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घरेलू नल कनेक्शनों का व्यवसायिक उपयोग कर बर्बाद किया जा रहा स्वच्छ पेयजल
Updated Tue, 29 May 2018 02:04 AM IST
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घरेलू नल कनेक्शनों का व्यावसायिक उपयोग
ललितपुर। इन भीषण गर्मी के दिनों में शहर के आधे से अधिक घरों के नलों में जल संस्थान का स्वच्छ पेयजल नहीं पहुंच रहा है। वहीं, दूसरी ओर शहर में घरेलू नल संयोजन का व्यवसायिक उपयोग करके विभाग को राजस्व का चूना लगाया जा रहा है, साथ ही पेयजल को बर्बाद भी किया जा रहा है।
जल संस्थान विभाग के पुराने आंकड़ों के अनुसार पूरे शहर में नलों के 10 हजार से अधिक घरेलू कनेक्शन हैं। पिछले एक वर्ष से अमृत योजना तहत किए जा रहे घरेलू नल कनेक्शनों से करीब शहर में 2,200 घरेलू नल कनेक्शनों की बढ़ोतरी हो गई है। इसके साथ ही विभाग का एक आंकड़ा ऐसा भी है, जो काफी चौंकाने वाला है, पूरे शहर में नलों के व्यवसायिक कनेक्शनों की संख्या 60 से भी कम है। यदि शहर की जमीनी हकीकत की बात करें तो शहर के मुख्य मार्ग के दोनों ओर बने भवनों में से 80 प्रतिशत भवनों का उपयोग व्यवसायिक रूप में किया जा रहा है। इसके साथ ही शहर में छोटे-बड़े वाहन धुलने की करीब दो दर्जन से अधिक दुकानें है, पूरे शहर में करीब आधा सैकड़ा रेस्टोरेंट हैं और आधा सैकड़ा के तकरीबन ही विवाह-घर व होटल संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा भी अन्य शोरूम, मॉल, निजी मॉर्केट, कॉम्लेक्सों, सिनेमा घरों, निजी क्लीनिकों, दुकानों व गोदामों में नलों के अवैध तरीके से व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही इन जगहों पर भारी मात्रा में पानी का उपयोग व बर्बादी भी की जाती है। पानी की इस बर्बादी के साथ-साथ विभाग को हर वर्ष लाखों रुपये राजस्व का चूना भी लग रहा है। घरेलू नल कनेक्शन का जल संस्थान विभाग 1,200 रुपये वार्षिक शुल्क वसूलता है, जबकि व्यवसायिक नल कनेक्शन का वार्षिक शुल्क घरेलू कनेक्शन का लगभग तीन गुना यानी 3,300 रुपये है। वर्तमान में विभाग केवल 60 नल कनेक्शनों से व्यवसायिक शुल्क वसूलता है, जबकि इससे कई गुना घरेलू नल कनेक्शनों का उपयोग व्यवसायिक रूप में किया जा रहा है। इससे विभाग को विगत कई वर्षों से लाखों रुपये वार्षिक राजस्व का चूना लगता आ रहा है।
बाजार में हैं सबसे ज्यादा अवैध कनेक्शन
शहर के मुख्य बाजार क्षेत्र में व मुख्य मार्ग पर खुली दुकानों में अधिकांश नलों के कनेक्शन अवैध है। इसके साथ ही यह अवैध कनेक्शन ज्यादातर जल संस्थान की मुख्य पाइप लाइन में है। मवेशी बाजार से गोविंद नगर व चौकाबाग में जलापूर्ति के लिए जो मेन लाइन है, उसमें अधिकांश दुुकानदारों ने अवैध तरीके से नलों के कनेक्शन करा दिए हैं। मैन लाइन में कनेक्शन होने से इन अवैध कनेक्शनों केे नलों में कई घंटो तक पानी पहुंचता है।
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कहीं नहीं है मीटर
घरेलू व व्यवसायिक शहर के किसी भी नलों में मीटर नहीं लगा हुआ है। इसलिए पानी के खर्च करने पर कोई पाबंदी नहीं है। विभाग ने सभी नल संयोजकों का वार्षिक शुल्क निर्धारित करके रखा हुआ है। पानी की बचत करने वाले को और पानी की हद से ज्यादा बर्बादी करने वाले सभी को एकसाथ भुगतान देना होता है। घरेलू कनेक्शन का 1,200 रुपये वार्षिक शुल्क और व्यवसायिक नल कनेक्शन का 3,300 रुपये वार्षिक शुल्क निर्धारित है।
