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Lalitpur News: विस्थापित आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को मिलेगी प्री-प्राइमरी शिक्षा
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ललितपुर। विस्थापित आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को अब प्राथमिक शिक्षा दी जाएगी। यह जिम्मेदारी ईसीसीई एजुकेटर्स को सौंपी गई है। इसकी कवायद शुरू कर दी गई है।
जिले में 1124 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, इनमें 295 आंगनबाड़ी परिषदीय विद्यालयों में हैं, इनको विस्थापित आंगनबाड़ी केंद्र कहते हैं। इसके साथ मर्ज किए गए सात विद्यालयों में बाल वाटिकाएं संचालित की जा रही हैं। यहां बाल वाटिका के रूप में तीन से छह साल तक के बच्चों को प्री-प्राइमरी की पढ़ाई कराई जाती है। अभी इसका जिम्मा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व संबंधित स्कूल का शिक्षक नोडल की भूमिका निभाता है। अब यहां अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ईसीसीई) देने की तैयारी की जा रही है। ईसीसीई एजुकेटर संबंधित विद्यालयों के आंगनबाड़ी केंद्र को बाल वाटिका के रूप में विकसित करने, यहां नामांकित तीन से छह साल के बच्चों को पूर्व प्राथमिक शिक्षा देंगे।
अधिकारियों के मुताबिक डीएम की अध्यक्षता वाली आठ सदस्यीय समिति ईसीसीई एजुकेटर का चयन करेगी। ईसीसीई एजुकेटर बनने के लिए शैक्षिक योग्यता और आयु का निर्धारण शासन के निर्देशानुसार होगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने इनके चयन की प्रक्रिया की कवायद शुरू कर दी है। जिला बेसिक शिक्षा रणवीर सिंह ने बताया कि ईसीसीई एजुकेटर बच्चों की पढ़ाई में बेहतर सहयोग करेंगे।
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एजुकेटर के ये रहेंगे प्रमुख दायित्व
- तीन से छह साल के बच्चों को औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार करना।
- पांच से छह साल के बच्चों पर ध्यान देते हुए निपुण भारत मिशन का लक्ष्य हासिल करना।
- अभिभावकों के साथ बैठक कर बच्चों की प्रगति के बारे में उन्हें बताना।
- बच्चों के विकास से संबंधित संकेतक को लेकर उनकी प्रोफाइल तैयार करना।
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जिले में 1124 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, इनमें 295 आंगनबाड़ी परिषदीय विद्यालयों में हैं, इनको विस्थापित आंगनबाड़ी केंद्र कहते हैं। इसके साथ मर्ज किए गए सात विद्यालयों में बाल वाटिकाएं संचालित की जा रही हैं। यहां बाल वाटिका के रूप में तीन से छह साल तक के बच्चों को प्री-प्राइमरी की पढ़ाई कराई जाती है। अभी इसका जिम्मा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व संबंधित स्कूल का शिक्षक नोडल की भूमिका निभाता है। अब यहां अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन (ईसीसीई) देने की तैयारी की जा रही है। ईसीसीई एजुकेटर संबंधित विद्यालयों के आंगनबाड़ी केंद्र को बाल वाटिका के रूप में विकसित करने, यहां नामांकित तीन से छह साल के बच्चों को पूर्व प्राथमिक शिक्षा देंगे।
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अधिकारियों के मुताबिक डीएम की अध्यक्षता वाली आठ सदस्यीय समिति ईसीसीई एजुकेटर का चयन करेगी। ईसीसीई एजुकेटर बनने के लिए शैक्षिक योग्यता और आयु का निर्धारण शासन के निर्देशानुसार होगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने इनके चयन की प्रक्रिया की कवायद शुरू कर दी है। जिला बेसिक शिक्षा रणवीर सिंह ने बताया कि ईसीसीई एजुकेटर बच्चों की पढ़ाई में बेहतर सहयोग करेंगे।
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एजुकेटर के ये रहेंगे प्रमुख दायित्व
- तीन से छह साल के बच्चों को औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार करना।
- पांच से छह साल के बच्चों पर ध्यान देते हुए निपुण भारत मिशन का लक्ष्य हासिल करना।
- अभिभावकों के साथ बैठक कर बच्चों की प्रगति के बारे में उन्हें बताना।
- बच्चों के विकास से संबंधित संकेतक को लेकर उनकी प्रोफाइल तैयार करना।