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माताटीला बांध से छोड़े गए पानी से फसलें जलमग्न

Sun, 30 Aug 2020 10:49 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2020 10:49 PM IST
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crop water filled, matateela dam gate open
कैप्सन- 2- 3- खेत में भरा पानी 4- जलमग्न फसल में खड़ा किसान 5 -किसान नेता केशवेन्द्र सिंह 6-सियाराम लोधी 7- - फोटो : TALDEHATE
तालबेहट (ललितपुर)। शनिवार की रात माताटीला बांध के बीस गेट खोल कर तीन की गई लाख तेइस हजार क्यूसेक पानी की निकासी निचले भाग के छह गांवों के किसानों के लिए मुसीबत बन गई। कई किसानों के खेतों में खड़ी फसलें बांध से छोड़े गए पानी में जलमग्न हो गई। किसानों ने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर उन्हें मुआवजा दिलाने की मांग की है।
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मध्य प्रदेश में हो रही झमाझम बारिश का प्रभाव जनपद में दिख रहा हैं। नदी, नाले, तालाबों में जलस्तर बढ़ जाने के बाद जनपद के बांधों से भी पानी की निकासी हो रही है। यह निचले भाग के किसानों के लिए परेशानी पैदा कर रहा है। शनिवार को राजघाट से पानी छोड़े जाने के कारण माताटीला बांध में भी पानी का जलस्तर यकायक बढ़ गया। जिसके चलते रात में बांध के बीस गेट खोलकर लगभग तीन लाख तेईस हजार क्यूसेक पानी की निकासी की गई। जिसके चलते माताटीला से थाना गांव को जोड़ने वाले रास्ते में पानी भर गया। इसके अलावा आसपास के किसानों के खेतों में भी पानी पहुंच गया।
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बोले किसान-फसलों को बहुत नुकसान हुआ
वहीं बांध से छोड़ा गया पानी, बेतवा के किनारे वसे वर्मा बिहार, गेवरा गुंदेरा, उगरपुर, भैंसनवारा कलां, भैंसनवारा खुर्द आदि गांवों के किसानों के लिए काफी नुकसानदायक हुआ। इस पानी से उगरपुर गांव के केशवेन्द्र सिंह, नरेन्द्र सिंह, लखन, सियाराम, रज्जू, कमल सिंह, लाल सिंह, जय सिंह, जगदीश भैंसनवारा खुर्द गांव के बैजनाथ, स्वामी प्रसाद, अजब कुमारी, भगवान सिंह आदि की और भैंसनवारा कलां के धर्मेन्द्र, दयालु, कमलेश, पहलवान, सरपा, आदि किसानों की फसलें पानी में डूब गई। किसानों ने बताया कि इससे उनकी फसलों को काफी नुकसान हुआ हैं।
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बांध से यकायक छोड़े जाने वाले पानी से हर बार इन गांवों के किसानों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा हैं। प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
केशवेन्द्र सिंह किसान नेता
माताटीला बांध से बिना सूचना के रात में पानी छोड़ दिया गया। जिससे उसकी पूरी फसल जलमग्न हो गई। इससे पूरी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा हैं।
- सियाराम लोधी
इस बार काफी अच्छी फसल पैदा होने की आशा थी। शनिवार को रात में माताटीला बांध से यकायक छोड़ा गया। सुबह खेतों में फसल की जगह पानी ही पानी मिला।
- नवल सिंह, उगरपुर
शनिवार को राजघाट से पानी छोड़े जाने के बाद रात से ही माताटीला बांध के बीस गेेटों को 12 फुट की ऊंचाई से खोल कर तीन लाख तेईस हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
जीके मौर्या, अवर अभियंता माताटीला बॉध प्रखंड
मैंने लेखपालों और ग्राम प्रधानों को बांध से पानी छोड़े जाने की मुनादी कराने के लिए निर्देशित किया था। फसलों के नुकसान का सर्वे करवाता हूं। इसके बाद ही कुछ कह सकता हूं।
