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पाइप पेयजल परियोजना की भ्रामक सूचना में घिरे अफसर
Updated Sat, 17 Mar 2018 01:47 AM IST
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पेयजल परियोजना की भ्रामक रिपोर्ट पर घिरे अफसर
ललितपुर। गर्मी के दस्तक देते ही जिले में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं, जबकि विभागीय अफसर समस्या को सुलझाने की जगह भ्रामक रिपोर्ट बनाकर खानापूर्ति करते नजर आ रहे हैं। इसका खुलासा तब हुआ, जब सीडीओ ने खंड विकास अधिकारियों से जिले में चल रही 29 पाइप पेयजल परियोजनाओं का पृथक से सत्यापन कराया। इस पूरे मामले में डीपीआरओ (जिला पंचायतराज अधिकारी) और परियोजना प्रबंधक ने सभी योजनाओं को चालू बताया था, जबकि खंड विकास अधिकारी की रिपोर्ट में तीन योजनाएं बंद पाई गईं। सीडीओ ने दोनों अधिकारियों से जवाब-तलब किया है।
इस साल मानसून सीजन में औसत से कम बारिश हुई है। इससे सूखे जैसे हालात नजर आने लगे हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि भूगर्भ जल स्तर तेजी से नीचे की ओर खिसक रहा है। ऐसे में प्राचीन जल स्रोतों में पानी कम दिखाई देने लगा है तो हैंडपंप भी साथ छोड़ने लगे हैं। इसे देख प्रशासन के अधिकारी हरकत में आ गए हैं। जिले में 29 पाइप पेयजल परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। पिछले दिनों सीडीओ प्रवीण कुमार लक्षकार ने इसकी वास्तविक जानकारी जुटाने के लिए जल निगम के परियोजना प्रबंधक एवं जिला पंचायत राज अधिकारी से आख्या तलब की। दोनों अधिकारियों ने स्थलीय जानकारी न जुटाकर भ्रामक रूप से पाइप पेयजल परियोजना की रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। रिपोर्ट में ज्यादातर परियोजनाएं चालू एवं कुछ आंशिक रूप से चालू बताई गई थी।
इससे सीडीओ सहमत नहीं हुए और उन्होंने खंड विकास अधिकारियों से इसका स्थलीय सत्यापन कराया। जब बीडीओ की सत्यापन रिपोर्ट आई तो वह परियोजना प्रबंधक व डीपीआरओ की आख्या से मेल नहीं खाई। इस रिपोर्ट में तीन परियोजनाएं बंद पाई गई थीं। इस पर उन्होंने दोनों अधिकारियों से जवाब तलब किया। उन्होंने अफसरों को लिखे पत्र में कहा कि बीस मार्च तक स्पष्ट करें कि संभावित सूखा को दृष्टिगत भावी पेयजल संकट से निपटने के लिए भ्रामक सूचना क्यों दी है? उन्होंने बीडीओ द्वारा किए गए सत्यापन का मौके पर परीक्षण कर तत्काल अपेक्षित कार्रवाई के निर्देश देते हुए कहा है कि दोबारा वास्तविक स्थिति से अवगत कराएं। इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं होगी। इस पत्र के जारी होते ही जल निगम एवं डीपीआरओ कार्यालय में खलबली मची गई है।
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खंड विकास अधिकारियों की रिपोर्ट
