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Lalitpur News: पांच साल में भी नहीं हो पाया आकांक्षा समितियों का गठन
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- इन समितियों को देना था किसानों को दोहन का प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। वन विभाग ने किसानों को वनों से जड़ी बूटी दोहन करने का प्रशिक्षण देने के लिए आकांक्षा समितियों के गठन की कार्ययोजना बनाई थी। यह समितियों का गठन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से किया जाना था। साथ ही इस कार्ययोजना में किसानों को जड़ी-बूटियों का उचित दाम मिल सके, उसके निस्तारण के लिए भी कार्ययोजना तैयार की गई थी। मार्च में यह कार्ययोजना तैयार की गई थी, लेकिन पांच माह बीतने के बाद भी इन समितियों का गठन नहीं किया गया है।
वन क्षेत्र 76158 हेक्टेयर में फैला हुआ है, इसे नौ रेंजों में बांटा है। जिसमें माताटीला, तालबेहट, जखौरा, बार, ललितपुर, गौना, महरौनी, मड़ावरा ओर मदनपुर शामिल है। मड़ावरा, मदनपुर, गौना, व ललितपुर रेंज में जड़ी-बूटी का विशेष उत्पादन होता है। जिले के जंगलों में उपलब्ध जड़ी-बूटियों मे अडूसा, अर्जुनफल, अनंतमूल, अलसी, आंवला, इंद्रजौ, खस, गोरखमुंडी, गुडमार, गटारू, गूलर पान, गूलर फल, गिलोय, चित्रकमूल, जामुन, नीगुढ़पान, नीम पत्ती, निवोरी, नागरमोथा, पंवार, पलाश, टेसू बीज, नुार्वमूल, पुदीना, पनीर फूल, बबूल फली, बेलफल, बहेड़ा, बेलपत्ती, बारहीकंद, भुई आंवला, भृंगराज, गुग्धपर्णी, रतनजोत, रासनाबूटी, रीठा, लिसोरा, विधारा, वन तुलसी, बावची, शिवलिंगी, शीशम, शंखपुष्पी, शहद, सनायपत्ती, सरफोका, सेमर मूसली, हर्रा, हरश्रृंगार आदि शामिल हैं। किसान इन जड़ी बूटी का दोहन कर व्यापारियों को बेचते हैं, जिससे उनका उचित दाम नहीं मिलता है। साथ ही उचित प्रशिक्षण न होने के कारण किसान दोहन करते समय कई बार पेड़ों को भी नुकसान पहुंचा देते हैं। इस आकांक्षा समितियों से उन्हें दोहन का प्रशिक्षण दिया जाने की कार्ययोजना थी। लेकिन अभी तक इन समितियों को अस्तित्व में नहीं लाया गया है।
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आकांक्षा समितियों से मिलेगा किसानों को उचित दाम
शासनस्तर से इन जड़ी बूटियों का किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए आकांक्षा सेंटर वन क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे। सहरिया आदिवासी लोगों के लिए संचालित समूह इन जड़ी बूटी को खरीददार उनकी ब्रांडिंग करेंगे। इसके लिए उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने की तैयारी गई थी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के 14 समूहों का चयन किया जाना था, जो अभी तक नहीं हो पाया है।
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बरसात के बाद इस कार्ययोजना पर कार्य किया जाएगा। एनआरएलएम से संचालित समूहों को इनमें शामिल किया जाएगा। पौधरोपण आदि के कार्य होने के कारण इस योजना पर कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है।
गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। वन विभाग ने किसानों को वनों से जड़ी बूटी दोहन करने का प्रशिक्षण देने के लिए आकांक्षा समितियों के गठन की कार्ययोजना बनाई थी। यह समितियों का गठन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से किया जाना था। साथ ही इस कार्ययोजना में किसानों को जड़ी-बूटियों का उचित दाम मिल सके, उसके निस्तारण के लिए भी कार्ययोजना तैयार की गई थी। मार्च में यह कार्ययोजना तैयार की गई थी, लेकिन पांच माह बीतने के बाद भी इन समितियों का गठन नहीं किया गया है।
वन क्षेत्र 76158 हेक्टेयर में फैला हुआ है, इसे नौ रेंजों में बांटा है। जिसमें माताटीला, तालबेहट, जखौरा, बार, ललितपुर, गौना, महरौनी, मड़ावरा ओर मदनपुर शामिल है। मड़ावरा, मदनपुर, गौना, व ललितपुर रेंज में जड़ी-बूटी का विशेष उत्पादन होता है। जिले के जंगलों में उपलब्ध जड़ी-बूटियों मे अडूसा, अर्जुनफल, अनंतमूल, अलसी, आंवला, इंद्रजौ, खस, गोरखमुंडी, गुडमार, गटारू, गूलर पान, गूलर फल, गिलोय, चित्रकमूल, जामुन, नीगुढ़पान, नीम पत्ती, निवोरी, नागरमोथा, पंवार, पलाश, टेसू बीज, नुार्वमूल, पुदीना, पनीर फूल, बबूल फली, बेलफल, बहेड़ा, बेलपत्ती, बारहीकंद, भुई आंवला, भृंगराज, गुग्धपर्णी, रतनजोत, रासनाबूटी, रीठा, लिसोरा, विधारा, वन तुलसी, बावची, शिवलिंगी, शीशम, शंखपुष्पी, शहद, सनायपत्ती, सरफोका, सेमर मूसली, हर्रा, हरश्रृंगार आदि शामिल हैं। किसान इन जड़ी बूटी का दोहन कर व्यापारियों को बेचते हैं, जिससे उनका उचित दाम नहीं मिलता है। साथ ही उचित प्रशिक्षण न होने के कारण किसान दोहन करते समय कई बार पेड़ों को भी नुकसान पहुंचा देते हैं। इस आकांक्षा समितियों से उन्हें दोहन का प्रशिक्षण दिया जाने की कार्ययोजना थी। लेकिन अभी तक इन समितियों को अस्तित्व में नहीं लाया गया है।
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आकांक्षा समितियों से मिलेगा किसानों को उचित दाम
शासनस्तर से इन जड़ी बूटियों का किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए आकांक्षा सेंटर वन क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे। सहरिया आदिवासी लोगों के लिए संचालित समूह इन जड़ी बूटी को खरीददार उनकी ब्रांडिंग करेंगे। इसके लिए उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने की तैयारी गई थी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के 14 समूहों का चयन किया जाना था, जो अभी तक नहीं हो पाया है।
बरसात के बाद इस कार्ययोजना पर कार्य किया जाएगा। एनआरएलएम से संचालित समूहों को इनमें शामिल किया जाएगा। पौधरोपण आदि के कार्य होने के कारण इस योजना पर कार्य प्रारंभ नहीं हो पाया है।
गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी