फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   कैवेखों अन्नदाता हैं भैया, किसानन की कउ सुनाई नइया

कैवेखों अन्नदाता हैं भैया, किसानन की कउ सुनाई नइया

Fri, 19 Apr 2019 02:07 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 19 Apr 2019 02:07 AM IST
विज्ञापन
कैवेखों अन्नदाता हैं भैया, किसानन की कउ सुनाई नइया
कैवेखों अन्नदाता हैं भैया, किसानन की नइयां कऊं सुनाई
विज्ञापन

ललितपुर। लोकसभा चुनाव के महासंग्राम में उतरे उम्मीदवार शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा मेहनत कर रहे हैं। वहीं, ग्रामीण क्षेत्र के लोग पान की दुकान के पास बैठकर सियासी चर्चा कर रहे हैं। ऐसा ही नजारा घंटाघर स्थित पान की दुकान का रहा।
ग्राम पड़ोरिया निवासी कड़ोरेलाल कहते हैं कि किसानन को तौ मरवो है। एक तो सरकारन से कोनऊ खास सुविधा नहीं मिल पा रइ, जीसें फसल की लागतई निकर आवे। ई मैंगाई के समय में खेती घाटे कौ सौदा हो गई। कतते कि किसान की आय दुगनी होवे बारी है, लेकिन कायखों किसान पैले जिते खड़ो तो उतईं आज भी ठाड़ों हैं। कैवे खों किसान धरती पुत्र, अन्नदाता हैं।
विज्ञापन

ग्राम पड़ोरिया निवासी दशरथ सिंह कहते हैं कि ऐसो कई बार हो गओ कि जब फसल अच्छी हुइये, तबईं इंद्र देवता नाराज हो जात। कल तो ऐसो भओ कै जैसे किसानन के सीना पर दार दरी होए। जैसई भुंसारो भओ, वैसइ आसमान से बरफ के पथरा गिरन लगे। देखत-देखत तो धरती सफेद हो गई। जो कछु कसर बची थी सो खेतन में पानी भरवें से पूरी हो गई। भगवान जानत हुइये कि किसानन ने कैसे फसल तैयार करी थी। रात दिन एक करकें फसल घर में पौंचवे की बारी आ गई थी, लेकिन भगवान खों मंजूर नहीं हुइये सो जो हो गओ। ग्राम करगन निवासी कृष्णपाल यादव कहते हैं कि अबे चुनाव चल रहे, जीसें कोनऊ नेता खेतन में ढूंकबे नहीं गओ कि फसल बची, कै नइं। प्रशासन खों भी कां फुर्सत हैं। अधिकारियन ने किसानों के गुस्सा पर पानी डारकें घरे भगा दओ। जिनकी फसलें बर्बाद हो गईं, उनके दिल सें पूछो कि उनके ह्दय पे का गुजर रई हुइये। मोहल्ला आजादपुरा निवासी कैलाश कहते हैं कि जिनकी फसलें कटी डरीती और उनकी थ्रेसर होनी हती, सबसे जादा उने पश्चापो हो रओ। वे कत फिर रये, कै एक दिन और मिल जातो तो हम थ्रेसर कराके फसल घरे रख लेते। सरकार ने बीमा देवे की योजनाएं तो बनाईं, लेकिन कंपनियन बारे इतने आसानी से किसानन खों क्लेम नईं देत। सौ चक्कर कटवा लें, तब जाके आधा अधूरो क्लेम मिलपे। भैया, पिछले खरीफ को कई गांवन के किसानन को बीमा नईं मिल पाऔ, वे आज तक चक्कर लगा रये।
विज्ञापन
विज्ञापन

ग्राम बरौदी निवासी मेहरबान कहते हैं कि सरकारें किसानन के लाजें योजनाएं तो भौत बनाउत, लेकिन ऊको लाभ कां मिल पाउत। बेइ किसान ऊको लाभ उठा पात जो दलाल से सेंटिंग कर लेत। जीने सीधे लाभ पावे की कोशिश करी, उनकी चप्पलें घिस जातीं। कई तो थक कैं घरै बैठ जात। सरकारन को ऐसी कोनऊ योजना बनाने आए, जीसें किसानन खों घर बैठे लाभ मिल जाए। इसी दौरान कई और किसान आ जाते हैं, जिससे चर्चा का क्रम टूट जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed