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सतर्क तो हैं, लेकिन परीक्षण की सुविधा नहीं
amarujala
Updated Fri, 04 Aug 2017 01:19 AM IST
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hospital lalitpur news
- फोटो : demo
ललितपुर। जानलेवा और संक्रमित बीमारी स्वाईन फ्लू नगर में करीब डेढ़ पूर्व दस्तक दे चुकी है, इससे एक व्यक्ति की जान तक चली गई थी, लेकिन इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के पास मात्र प्राथमिक उपचार के अलावा अन्य कोई परीक्षण और बेहतरीन इलाज की सुविधा नहीं है। स्वास्थ्य विभाग सतर्क तो है, कुछ करने की मंशा भी रखता है, लेकिन परीक्षण की सुविधा नहीं होने के चलते कई लोग बीमारी की अनभिज्ञता में काल के गाल में चले जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य निदेशालय ने स्वाइन फ्लू की जांच के लिए परीक्षण किट की मांग की है, ताकि संदेह होने पर तत्काल जांच कराई जा सके और रोगी को बेहतरीन और समय से इलाज मुहैया कराया जा सके।
जनपद में कहीं भी संक्रमित बीमारियों से निपटने और उसके उपचार की सुविधा की जिम्मेवारी स्वास्थ्य विभाग की है। यहां तक कि बीमारियों के रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग विभिन्न पहलुओं के तहत पहल करता है। बीमारियों के फैलने वाली जगहों को चिह्नित करते हुए साफ-सफाई के साथ ही आवश्यक दवाओं का वितरण भी करता है, ताकि बीमारियों के संक्रमण को रोका जा सके। वहीं बारिश के मौसम में नमी बढ़ने के साथ ही संक्रमित बीमारियों के फैलने का खतरा अधिक हो जाता है। इनमें डेंगूं, मलेरिया, चिकनगुनिया और स्वाईन फ्लू की बीमारियां शामिल हैं। जिनका समय से उपचार नहीं होने पर ये बीमारियां जानलेवा तक साबित होती हैं। स्वास्थ्य विभाग डेंगूं व मलेरिया की रोकथाम के लिए लगातार कोशिशों में जुटा हुआ है, साथ ही स्वाईन फ्लू से बचाव के लिए मास्क, टेमीफ्लू टैबलेट की व्यवस्था इमर्जेंसी के तौर पर की गई है। लेकिन जनपद में स्वाइन फ्लू की पुष्टि के लिए कोई भी परीक्षण सुविधा उपलब्ध नहीं है। हालांकि यही हाल डेंगूं बीमारी में भी पाथमिक उपचार और प्राथमिक परीक्षण की ही सुविधा उपलब्ध है। वहीं चिकन गुनिया जैसी बीमारी की जांच के लिए भी परीक्षण किट स्वास्थ्य महकमे के पास उपलब्ध नहीं है। स्वाईन फ्लू होने का संदेह होने पर मरीज का ब्लड सैंपल लेकर मेडिकल कॉलेज भेजकर ही पुष्टि कराई जाती है। जबकि जिला अस्पताल में बहुत सी संक्रामक बीमारियों की जांच नहीं होने के चलते पता भी लग पाता है और उसकी मौत तक हो जाती है। ऐसा ही एक मामला डेढ़ माह पूर्व स्वास्थ्य निदेशालय से मिली जानकारी के बाद सामने आया। जिसमें बताया गया था कि आजादपुरा निवासी केके सोनी पुत्र मथुरा प्रसाद सोनी निमोनिया होने की आशंका में पहले तो उनका ललितपुर नार्मल फीवर व खांसी की शिकायत होने पर इलाज किया गया। लेकिन जब ठीक नहीं हुए तो वह 22 अप्रैल को भोपाल के एक बड़े अस्पताल में इलाज को गए, लेकिन लाभ नहीं मिलने पर 13 मई को दिल्ली केे सरगंगाराम अस्पताल पहुंचे थे। जहां उन्हें फेफड़ों में इंफैक्शन की शिकायत बताई और स्वाईन फ्लू की पुष्टि की गई थी। जिसके बाद 15 मई को उनकी स्वाईन फ्लू बीमारी होने के चलते मौत हो गई थी। इस समय तक तो नगर के स्वास्थ्य विभाग को भी इसकी भनक नहीं थी। लेकिन जब स्वास्थ्य महानिदेशालय से इसकी रिपोर्ट आई तो स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हुआ और घर परिवार के सदस्यों को बचाव के लिए इंतजाम और उपचार भी किए। साथ ही मुहल्ले में भी इसकी जांच की गई, ताकि कोई सदस्य इसके प्रभाव से ग्रसित तो नहीं हुआ। इसके लिए मुहल्ले व घर में सात दिन तक लगातार सर्वे किया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हुआ और स्वास्थ्य महानिदेशालय से स्वाईन फ्लूू की जांच के लिए आवश्यक परीक्षण किट की मांग की गई है, ताकि स्वाईन फ्लूू की आशंका होने पर प्राथमिक तौर पर पुष्टि की जा सके। वहीं गत माह की 26 जून को थाना बानपुर अंतर्गत ग्राम बड़ोखरा निवासी कुंजी की चार वर्षीय पुत्री मोहनी की भी जिला चिकित्सालय में संदिग्ध बीमारी के चलते मौत हो गई थी। लेकिन जांच की सुविधा का अभाव होने के चलते मौत के कारणों की पुष्टि नहीं हो सकी थी।
