर के भरोसे हो गईं, जबकि मई में 70 गांवों में टैंकर से पीने के पानी की व्यवस्था हो रही थी। यदि बारिश और देर से हुई तो आने वाले दिनों में संकट गहरा सकता है।
मार्च के अंतिम सप्ताह में गर्मी का अहसास होने लगा था, उसके बाद गर्मी का प्रकोप निरंतर बढ़ता ही रहा। परिणाम यह हुआ कि नदी और, तालाबों का पानी भाप बनकर उड़ने लगा। हैंडपंपों का भूगर्भ जल स्तर भी पाताल की ओर सरक गया। इस समय विभिन्न ग्राम पंचायतों में करीब 460 हैंडपंप सूखे पड़े हैं। कमोवेश यही स्थिति ग्राम समाज के तालाबों की है। मत्स्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो जिले में 91 तालाबों में से नब्बे प्रतिशत तालाबों से पानी गायब हो गया है। सिंचाई विभाग ने मवेशियों के लिए पेयजल का इंतजाम करने के लिए नहरों से जुड़े तालाबों को विभिन्न बांधों से भरा है। बाकी तालाब बारिश होने पर ही भरे जा सकते हैं।
शहर का इकलौता सुम्मेरा तालाब भी सूखा पड़ा है, इसे भी बारिश होने का इंतजार है। ऐसे में ग्रामीणों को 35 पाइप पेयजल योजनाओं से पीने का पानी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अधिकांश परियोजनाएं गर्मी के मौसम में साथ नहीं दे रही हैं। आठ पाइप परियोजनाएं पूरी तरह बंद पड़ी हैं। 11 पाइप परियोजनाएं आंशिक रूप से ही पानी मुहैया करा पा रही हैं। विभागीय अफसरों ने पेयजल की समस्या को देखते हुए इनकी मरम्मत के लिए धनराशि की मांग शासन की थी, लेकिन अभी तक मरम्मत के लिए पैसा नहीं मिल सका। ग्राम पंचायतों के पास इतना बजट नहीं है कि वे खराब पड़ी परियोजनाओं की मरम्मत करा सकें। कुछ ग्राम पंचायतों ने छोटी-मोटी मरम्मत कराने का प्रयास किया, जो नाकाफी साबित हुआ है। मौजूदा हालात में ग्रामीणों के लिए टैंकर जलापूर्ति ही एकमात्र सहारा रह गई। मई में 70 ग्राम पंचायतों में 106 टैंकर से जलापूर्ति हो रही थी जो अब बढ़कर 128 ग्राम पंचायतों में 201 टैंकरों तक पहुंच गई है।
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खराब पाइप पेयजल योजनाओं की मरम्मत के लिए धनराशि की मांग की गई है, जो अब तक प्राप्त नहीं हुई है। इसे ध्यान में रखकर मामूली मरम्मत कराने के लिए ग्राम पंचायतों को कहा गया है। टैंकर चलाकर लोगों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
- श्रवण कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी
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ललितपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर तालाब व हैंडपंप सूखने से पेयजल संकट बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में 460 हैंडपंप और 80 तालाब सूख गए हैं। इससे निपटने के लिए टैंकर से जलापूर्ति की जा रही है। मानसून में देरी होने से जून में 128 ग्राम पंचायतें टैंकर के भरोसे हो गईं, जबकि मई में 70 गांवों में टैंकर से पीने के पानी की व्यवस्था हो रही थी। यदि बारिश और देर से हुई तो आने वाले दिनों में संकट गहरा सकता है।
मार्च के अंतिम सप्ताह में गर्मी का अहसास होने लगा था, उसके बाद गर्मी का प्रकोप निरंतर बढ़ता ही रहा। परिणाम यह हुआ कि नदी और, तालाबों का पानी भाप बनकर उड़ने लगा। हैंडपंपों का भूगर्भ जल स्तर भी पाताल की ओर सरक गया। इस समय विभिन्न ग्राम पंचायतों में करीब 460 हैंडपंप सूखे पड़े हैं। कमोवेश यही स्थिति ग्राम समाज के तालाबों की है। मत्स्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो जिले में 91 तालाबों में से नब्बे प्रतिशत तालाबों से पानी गायब हो गया है। सिंचाई विभाग ने मवेशियों के लिए पेयजल का इंतजाम करने के लिए नहरों से जुड़े तालाबों को विभिन्न बांधों से भरा है। बाकी तालाब बारिश होने पर ही भरे जा सकते हैं।
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शहर का इकलौता सुम्मेरा तालाब भी सूखा पड़ा है, इसे भी बारिश होने का इंतजार है। ऐसे में ग्रामीणों को 35 पाइप पेयजल योजनाओं से पीने का पानी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अधिकांश परियोजनाएं गर्मी के मौसम में साथ नहीं दे रही हैं। आठ पाइप परियोजनाएं पूरी तरह बंद पड़ी हैं। 11 पाइप परियोजनाएं आंशिक रूप से ही पानी मुहैया करा पा रही हैं। विभागीय अफसरों ने पेयजल की समस्या को देखते हुए इनकी मरम्मत के लिए धनराशि की मांग शासन की थी, लेकिन अभी तक मरम्मत के लिए पैसा नहीं मिल सका। ग्राम पंचायतों के पास इतना बजट नहीं है कि वे खराब पड़ी परियोजनाओं की मरम्मत करा सकें। कुछ ग्राम पंचायतों ने छोटी-मोटी मरम्मत कराने का प्रयास किया, जो नाकाफी साबित हुआ है। मौजूदा हालात में ग्रामीणों के लिए टैंकर जलापूर्ति ही एकमात्र सहारा रह गई। मई में 70 ग्राम पंचायतों में 106 टैंकर से जलापूर्ति हो रही थी जो अब बढ़कर 128 ग्राम पंचायतों में 201 टैंकरों तक पहुंच गई है।
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खराब पाइप पेयजल योजनाओं की मरम्मत के लिए धनराशि की मांग की गई है, जो अब तक प्राप्त नहीं हुई है। इसे ध्यान में रखकर मामूली मरम्मत कराने के लिए ग्राम पंचायतों को कहा गया है। टैंकर चलाकर लोगों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
- श्रवण कुमार सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी