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एक महीने में 27 ने लगाई फांसी
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ललितपुर। शहर समेत विभिन्न थानों के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में एक महीने में 27 लोगों ने फांसी के फंदे को गले लगा कर अपनी जान दे दी। फांसी लगाकर आत्महत्या करने वालों में सभी वर्ग की महिलाएं, छात्र, पुरुष, बालिकाएं एवं बुजुर्ग शामिल हैं। मनोविश्लेशक इस पर चिंता जाहिर कर चुके हैं और लोगों से मानसिक रूप से परेशान परिजनों पर विशेष ध्यान देने की बात कही है।
जनपद में आत्महत्या करने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। कोई फांसी लगाकर तो कोई जहरीला पदार्थ खाकर और कुछ ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जिंदगी खत्म कर रहे हैं। पिछले माह में जिले में अकेले फांसी लगाकर ही आत्महत्या करने वालों की संख्या 27 हो गई है। बीते चार दिनों में आठ लोगों ने अलग-अलग जगह पर फांसी लगाकर आत्महत्या की है। इनमें तीन वृद्धों ने फांसी के फंदे पर झूल कर आत्महत्या की है। जबकि, चार महिलाओं ने फांसी को गले लगाया है और 26 वर्षीय युवक ने भी आत्महत्या की है।
यदि आत्महत्या करने वालों की उम्र के अनुसार आकलन किया जाए तो बीते एक माह में 20 वर्ष से कम उम्र के तीन लोगों ने फांसी लगाई। जबकि, 20 से 30 वर्ष की उम्र के 12 महिला और पुरुषों ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। इसी प्रकार 30 से 40 वर्ष की उम्र के आठ लोगों ने फांसी लगाई। 60 वर्ष से अधिक उम्र के चार बुजुर्गों ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। फांसी लगाने वालों में से अधिकांश ने अपने घरों में साड़ियां या रस्सी के सहारे आत्महत्या की है, जिनमें मामूली कहासुनी को लेकर भी आत्महत्याओं के मामले सामने आए हैं। बहुत से मामलों में पुरुषों ने पेड़ों पर रस्सी के सहारे या तौलिया से फांसी लगाई है।
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घरों में, खासतौर पर नवयुवकों में छोटी- छोटी सी बातों को लेकर मानसिक तनाव देखने को मिल रहा है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। वह छोटी सी बात को भी सहन नहीं कर पाते। ऐसे में परिवारवालों को बातों का बुरा मानने वालों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। - संजीव कुमार शर्मा, मनोविश्लेषक
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जनपद में आत्महत्या करने का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। कोई फांसी लगाकर तो कोई जहरीला पदार्थ खाकर और कुछ ट्रेन के आगे कूदकर अपनी जिंदगी खत्म कर रहे हैं। पिछले माह में जिले में अकेले फांसी लगाकर ही आत्महत्या करने वालों की संख्या 27 हो गई है। बीते चार दिनों में आठ लोगों ने अलग-अलग जगह पर फांसी लगाकर आत्महत्या की है। इनमें तीन वृद्धों ने फांसी के फंदे पर झूल कर आत्महत्या की है। जबकि, चार महिलाओं ने फांसी को गले लगाया है और 26 वर्षीय युवक ने भी आत्महत्या की है।
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यदि आत्महत्या करने वालों की उम्र के अनुसार आकलन किया जाए तो बीते एक माह में 20 वर्ष से कम उम्र के तीन लोगों ने फांसी लगाई। जबकि, 20 से 30 वर्ष की उम्र के 12 महिला और पुरुषों ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। इसी प्रकार 30 से 40 वर्ष की उम्र के आठ लोगों ने फांसी लगाई। 60 वर्ष से अधिक उम्र के चार बुजुर्गों ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। फांसी लगाने वालों में से अधिकांश ने अपने घरों में साड़ियां या रस्सी के सहारे आत्महत्या की है, जिनमें मामूली कहासुनी को लेकर भी आत्महत्याओं के मामले सामने आए हैं। बहुत से मामलों में पुरुषों ने पेड़ों पर रस्सी के सहारे या तौलिया से फांसी लगाई है।
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घरों में, खासतौर पर नवयुवकों में छोटी- छोटी सी बातों को लेकर मानसिक तनाव देखने को मिल रहा है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। वह छोटी सी बात को भी सहन नहीं कर पाते। ऐसे में परिवारवालों को बातों का बुरा मानने वालों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। - संजीव कुमार शर्मा, मनोविश्लेषक