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यह है स्वाईन फ्लू के लक्षण और कारण
स्वाईन फ्लू एक संक्रमित रोग है, जो एच1 एन1 वायरस होता है। यह वायरस आमतौर पर सुअर में होते हैं। शुरुआती लक्षणों में अन्य वायरल बुखारों जैसे लक्षण यानि बुखार होना, गले में खराश होना, गले में दर्द होना, सांस लेने में अधिक दिक्कत होना, जुकाम होने पर अधिकतर नाक का बहना पाए जाते हैं। इसके साथ ही जो डायबिटीज से पीड़ित 70 साल से ऊपर के वृद्घ होते हैं, उनमें रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है और ऐसे लोगों में ऐसी बीमारी से आसानी से ग्रसित होने की संभावना अधिक होती है।
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जिला अस्पताल में यह है व्यवस्था
ललितपुर। स्वाईन फ्लू या डेंगूं जैसी बीमारी होने पर स्वास्थ्य महकमें द्वारा जिला अस्पताल द्वारा दस बैड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। साथ ही स्वाईन फ्लू होने पर तीन महीने पहले वैक्सीन उपलब्ध है, जो मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ के लिए ही है, जो ऐसी बीमारी से ग्रसित मरीजों का इलाज करते हैं। टेमीफ्लू टैबलेट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जा चुकी है।
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इनका कहना है-
जनपद में डेढ़ माह पूर्व स्वाईन फ्लू का एक केस नगर का सामने आया था, जिसका इलाज दिल्ली की सर गंगाराम अस्पताल में हुआ था और वहीं उसकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग लगातार अलर्ट पर है। वैक्सीन और टेमीफ्लू टैबलेट जिला अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। मास्क भी मंगाए गए हैं। स्वाईन फ्लू की जांच के लिए परीक्षण किट की मांग स्वास्थ्य निदेशालय से की गई है, जिसके लिए पत्र लिखा जा चुका है।
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जनपद में कहीं भी संक्रमित बीमारियों से निपटने और उसके उपचार की सुविधा की जिम्मेवारी स्वास्थ्य विभाग की है। यहां तक कि बीमारियों के रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग विभिन्न पहलुओं के तहत पहल करता है। बीमारियों के फैलने वाली जगहों को चिह्नित करते हुए साफ-सफाई के साथ ही आवश्यक दवाओं का वितरण भी करता है, ताकि बीमारियों के संक्रमण को रोका जा सके। वहीं बारिश के मौसम में नमी बढ़ने के साथ ही संक्रमित बीमारियों के फैलने का खतरा अधिक हो जाता है। इनमें डेंगूं, मलेरिया, चिकनगुनिया और स्वाईन फ्लू की बीमारियां शामिल हैं। जिनका समय से उपचार नहीं होने पर ये बीमारियां जानलेवा तक साबित होती हैं। स्वास्थ्य विभाग डेंगूं व मलेरिया की रोकथाम के लिए लगातार कोशिशों में जुटा हुआ है, साथ ही स्वाईन फ्लू से बचाव के लिए मास्क, टेमीफ्लू टैबलेट की व्यवस्था इमर्जेंसी के तौर पर की गई है। लेकिन जनपद में स्वाइन फ्लू की पुष्टि के लिए कोई भी परीक्षण सुविधा उपलब्ध नहीं है। हालांकि यही हाल डेंगूं बीमारी में भी पाथमिक उपचार और प्राथमिक परीक्षण की ही सुविधा उपलब्ध है। वहीं चिकन गुनिया जैसी बीमारी की जांच के लिए भी परीक्षण किट स्वास्थ्य महकमे के पास उपलब्ध नहीं है। स्वाईन फ्लू होने का संदेह होने पर मरीज का ब्लड सैंपल लेकर