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ललितपुर। इन भीषण गर्मी के दिनों में शहर के आधे से अधिक घरों के नलों में जल संस्थान का स्वच्छ पेयजल नहीं पहुंच रहा है। वहीं, दूसरी ओर शहर में घरेलू नल संयोजन का व्यवसायिक उपयोग करके विभाग को राजस्व का चूना लगाया जा रहा है, साथ ही पेयजल को बर्बाद भी किया जा रहा है।
जल संस्थान विभाग के पुराने आंकड़ों के अनुसार पूरे शहर में नलों के 10 हजार से अधिक घरेलू कनेक्शन हैं। पिछले एक वर्ष से अमृत योजना तहत किए जा रहे घरेलू नल कनेक्शनों से करीब शहर में 2,200 घरेलू नल कनेक्शनों की बढ़ोतरी हो गई है। इसके साथ ही विभाग का एक आंकड़ा ऐसा भी है, जो काफी चौंकाने वाला है, पूरे शहर में नलों के व्यवसायिक कनेक्शनों की संख्या 60 से भी कम है। यदि शहर की जमीनी हकीकत की बात करें तो शहर के मुख्य मार्ग के दोनों ओर बने भवनों में से 80 प्रतिशत भवनों का उपयोग व्यवसायिक रूप में किया जा रहा है। इसके साथ ही शहर में छोटे-बड़े वाहन धुलने की करीब दो दर्जन से अधिक दुकानें है, पूरे शहर में करीब आधा सैकड़ा रेस्टोरेंट हैं और आधा सैकड़ा के तकरीबन ही विवाह-घर व होटल संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा भी अन्य शोरूम, मॉल, निजी मॉर्केट, कॉम्लेक्सों, सिनेमा घरों, निजी क्लीनिकों, दुकानों व गोदामों में नलों के अवैध तरीके से व्यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही इन जगहों पर भारी मात्रा में पानी का उपयोग व बर्बादी भी की जाती है। पानी की इस बर्बादी के साथ-साथ विभाग को हर वर्ष लाखों रुपये राजस्व का चूना भी लग रहा है। घरेलू नल कनेक्शन का जल संस्थान विभाग 1,200 रुपये वार्षिक शुल्क वसूलता है, जबकि व्यवसायिक नल कनेक्शन का वार्षिक शुल्क घरेलू कनेक्शन का लगभग तीन गुना यानी 3,300 रुपये है। वर्तमान में विभाग केवल 60 नल कनेक्शनों से व्यवसायिक शुल्क वसूलता है, जबकि इससे कई गुना घरेलू नल कनेक्शनों का उपयोग व्यवसायिक रूप में किया जा रहा है। इससे विभाग को विगत कई वर्षों से लाखों रुपये वार्षिक राजस्व का चूना लगता आ रहा है।
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बाजार में हैं सबसे ज्यादा अवैध कनेक्शन
शहर के मुख्य बाजार क्षेत्र में व मुख्य मार्ग पर खुली दुकानों में अधिकांश नलों के कनेक्शन अवैध है। इसके साथ ही यह अवैध कनेक्शन ज्यादातर जल संस्थान की मुख्य पाइप लाइन में है। मवेशी बाजार से गोविंद नगर व चौकाबाग में जलापूर्ति के लिए जो मेन लाइन है, उसमें अधिकांश दुुकानदारों ने अवैध तरीके से नलों के कनेक्शन करा दिए हैं। मैन लाइन में कनेक्शन होने से इन अवैध कनेक्शनों केे नलों में कई घंटो तक पानी पहुंचता है।
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कहीं नहीं है मीटर
घरेलू व व्यवसायिक शहर के किसी भी नलों में मीटर नहीं लगा हुआ है। इसलिए पानी के खर्च करने पर कोई पाबंदी नहीं है। विभाग ने सभी नल संयोजकों का वार्षिक शुल्क निर्धारित करके रखा हुआ है। पानी की बचत करने वाले को और पानी की हद से ज्यादा बर्बादी करने वाले सभी को एकसाथ भुगतान देना होता है। घरेलू कनेक्शन का 1,200 रुपये वार्षिक शुल्क और व्यवसायिक नल कनेक्शन का 3,300 रुपये वार्षिक शुल्क निर्धारित है।