अनिल कुमार, उपजिलाधिकारी तालबेहट
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लगातार बारिश होने से भी फसलों को नुकसान, सड़ने लगी फसल
ङोगरा खुर्द/अर्जुन खिरिया। मध्य प्रदेश सहित जिले में हो रही बारिश से खरीफ फसल पर बुरा प्रभाव पड़ा है। जहां खेतों में खड़ी फसल के बीच बारिश का पानी जमा हो गया है। कुछ किसानों की फसलें पक कर तैयार खड़ी थीं लेकिन पिछले दिनों से लगातार बारिश हो रही है। जिस वजह से कुछ किसानों की फसलें सड़कर पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। कुछ खेतों में उड़द फसल की फलियां में अंकुरण आ गया है। कुछ ऐसे भी खेत हैं जहां पर सोयाबीन की फसल काली पड़ गई है तो कुछ खेतों में तेज हवा से फसल जमीन में गिर गई हैं। उधर, किसानों का कहना है कि वह आपदाओं को झेलते चले आ रहे हैं। तमाम किसान कर्ज में डूब गए हैं। कुछ किसान रोजगार की तलाश में अपने मकानों में ताले डालकर मजदूरी करने के लिए महानगरों की ओर जाने लगे हैं। इस साल खरीफ फसल से काफी अच्छी उम्मीद थी लेकिन बारिश के कारण खेतों में खड़ी फसलों में पीला मोजेक रोग लग गया है। उड़द, मूंग के पौधों की जड़े गल गई क्योंकि कई दिनों से धूप नहीं निकली है। पेड़ के फूल, फलिया पीली पड़ गए। किसानों के चेहरों पर मायूसी छाई हुई है। नाराहट क्षेत्र के डोंगरा खुर्द, अर्जुन खिरिया, बनयाना, मकरीपुर, बछरई, जमुनिया, बड़गाना, दिगवार, पटना आदि गांव की फसलों में रोग दिखाई देने लगा है। फसलों के पौधे पहले पीला हुए, इसके बाद फूल, फलियां सूख गई। कई खेतों में फसलें जलमग्न हैं। इन फसलों में बीज निकलने की भी आशा नहीं है। किसान जहीर खान ने बताया कि पचास किलों उड़द की बुवाई की थी और पूरा उड़द खेत में कटा हुआ रखा है। पानी से फलियां अंकुरित होने लगीं है।
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मूंग की फसल में बिल्कुल भी फलियां नहीं आई हैं। इसके अलावा तिलहन की फसल में ज्यादा बारिश से उक्सा लग गया है एवं मक्का खेतों में गिर गई है। किसान पहले ही कर्ज में डूबा हुआ है।
रमेश लोधी तरावली
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फसलों की फलिया लगातार बारिश होने से सड़ रही है क्योंकि ज्यादातर फसलें पक कर तैयार खड़ी थीं। कर्ज लेकर कीटनाशक दवाओं को खरीदा, अब फसल की लागत निकलना मुश्किल है।
आलम अहिरवार तरावली
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किसानों को फसलों की अच्छी उपज की उम्मीद थी लेकिन पीला मोजेक रोग लगने से फसलों का दाना छोटा पड़ गया है और खेतों में खड़े पौधे बिछ गए हैं। किसानों की मुसीबत बढ़ गई है।
श्रीकांत
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पीला मोजेक रोग लगने से फसलों में दाना छोटा पड़ गया है। अब रबी फसल की बुवाई की चिंता सताने लगी है। बारिश से किसान की फसलें खराब हो गई हैं, पता नहीं अब क्या होगा।

दशरथ पटेल बछरई

कैप्सन- 2- 3- खेत में भरा पानी 4- जलमग्न फसल में खड़ा किसान 5 -किसान नेता केशवेन्द्र सिंह 6-सियाराम लोधी 7-

कैप्सन- 2- 3- खेत में भरा पानी 4- जलमग्न फसल में खड़ा किसान 5 -किसान नेता केशवेन्द्र सिंह 6-सियाराम लोधी 7-- फोटो : TALDEHATE

कैप्सन- 2- 3- खेत में भरा पानी 4- जलमग्न फसल में खड़ा किसान 5 -किसान नेता केशवेन्द्र सिंह 6-सियाराम लोधी 7-

कैप्सन- 2- 3- खेत में भरा पानी 4- जलमग्न फसल में खड़ा किसान 5 -किसान नेता केशवेन्द्र सिंह 6-सियाराम लोधी 7-- फोटो : TALDEHATE

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