मेडिकल कॉलेज भेजकर ही पुष्टि कराई जाती है। जबकि जिला अस्पताल में बहुत सी संक्रामक बीमारियों की जांच नहीं होने के चलते पता भी लग पाता है और उसकी मौत तक हो जाती है। ऐसा ही एक मामला डेढ़ माह पूर्व स्वास्थ्य निदेशालय से मिली जानकारी के बाद सामने आया। जिसमें बताया गया था कि आजादपुरा निवासी केके सोनी पुत्र मथुरा प्रसाद सोनी निमोनिया होने की आशंका में पहले तो उनका ललितपुर नार्मल फीवर व खांसी की शिकायत होने पर इलाज किया गया। लेकिन जब ठीक नहीं हुए तो वह 22 अप्रैल को भोपाल के एक बड़े अस्पताल में इलाज को गए, लेकिन लाभ नहीं मिलने पर 13 मई को दिल्ली केे सरगंगाराम अस्पताल पहुंचे थे। जहां उन्हें फेफड़ों में इंफैक्शन की शिकायत बताई और स्वाईन फ्लू की पुष्टि की गई थी। जिसके बाद 15 मई को उनकी स्वाईन फ्लू बीमारी होने के चलते मौत हो गई थी। इस समय तक तो नगर के स्वास्थ्य विभाग को भी इसकी भनक नहीं थी। लेकिन जब स्वास्थ्य महानिदेशालय से इसकी रिपोर्ट आई तो स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हुआ और घर परिवार के सदस्यों को बचाव के लिए इंतजाम और उपचार भी किए। साथ ही मुहल्ले में भी इसकी जांच की गई, ताकि कोई सदस्य इसके प्रभाव से ग्रसित तो नहीं हुआ। इसके लिए मुहल्ले व घर में सात दिन तक लगातार सर्वे किया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हुआ और स्वास्थ्य महानिदेशालय से स्वाईन फ्लूू की जांच के लिए आवश्यक परीक्षण किट की मांग की गई है, ताकि स्वाईन फ्लूू की आशंका होने पर प्राथमिक तौर पर पुष्टि की जा सके। वहीं गत माह की 26 जून को थाना बानपुर अंतर्गत ग्राम बड़ोखरा निवासी कुंजी की चार वर्षीय पुत्री मोहनी की भी जिला चिकित्सालय में संदिग्ध बीमारी के चलते मौत हो गई थी। लेकिन जांच की सुविधा का अभाव होने के चलते मौत के कारणों की पुष्टि नहीं हो सकी थी।
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यह है स्वाईन फ्लू के लक्षण और कारण
स्वाईन फ्लू एक संक्रमित रोग है, जो एच1 एन1 वायरस होता है। यह वायरस आमतौर पर सुअर में होते हैं। शुरुआती लक्षणों में अन्य वायरल बुखारों जैसे लक्षण यानि बुखार होना, गले में खराश होना, गले में दर्द होना, सांस लेने में अधिक दिक्कत होना, जुकाम होने पर अधिकतर नाक का बहना पाए जाते हैं। इसके साथ ही जो डायबिटीज से पीड़ित 70 साल से ऊपर के वृद्घ होते हैं, उनमें रोगों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है और ऐसे लोगों में ऐसी बीमारी से आसानी से ग्रसित होने की संभावना अधिक होती है।
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जिला अस्पताल में यह है व्यवस्था
ललितपुर। स्वाईन फ्लू या डेंगूं जैसी बीमारी होने पर स्वास्थ्य महकमें द्वारा जिला अस्पताल द्वारा दस बैड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। साथ ही स्वाईन फ्लू होने पर तीन महीने पहले वैक्सीन उपलब्ध है, जो मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ के लिए ही है, जो ऐसी बीमारी से ग्रसित मरीजों का इलाज करते हैं। टेमीफ्लू टैबलेट पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराई जा चुकी है।
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इनका कहना है-
जनपद में डेढ़ माह पूर्व स्वाईन फ्लू का एक केस नगर का सामने आया था, जिसका इलाज दिल्ली की सर गंगाराम अस्पताल में हुआ था और वहीं उसकी मृत्यु हो गई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग लगातार अलर्ट पर है। वैक्सीन और टेमीफ्लू टैबलेट जिला अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। मास्क भी मंगाए गए हैं। स्वाईन फ्लू की जांच के लिए परीक्षण किट की मांग स्वास्थ्य निदेशालय से की गई है, जिसके लिए पत्र लिखा जा चुका है।