{"_id":"658f13fc913be87047058f14","slug":"demand-for-60-lakhs-for-tourism-development-of-pandav-forest-area-lalitpur-news-c-131-1-ltp1002-8177-2023-12-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lalitpur News: पांडव वन क्षेत्र के पर्यटन विकास के लिए मांगे 60 लाख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lalitpur News: पांडव वन क्षेत्र के पर्यटन विकास के लिए मांगे 60 लाख
विज्ञापन
- महाभारत काल के समय की कई निशानियां इस वन क्षेत्र में हैं मौजूद
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। पांडव वन क्षेत्र के पर्यटन विकास के लिए वन विभाग ने शासन से प्रस्ताव तैयार 60 लाख रुपये की धनराशि मांगी है। इस धनराशि से वन क्षेत्र में पहुंच मार्ग व पाथवे तैयार किया जाएगा, साथ ही पर्यटनों की सुविधाओं को देखते हुए कार्य किए जाएंगे। वन विभाग ने इको पर्यटन के तहत कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी है।
मड़ावरा वन रेंज अंतर्गत पांडव वन में महाभारत काल की कई ऐतिहासिक निशानियां हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस वन क्षेत्र में पांडवों ने अपना वनवास काटा था। यहां पर प्राचीन हनुमान मंदिर, 6 प्राचीन शिवलिंग व औषधीय कुंड हैं। साथ ही पत्थरों पर प्राचीन कालीन कई चित्र भी मौजूद हैं। जो पांडवों से जुड़ा इतिहास दर्शाते हैं। वन क्षेत्र में होने के कारण यहां पर पर्यटन विभाग विकास कार्य नहीं करा पा रहा है। साथ ही वन क्षेत्र में सुगम रास्ता न होने के कारण पर्यटक यहां पर आसानी से नहीं पहुंच पाते हैं। जिला मुख्यालय से 68 किलोमीटर दूर स्थित इस रमणीक स्थान के चारों ओर घना जंगल है। जामनी नदी का बहता हुआ पानी इस स्थल को काफी खूबसूरत बनाता है। यहां के लिए नाराहट-पारौल मार्ग से होते हुए जाना पड़ता है। वन विभाग ने यहां पर पहुंच मार्ग के अलावा, पाथवे के अलावा मार्ग व्यवस्था एवं आराम के लिए प्रतीक्षालय बनाने की कार्य योजना बनाई जा रही है। इससे पहले पर्यटन विभाग के लिए यहां पर विकास कार्य कराने के लिए 30 लाख रुपये की धनराशि जारी हुई थी, लेकिन वन विभाग व पर्यावरण विभाग की एनओसी न मिलने के कारण यह धनराशि विभाग को सरेंडर करनी पड़ी। लेकिन वन विभाग को अगर शासन यह धनराशि जारी करता है, तो वहां विकास कार्य संभव होंगे, जिससे पर्यटक यहां पर आसानी से पहुंच कर यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे।
-- -- -- -- -- -- --
पर्यटन विकास के लिए कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी है, पांडव वन विकास कार्य के लिए 60 लाख रुपये की धनराशि मांगी गई है। धनराशि स्वीकृत होते ही यहां पर पर्यटन विकास के कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। पांडव वन क्षेत्र के पर्यटन विकास के लिए वन विभाग ने शासन से प्रस्ताव तैयार 60 लाख रुपये की धनराशि मांगी है। इस धनराशि से वन क्षेत्र में पहुंच मार्ग व पाथवे तैयार किया जाएगा, साथ ही पर्यटनों की सुविधाओं को देखते हुए कार्य किए जाएंगे। वन विभाग ने इको पर्यटन के तहत कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी है।
मड़ावरा वन रेंज अंतर्गत पांडव वन में महाभारत काल की कई ऐतिहासिक निशानियां हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस वन क्षेत्र में पांडवों ने अपना वनवास काटा था। यहां पर प्राचीन हनुमान मंदिर, 6 प्राचीन शिवलिंग व औषधीय कुंड हैं। साथ ही पत्थरों पर प्राचीन कालीन कई चित्र भी मौजूद हैं। जो पांडवों से जुड़ा इतिहास दर्शाते हैं। वन क्षेत्र में होने के कारण यहां पर पर्यटन विभाग विकास कार्य नहीं करा पा रहा है। साथ ही वन क्षेत्र में सुगम रास्ता न होने के कारण पर्यटक यहां पर आसानी से नहीं पहुंच पाते हैं। जिला मुख्यालय से 68 किलोमीटर दूर स्थित इस रमणीक स्थान के चारों ओर घना जंगल है। जामनी नदी का बहता हुआ पानी इस स्थल को काफी खूबसूरत बनाता है। यहां के लिए नाराहट-पारौल मार्ग से होते हुए जाना पड़ता है। वन विभाग ने यहां पर पहुंच मार्ग के अलावा, पाथवे के अलावा मार्ग व्यवस्था एवं आराम के लिए प्रतीक्षालय बनाने की कार्य योजना बनाई जा रही है। इससे पहले पर्यटन विभाग के लिए यहां पर विकास कार्य कराने के लिए 30 लाख रुपये की धनराशि जारी हुई थी, लेकिन वन विभाग व पर्यावरण विभाग की एनओसी न मिलने के कारण यह धनराशि विभाग को सरेंडर करनी पड़ी। लेकिन वन विभाग को अगर शासन यह धनराशि जारी करता है, तो वहां विकास कार्य संभव होंगे, जिससे पर्यटक यहां पर आसानी से पहुंच कर यहां के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकेंगे।
विज्ञापन
पर्यटन विकास के लिए कार्ययोजना तैयार कर शासन को भेजी है, पांडव वन विकास कार्य के लिए 60 लाख रुपये की धनराशि मांगी गई है। धनराशि स्वीकृत होते ही यहां पर पर्यटन विकास के कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।