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बरवासन मंदिर: चौथी सदी में गौड़ राजाओं ने कराया था निर्माण

Sat, 13 Apr 2024 01:26 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 13 Apr 2024 01:26 AM IST
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Barvasan Temple: Built by Gaur kings in the fourth century
संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। विंध्य पर्वत में बुंदेलखंड की वैष्णो देवी कही जाने वाली मां बरवासन का धाम है। यहां लोगों की मनोकामना पूर्ण होती है, यही कारण है कि वर्ष भर धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता रहता है। यह प्राचीन मंदिर गौड़ राजाओं ने बनवाया था।
वीर भूमि बुंदेलखंड में प्राचीन दर्शनीय स्थल एक से बढ़कर एक हैं। जनपद मुख्यालय से 50 किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में कस्बा बालाबेहट से तीन किलोमीटर दूर धौर्रा मार्ग पर विंध्याचल पर्वत पर मां बरवासन धाम है। इस मंदिर को चौथी-पांचवीं सदी में बनवाया गया था। उस समय फैली महामारी से बचने के लिए ग्रामीणों ने मां की शरण ली थी। कहते हैं कि ऐसा चमत्कार हुआ कि यह बीमारी हमेशा के लिए इलाके से चली गई। प्राचीनकाल में मां बरवासन की करीब चार फीट ऊंची भव्य मूर्ति थी। 17वीं सदी में विदेशी आक्रमणकारियों ने इस मंदिर में भारी तबाही कर तोड़फोड़ की थी।
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करीब 200 साल पूर्व ग्रामीणों ने किसी प्रकार एक छोटी सी मड़िया में मूर्ति को पुन: स्थापित कर दिया था। यह मंदिर घने जंगल में स्थित है, इसलिए यहां कम लोग ही पहुंच पाते हैं। इन्हें विंध्यवासिनी मां के रूप में भी जाना जाता है। मंदिर की ख्याति व भक्तों की अगाध श्रद्धा के चलते इन्हें बुंदेलखंड की वैष्णो देवी के रूप में भी बताया जाता है। चैत्र व शारदीय नवरात्र में यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। यहां कई जंगली जानवर भी आसानी से देखे जा सकते हैं। शीतल पुरवाई व कुलांचे भरते मृगछौने, मोर, तोता, कोयल आदि पक्षियों का कलरव यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सारी थकान हर लेता है। मंदिर के नीचे पवित्र दो झरने भी हैं। यहां बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के भोजन व ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था है। यह मंदिर प्रदेश के ही नहीं पड़ोसी मध्यप्रदेश के हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
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एक ही तने से निकले 11 पेड़
मंदिर के नीचे स्थित झरने के किनारे एक विशालकाय पीपल का वृक्ष लगा है, जो अपनी विशिष्टताओं के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। इस पेड़ के तने से 11 वृक्ष निकले हैं। अर्जुन, पीपल, शिवपापरा, औंधी, करौंदा, तेंदू, नीम, कांकार, गुंज, पलास, बेल के पेड़ इसी जड़ से निकले हैं। एक साथ उगे इतने वृक्ष यहां भक्तों के प्रमुख आकर्षण का केंद्र हैं।


----------मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना कर लिया आशीर्वाद
ललितपुर। नवरात्र के चौथे दिन श्रद्धालुओं ने मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना कर दुर्गा सप्तसती का पाठ किया। प्रमुख देवी मंदिरों में सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया। किसी ने मंदिर में तो किसी ने घर पर दुर्गा सप्तसती का पाठ कर मां का आशीर्वाद लिया। शाम को महिलाओं ने भजन संध्या का आयोजन किया और रात में आरती के बाद प्रसाद वितरण किया। चंडी मंदिर में महामंडलेश्वर चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने माता रानी का पूजन अर्चन कर पाठ किया।
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