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खेती के लिए आधुनिक तकनीक का करें उपयोग
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Fri, 19 Feb 2016 01:04 AM IST
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ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना (छात्र इकाई) द्वारा ग्राम पटौरा कलां में चल रहे सात दिवसीय शिविर के तीसरे दिन विचार गोष्ठी में ग्रामीणों को कृषि में उपयोग होने वाली नवीन तकनीक की जानकारी दी।
मुख्य अतिथि विभागाध्यक्ष डा. अवनीश त्रिपाठी ने स्वयं सेवकों व उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि बुंदेलखंड विगत वर्षों से जल संकट से जूझ रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थित बिगड़ती जा रही है। जलवायु परिवर्तन का असर भी उत्पादन के गिरते स्तर को दिख रहा है। आर्थिक तंगी से पीड़ित किसान अपना व परिवार का भरण-पोषण करने के लिए रोजगार की तलाश में अन्य प्रदेशों में पलायन करने को मजबूर हैं। ऐसी स्थित में बुंदेलखंड में कृषि को लाभप्रद बनाने और किसानों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए कृषि में नई तकनीक का समावेश करना आवश्यक है। किसान ऐसी प्रजातियों की फसलें बोएं, जिसमें पानी की आवश्यकता कम हो।
सिंचाई हेतु बौछारी सिंचाई का प्रयोग करना चाहिए। विशिष्ट अतिथि कीट विज्ञान विभागाध्यक्ष डा. जगत कौशिक ने बताया कि फसलों में रासायनिक कीटनाशकों का ज्यादा मात्रा में प्रयोग करना फसलों को नुकसान पहुंचाता है। कार्यक्रम अधिकारी डा. लक्ष्मीकांत मिश्रा ने भी विचार व्यक्त किए। इस दौरान कुलदीप तिवारी, उवेश अहमद, राघवेंद्र, गौरव परिहार, शशांक दीक्षित, संजय कुमार, विजय सिंह यादव, राहुल, लोकेश, उत्तम बिरला, नमन पाटिदार, अतिशय जैन, अरविंद यादव, अनिल पटेल, अंकित कुमार, अर्पित द्विवेदी आदि मौजूद रहे। संचालन विकास एवं नाजिम खान ने किया। आभार स्वदेश सिंह ने व्यक्त किया।
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मुख्य अतिथि विभागाध्यक्ष डा. अवनीश त्रिपाठी ने स्वयं सेवकों व उपस्थित ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि बुंदेलखंड विगत वर्षों से जल संकट से जूझ रहा है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थित बिगड़ती जा रही है। जलवायु परिवर्तन का असर भी उत्पादन के गिरते स्तर को दिख रहा है। आर्थिक तंगी से पीड़ित किसान अपना व परिवार का भरण-पोषण करने के लिए रोजगार की तलाश में अन्य प्रदेशों में पलायन करने को मजबूर हैं। ऐसी स्थित में बुंदेलखंड में कृषि को लाभप्रद बनाने और किसानों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए कृषि में नई तकनीक का समावेश करना आवश्यक है। किसान ऐसी प्रजातियों की फसलें बोएं, जिसमें पानी की आवश्यकता कम हो।
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सिंचाई हेतु बौछारी सिंचाई का प्रयोग करना चाहिए। विशिष्ट अतिथि कीट विज्ञान विभागाध्यक्ष डा. जगत कौशिक ने बताया कि फसलों में रासायनिक कीटनाशकों का ज्यादा मात्रा में प्रयोग करना फसलों को नुकसान पहुंचाता है। कार्यक्रम अधिकारी डा. लक्ष्मीकांत मिश्रा ने भी विचार व्यक्त किए। इस दौरान कुलदीप तिवारी, उवेश अहमद, राघवेंद्र, गौरव परिहार, शशांक दीक्षित, संजय कुमार, विजय सिंह यादव, राहुल, लोकेश, उत्तम बिरला, नमन पाटिदार, अतिशय जैन, अरविंद यादव, अनिल पटेल, अंकित कुमार, अर्पित द्विवेदी आदि मौजूद रहे। संचालन विकास एवं नाजिम खान ने किया। आभार स्वदेश सिंह ने व्यक्त किया।
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