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मुख्यमंत्री वायदा कर गए, पर नहीं लगा हैंडपंप
lalitpur
Updated Mon, 16 May 2016 01:33 AM IST
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पानी संकट
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। प्राचीन दशावतार मंदिर और जैन मंदिरों के कस्बा देवगढ़ से निकली बेतवा नदी सूख गई है। हाल ही में मुख्यमंत्री यहां आए थे और हैंडपंप लगाने का वायदा कर गए थे, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। ग्रामीण पानी के लिए परेशान हैं।
नगर से 32 किमी दूर मध्य प्रदेश की सीमा से लगे देवगढ़ के निवासियों को इस वर्ष सूखा के कारण पेयजल के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। देवगढ़ से निकली बेतवा नदी सूख चुकी है। अब नदी के बीच लोग पैदल ही नहीं, वाहनों से आते-जाते देखे जा सकते हैं। बेतवा नदी में दूर-दूर तक पानी दिखाई नहीं दे रहा है, जो थोड़ा बहुत पानी है, वह नदी में बने गड्ढों में भरा है। नदी में पानी नहीं होने से आसपास के ग्रामीण खासकर पशुओं को दिक्कत हो रही है। देवगढ़ बस्ती में भी जलस्तर काफी नीचे चला जाने के कारण पेयजल संकट गहरा गया है। प्राचीन कुआं व आदर्श तालाब सूख चुके हैं। आदर्श तालाब से जानवरों की प्यास बुझ जाती थी, लेकिन वहा भी अब पानी नहीं है। जानवर हैंडपंपों के गड्ढों में भरे पानी से प्यास बुझा रहे हैं। गांव में बस स्टैंड के पास एक हैंडपंप लगा है, जिससे दिन में आठ-दस बाल्टी ही पानी निकलता है। पंचायत भवन के सामने दो माह पूर्व क्षेत्रवासियों की प्यास बुझाने को जल निगम द्वारा साढ़े सात सौ फुट बोर कराया गया, लेकिन आज तक इस बोर से पानी निकालने के लिए मशीन नहीं लगाई गई। जबकि, इस बोर से पूरे गांव की प्यास आसानी से बुझाई जा सकती है।
सबसे अधिक पेयजल की दिक्कत दशावतार मंदिर के पीछे स्थित सहरिया बस्ती में है, जहां दो हैंडपंप लगे हैं, जिनमें से एक पूरी तरह सूख चुका हैं, जबकि दूसरे हैंडपंप से इंतजार के बाद दो-चार बाल्टी पानी निकल आता है। ऐसे में यहां के लोग बर्तन रखकर दूसरा काम निपटा लेते हैं, फिर आकर हैंडपंप से पानी निकालते हैं। शिव मंदिर के बाहर स्थित हैंडपंप ने भी पानी छोड़ दिया है। स्वास्थ्य केंद्र के सामने एक हैंडपंप से पानी की सप्लाई अच्छी है, जिससे सहरिया बस्ती व गांव के लोगों को पानी उपलब्ध हो जाता है। एक हैंडपंप पूर्व प्रधान के घर के सामने लगा है, जहां पानी के लिए नंबर लगाना होता है।
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पर्यटक आवास गृह के पास लगे हैंडपंप ने भी पानी छोड़ दिया है। मुक्ताकाशी मंच के बाहर लगे हैंडपंप का वाटर लेबल भी कम हो गया है, जिससे दिन में एक या दो बाल्टी जंगयुक्त पानी निकलता है, जो किसी काम का नहीं रहता। गांव में जलसंस्थान द्वारा पेयजल के लिए छोटी टंकी से पाइप लाइन डाली गई है, लेकिन इससे कभी-कभी सुबह मुश्किल से आधा घंटा पानी धीमी रफ्तार के साथ निकलता है। कई बार तो इस पाइप लाइन से पानी बिल्कुल भी नहीं दिया जाता है।
सीएम साहब के वायदे नहीं हुए पूरे
ललितपुर। पिछले माह जिले दौर पर आए प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर्यटक स्थल देवगढ़ में बलराम सिंह यादव के घर गए थे। बलराम की पत्नी अवध कुंवर ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से पेयजल समस्या निस्तारण के लिए घर के सामने लगे हैंडपंप में पाइप क्षमता बढ़ाने की मांग की थी, जिस पर उन्होंने हैंडपंप में क्षमतानुसार पाइप बढ़ाने और गांव में चार से पांच अतिरिक्त हैंडपंप लगवाने का वायदा किया था। लेकिन, अब तक न तो उनके घर के सामने लगे हैंडपंप की पाइप क्षमता बढ़ाई जा सकी और न ही गांव में और हैंडपंप लगाए जा सके हैं। ऐसे में सीएम साहब के वायदे हवा- हवाई साबित नजर आ रहे हैं।
सहरिया बस्ती में पेयजल के लिए एक मात्र हैंडपंप ही आसरा बचा है। सदर विधायक रमेश कुशवाहा के साथ उन्होंने जल संस्थान को प्रार्थना पत्र देकर अतिरिक्त हैंडपंप लगवाने की मांग की है, लेकिन 75 मीटर की दूरी के नियमों को हवाला देकर हैंडपंप नहीं लगाया जा रहा है। ऐसे में उन्हें व बस्ती के लोगों को एक हैंडपंप के सहारे पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
