फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   Cobble was transformed into crude way

पक्की सड़क हुई कच्चे रास्ते में तब्दील

Mon, 01 Aug 2016 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 01 Aug 2016 12:23 AM IST
विज्ञापन
 Cobble was transformed into crude way
darti road, lalitpur news - फोटो : amar ujala, lalitpur news
ललितपुर। बरसात के मौसम का मजा लेने के लिए स्थानीय लोगों ने गोविंद सागर बांध पर आना शुरु कर दिया है, लेकिन यहां फैली अव्यवस्थाएं लोगों का मूड खराब कर रही हैं। बांध की पक्की सड़क कच्चे रास्ते में तबदील हो गई है और पार्क व कैंटीन का केवल नाम बचा है। 
विज्ञापन


गोविंद सागर बांध का निर्माण वर्ष 1952 में हुआ था। इन 64 वर्षों में बांध का विकास नहीं हो सका है। बांध बनाते समय इसमें स्वचालित प्रणाली का साइफन का निर्माण कराया गया था। इसी को देखने की चाह लोगों को बांध की ओर खींच लाती है। इसके अलावा प्रशासन व सिंचाई विभाग इन 64 वर्षों में बांध को ऐसा कुछ नहीं दे पाया है, जिससे यह लोगों के आकर्षण का केंद्र बन सके। वर्तमान में बारिश के मौसम के कारण स्थानीय लोग अपने मनोरंजन के लिए यहां पर चले आते हैं, लेकिन कुछ सुविधा नहीं होने के कारण वह चंद मिनट रुककर भुट्टा व चने खा-पीकर चले जाते हैं। 
विज्ञापन


बांध के साइफन व गेट देखने के लिए आने वाले लोगों के लिए बांध के बंध पर करीब साढ़े तीन किलोमीटर का मार्ग बना हुआ है, लेकिन इसकी स्थिति काफी बदतर हो गई है। इस मार्ग का निर्माण आखिरी बार कब हुआ था, लोग यह भी भूल गए हैं। दो दशक से अधिक का समय बीत गया है, जब इस मार्ग पर पक्की सड़क का निर्माण किया गया था। इसके बाद दोबारा सड़क का निर्माण नहीं किया गया, सड़क पूरी तरह से उखड़कर गढ्ढों में तबदील हो गई है, पक्की सड़क का नामोनिशान तक समाप्त हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बरसात के मौसम के दौरान यहां पर केवल लाल मिट्टी व मुरम डालकर गढ्ढों को भर दिया जाता है। बांध के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में लोगों की हालत खराब हो जाती है। प्रशासन द्वारा बांध पर कुछ नया तो बनाया नहीं गया है, पर रखरखाव के अभाव में पुरानी चीजों का अस्तित्तव भी खत्म हो गया है।
--------------
वर्षों बीते पर नहीं लग सकी लाइट
बांध के मार्ग पर रात में प्रकाश की व्यवस्था के लिए स्ट्रीट लाइट लगाई जानी थी। स्ट्रीट लाइट के लिए विभाग ने वर्षों पहले मार्ग पर हर सौ मीटर की दूूरी पर एक खंभा लगाया था। इसके लिए विभाग ने लाखों रुपए व्यय किए थे, लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते अब तक इन खंभों पर लाइट नहीं लग सकी है। शाम होते ही पूरा बांध अंधेरे में डूब जाता है। अंधेरे का फायदा उठाते हुए यहां पर अनैतिक गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है। रात होते ही यहां पर शराबियों का जमावड़ा होने लगाता है।

बांध की सुरक्षा के लिए भी प्रशासन द्वारा कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। यहां पर नहाते समय कई युवक डूबकर मर गए हैं। इसके अलावा पूर्व में यहां पर कई हत्याएं हो चुकी हैं। किसी घटना के बाद पुलिस कर्मियों की ड्यूटी यहांपर लगा दी जाती है, लेकिन समय बीतते ही सब पुराने जैसा हो जाता है। सुरक्षा के अभाव में ही बांध के मार्ग से दिन भर कई बड़े वाहन गुजरते रहते हैं।

--------------------
केवल कागजों पर बचा बगीचा
बांध पर घूमने के लिए आने वाले लोगों के मनोरंजन के लिए सिंचाई विभाग द्वारा करीब सात-आठ वर्ष पूर्व एक पार्क का निर्माण किया गया था। लाखों रुपए की लागत से पार्क का निर्माण किया गया था, इसमें बैठने की व्यवस्था, फव्वारा व फूलों के पेड़ों  के साथ-साथ बच्चों को मस्ती करने के लिए झूले व फिसल पट्टी बनाई गई थी। वहीं खान-पान सामग्री के लिए कैंटीन का भी निर्माण कराया गया था। रखरखाव के अभाव में यह पार्क अब अपना अस्तित्व खो चुका है। यहां पर केवल पार्क के कुछ अवशेष ही शेष रहे गए हैं। पार्क की दीवारें तक गायब हो गई हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed