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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   36.48 crore extinguished with the thirst of a dozen villages

36.48 करोड़ से बुझेगी एक दर्जन गांवों की प्यास

Mon, 12 Oct 2015 12:31 AM IST
ललितपुर
ललितपुर Updated Mon, 12 Oct 2015 12:31 AM IST
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ललितपुर। ब्लाक जखौरा के एक दर्जन गांवों को रानीपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के माध्यम से जोड़ कर पानी पहुंचाया जाएगा। इस पर 36.48 करोड़ रुपये खर्च होंगे। चार स्थानों पर पानी की टंकियां बनाकर पाइप लाइन डाली जाएगी, जिनसे गांवों और मजरों को जोड़कर पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी।

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  केंद्र व प्रदेश सरकार सुदूर अंचल में बसे गांवों के लोगों तक साफ पानी पहुंचाने के लिए योजनाएं बना रही हैं। इसके अंतर्गत गांवों के साथ मजरों ( कम आबादी वाले गांव) को जोड़ने का काम चल रहा है। जनपद में जल निगम ने एक  सैकड़ा से अधिक गांवों में पानी पहुंचाने के लिए कार्ययोजना तैयार की, जिसके अंतर्गत ग्राम समूह पेयजल योजना व एकल ग्राम योजनाएं स्वीकृत की गईं। ब्लाक जखौरा के एक दर्जन गांवों में पानी पहुंचाने के लिए रानीपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना से गांवों को जोड़ा जाएगा। योजना के अंतर्गत बेतवा नदी से पानी लिफ्ट कर करीब 15 किमी लंबी पाइप लाइन डाली जाएगी। इसके अलावा ग्राम सखरवार खुर्द में ट्रीटमेंट प्लांट व टंकी का निर्माण किया जाएगा। 12  गांवों तक पानी पहुंच सके, इसके लिए ग्राम रानीपुरा, मड़वारी व सीरोन खुर्द  में भी पानी की टंकियां बनाई जाएंगी। इन टंकियों से ग्राम रानीपुरा,  मैलार, सखरवार खुर्द, मेनौरा, देवरी, करमुहारा, मड़वारी, भरतपुरा, सेवर, सीरोन खुर्द, सीरोन कलां और सतगथा आदि गांव में पाइप लाइन डाली जाएंगी। गांव के साथ मजरों को भी पाइप लाइन से जोड़ा जाएगा। इस योजना पर 36.48 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। जल निगम के परियोजना निदेशक लालजीत की मानें तो रानीपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना पर काम शुरू कर दिया गया है।  तीन माह में योजना बनकर तैयार हो जाएगी। इस योजना के पूर्ण होते ही 12 गांव  को पानी पहुंचना शुरू हो जाएगा, इसका लाभ ग्रामीणों को मिलेगा। 

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बिजली है सबसे बड़ी समस्या

जल निगम द्वारा करोड़ों रुपये लगाकर बनाई जाने वाली परियोजनाओं के लिए पर्याप्त बिजली की जरूरत होती है। मोटरों के संचालन के लिए सुचारु बिजली आवश्यक है। वर्तमान में ग्रामीण इलाकों में 15 घंटे बिजली देने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत में 10 से 12 घंटे बमुश्किल बिजली मिल पाती है। लगातार तारों के टूटने व फाल्ट के होने से कई घंटे बिजली बंद रहती है। इसकी शिकायत भी ग्रामीण करते हैं, लेकिन समय से मेंटेनेंस नहीं होने के कारण गांव के उपभोक्ताओं के साथ- साथ इसका असर पेयजल परियोजनाओं पर भी पड़ता है।

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