- मलखान सिंह
ग्रामीण।
फोटो- 21
कैप्सन- जोत सिंह।
गांव में पेयजल की काफी समस्या है। हर रोज पीने के पानी के लिए उन्हें दोपहर तक परेशान होना पड़ता है, तब कहीं जाकर पानी का किसी प्रकार इंतजाम हो पाता है। बस्ती में एकमात्र हैंडपंप है, जिससे रुक- रुक कर पानी आ रहा है। वृद्ध होने की वजह से पानी के लिए दूर तक चलना संभव नहीं है। इसलिए इसी हैंडपंप से दोपहर तक इंतजार करना मजबूरी है।
- जोत सिंह, ग्रामीण।
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नगर से 32 किमी दूर मध्य प्रदेश की सीमा से लगे देवगढ़ के निवासियों को इस वर्ष सूखा के कारण पेयजल के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। देवगढ़ से निकली बेतवा नदी सूख चुकी है। अब नदी के बीच लोग पैदल ही नहीं, वाहनों से आते-जाते देखे जा सकते हैं। बेतवा नदी में दूर-दूर तक पानी दिखाई नहीं दे रहा है, जो थोड़ा बहुत पानी है, वह नदी में बने गड्ढों में भरा है। नदी में पानी नहीं होने से आसपास के ग्रामीण खासकर पशुओं को दिक्कत हो रही है। देवगढ़ बस्ती में भी जलस्तर काफी नीचे चला जाने के कारण पेयजल संकट गहरा गया है। प्राचीन कुआं व आदर्श तालाब सूख चुके हैं। आदर्श तालाब से जानवरों की प्यास बुझ जाती थी, लेकिन वहा भी अब पानी नहीं है। जानवर हैंडपंपों के गड्ढों में भरे पानी से प्यास बुझा रहे हैं। गांव में बस स्टैंड के पास एक हैंडपंप लगा है, जिससे दिन में आठ-दस बाल्टी ही पानी निकलता है। पंचायत भवन के सामने दो माह पूर्व क्षेत्रवासियों की प्यास बुझाने को जल निगम द्वारा साढ़े सात सौ फुट बोर कराया गया, लेकिन आज तक इस बोर से पानी निकालने के लिए मशीन नहीं लगाई गई। जबकि, इस बोर से पूरे गांव की प्यास आसानी से बुझाई जा सकती है।
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सबसे अधिक पेयजल की दिक्कत दशावतार मंदिर के पीछे स्थित सहरिया बस्ती में है, जहां दो हैंडपंप लगे हैं, जिनमें से एक पूरी तरह सूख चुका हैं, जबकि दूसरे हैंडपंप से इंतजार के बाद दो-चार बाल्टी पानी निकल आता है। ऐसे में यहां के लोग बर्तन रखकर दूसरा काम निपटा लेते हैं, फिर आकर हैंडपंप से पानी निकालते हैं। शिव मंदिर के बाहर स्थित हैंडपंप ने भी पानी छोड़ दिया है। स्वास्थ्य केंद्र के सामने एक हैंडपंप से पानी की सप्लाई अच्छी है, जिससे सहरिया बस्ती व गांव के लोगों को पानी उपलब्ध हो जाता है। एक हैंडपंप पूर्व प्रधान के घर के सामने लगा है, जहां पानी के लिए नंबर लगाना होता है।
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सीएम साहब के वायदे नहीं हुए पूरे
ललितपुर। पिछले माह जिले दौर पर आए प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर्यटक स्थल देवगढ़ में बलराम सिंह यादव के घर गए थे। बलराम की पत्नी अवध कुंवर ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री से पेयजल समस्या निस्तारण के लिए घर के सामने लगे हैंडपंप में पाइप क्षमता बढ़ाने की मांग की थी, जिस पर उन्होंने हैंडपंप में क्षमतानुसार पाइप बढ़ाने और गांव में चार से पांच अतिरिक्त हैंडपंप लगवाने का वायदा किया था। लेकिन, अब तक न तो उनके घर के सामने लगे हैंडपंप की पाइप क्षमता बढ़ाई जा सकी और न ही गांव में और हैंडपंप लगाए जा सके हैं। ऐसे में सीएम साहब के वायदे हवा- हवाई साबित नजर आ रहे हैं।
सहरिया बस्ती में पेयजल के लिए एक मात्र हैंडपंप ही आसरा बचा है। सदर विधायक रमेश कुशवाहा के साथ उन्होंने जल संस्थान को प्रार्थना पत्र देकर अतिरिक्त हैंडपंप लगवाने की मांग की है, लेकिन 75 मीटर की दूरी के नियमों को हवाला देकर हैंडपंप नहीं लगाया जा रहा है। ऐसे में उन्हें व बस्ती के लोगों को एक हैंडपंप के सहारे पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
- मलखान सिंह
ग्रामीण।
फोटो- 21
कैप्सन- जोत सिंह।
गांव में पेयजल की काफी समस्या है। हर रोज पीने के पानी के लिए उन्हें दोपहर तक परेशान होना पड़ता है, तब कहीं जाकर पानी का किसी प्रकार इंतजाम हो पाता है। बस्ती में एकमात्र हैंडपंप है, जिससे रुक- रुक कर पानी आ रहा है। वृद्ध होने की वजह से पानी के लिए दूर तक चलना संभव नहीं है। इसलिए इसी हैंडपंप से दोपहर तक इंतजार करना मजबूरी है।
- जोत सिंह, ग्रामीण।