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विद्यालय परिसर में जानवरों का जमावड़ा !
lalitpur
Updated Mon, 04 Jul 2016 01:12 AM IST
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मिड डे मील
- फोटो : amar ujala
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छायन/महरौनी (ललितपुर)। तहसील अंतर्गत ग्राम छायन के परिषदीय विद्यालय इन दिनों जानवरों की आरामगाह बने हुए हैं। लंबे समय से विद्यालय के पीछे की बाउंड्रीवाल टूट गई थी, जिस वजह से विद्यालय परिसर में आवारा जानवरों का जमावड़ा हो रहा है और इससे विद्यालय के कामकाज प्रभावित हो रहे हैं।
ग्राम छायन में कुम्हैड़ी तिराहा के पास प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय स्थित हैं। दोनों विद्यालय भवन आपस में सटे हुए हैं और दोनों भवनों की एक ही बाउंड्रीवाल है। विद्यालय परिसर के पीछे जलभराव की समस्या बनी रहती है और इसी वजह से करीब दो साल पहले विद्यालय के पीछे वाली बाउंड्रीवाल लगभग सौ फीट टूट कर गिर गई थी। ऐसे में अब रोज पीछे से अनेक आवारा जानवर विद्यालय परिसर में घुस जाते हैं। विद्यालय परिसर में हर साल पौधारोपण होता है लेकिन अभी तक लगाए सभी पौधे जानवरों की खुराक बन गए हैं। इसके अलावा जानवरों के जमावड़ा से विद्यालय के बरामदों में गंदगी फैलती है ।
वहीं मिड-डे मील के संचालन में भी दिक्कत हो रही है क्यों कि जरा सा ध्यान हटने पर जानवर भोजन में मुंह मार जाते हैं। छात्र-छात्राएं जानवरों के बीच भोजन करने को मजबूर हैं।
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बच्चे जब भोजन करते हैं तो वहीं आसपास ये जानवर मंडराते रहते हैं जिनको बार बार खदेड़ने के बावजूद वह फिर विद्यालय में घुस जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी तो आवारा सुअरों से है ,जो विद्यालय भवन के पीछे अपना डेरा जमा चुके हैं आवारा सुअर काफी गंदगी फैला रहे हैं , ऐसे में बीमारियाँ फैलने का अंदेशा बना हुआ है । विद्यालय में जानवरों की वजह से हो रही रोज की दिक्कतों से निजात तभी मिल सकती है जब विद्यालय परिसर की पीछे की टूटी बाउंड्रीवाल का नव निर्माण हो जाएगा। हर साल विद्यालयों के रखरखाव के लिए धनराशि आती है लेकिन फिर भी अभी तक बाउंड्रीवाल नहीं बनवायी गयी है।
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ग्राम छायन में कुम्हैड़ी तिराहा के पास प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय स्थित हैं। दोनों विद्यालय भवन आपस में सटे हुए हैं और दोनों भवनों की एक ही बाउंड्रीवाल है। विद्यालय परिसर के पीछे जलभराव की समस्या बनी रहती है और इसी वजह से करीब दो साल पहले विद्यालय के पीछे वाली बाउंड्रीवाल लगभग सौ फीट टूट कर गिर गई थी। ऐसे में अब रोज पीछे से अनेक आवारा जानवर विद्यालय परिसर में घुस जाते हैं। विद्यालय परिसर में हर साल पौधारोपण होता है लेकिन अभी तक लगाए सभी पौधे जानवरों की खुराक बन गए हैं। इसके अलावा जानवरों के जमावड़ा से विद्यालय के बरामदों में गंदगी फैलती है ।
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वहीं मिड-डे मील के संचालन में भी दिक्कत हो रही है क्यों कि जरा सा ध्यान हटने पर जानवर भोजन में मुंह मार जाते हैं। छात्र-छात्राएं जानवरों के बीच भोजन करने को मजबूर हैं।
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बच्चे जब भोजन करते हैं तो वहीं आसपास ये जानवर मंडराते रहते हैं जिनको बार बार खदेड़ने के बावजूद वह फिर विद्यालय में घुस जाते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी तो आवारा सुअरों से है ,जो विद्यालय भवन के पीछे अपना डेरा जमा चुके हैं आवारा सुअर काफी गंदगी फैला रहे हैं , ऐसे में बीमारियाँ फैलने का अंदेशा बना हुआ है । विद्यालय में जानवरों की वजह से हो रही रोज की दिक्कतों से निजात तभी मिल सकती है जब विद्यालय परिसर की पीछे की टूटी बाउंड्रीवाल का नव निर्माण हो जाएगा। हर साल विद्यालयों के रखरखाव के लिए धनराशि आती है लेकिन फिर भी अभी तक बाउंड्रीवाल नहीं बनवायी गयी है।