खंड विकास अधिकारियों द्वारा दी गई सत्यापन रिपोर्ट में 18 पेयजल योजनाओं की जानकारी इस प्रकार से है। पटसेमरा पेयजल योजना चालू है। सतवांस पेयजल योजना में पानी कम निकल रहा है। खितवांस पेयजल योजना की पाइप लाइन मरम्मत के कारण आंशिक तौर पर बंद है। टीला पेयजल योजना का नलकूप रिबोर योग्य है। रीछपुरा पेयजल योजना एक वर्ष से बंद है। रजौरा पेयजल योजना में पानी नहीं आ रहा है। पड़ौरिया योजना चालू है। बिरारी योजना बीस दिन से खराब है। आलापुर, खजरा, जमालपुर योजना चालू हैं। नयागांव, कारीटोरन, गिरार योजना आंशिक रूप से चालू हैं। मथुराडांग व लागौन योजना की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त है। मिर्चवारा योजना की मोटर जल गई है। पूराकलां पेयजल योजना में कम वोल्टेज की समस्या है।
जल निगम एवं डीपीआरओ की रिपोर्ट
जल निगम एवं डीपीआरओ के अफसरों ने अधिकतर परियोजना को पूर्ण क्षमता एवं आंशिक रूप से चालू दर्शाया था। इस वजह से उनकी रिपोर्ट को भ्रामक माना गया है।
परियोजना प्रबंधक एवं डीपीआरओ से किया जवाब तलब
जल निगम के परियोजना प्रबंधक एवं डीपीआरओ से मासिक रिपोर्ट मांगी गई थी। इसमें उन्होंने पाइप पेयजल परियोजनाओं को चालू दर्शाया था, लेकिन जब इसका बीडीओ से वेरीफिकेशन कराया तो तीन परियोजनाएं बंद पाई गई। इस संबंध में उनसे जवाब तलब किया गया है।
प्रवीण कुमार लक्षकार, मुख्य विकास अधिकारी
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ललितपुर। गर्मी के दस्तक देते ही जिले में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं, जबकि विभागीय अफसर समस्या को सुलझाने की जगह भ्रामक रिपोर्ट बनाकर खानापूर्ति करते नजर आ रहे हैं। इसका खुलासा तब हुआ, जब सीडीओ ने खंड विकास अधिकारियों से जिले में चल रही 29 पाइप पेयजल परियोजनाओं का पृथक से सत्यापन कराया। इस पूरे मामले में डीपीआरओ (जिला पंचायतराज अधिकारी) और परियोजना प्रबंधक ने सभी योजनाओं को चालू बताया था, जबकि खंड विकास अधिकारी की रिपोर्ट में तीन योजनाएं बंद पाई गईं। सीडीओ ने दोनों अधिकारियों से जवाब-तलब किया है।
इस साल मानसून सीजन में औसत से कम बारिश हुई है। इससे सूखे जैसे हालात नजर आने लगे हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि भूगर्भ जल स्तर तेजी से नीचे की ओर खिसक रहा है। ऐसे में प्राचीन जल स्रोतों में पानी कम दिखाई देने लगा है तो हैंडपंप भी साथ छोड़ने लगे हैं। इसे देख प्रशासन के अधिकारी हरकत में आ गए हैं। जिले में 29 पाइप पेयजल परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। पिछले दिनों सीडीओ प्रवीण कुमार लक्षकार ने इसकी वास्तविक जानकारी जुटाने के लिए जल निगम के परियोजना प्रबंधक एवं जिला पंचायत राज अधिकारी से आख्या तलब की। दोनों अधिकारियों ने स्थलीय जानकारी न जुटाकर भ्रामक रूप से पाइप पेयजल परियोजना की रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। रिपोर्ट में ज्यादातर परियोजनाएं चालू एवं कुछ आंशिक रूप से चालू बताई गई थी।
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इससे सीडीओ सहमत नहीं हुए और उन्होंने खंड विकास अधिकारियों से इसका स्थलीय सत्यापन कराया। जब बीडीओ की सत्यापन रिपोर्ट आई तो वह परियोजना प्रबंधक व डीपीआरओ की आख्या से मेल नहीं खाई। इस रिपोर्ट में तीन परियोजनाएं बंद पाई गई थीं। इस पर उन्होंने दोनों अधिकारियों से जवाब तलब किया। उन्होंने अफसरों को लिखे पत्र में कहा कि बीस मार्च तक स्पष्ट करें कि संभावित सूखा को दृष्टिगत भावी पेयजल संकट से निपटने के लिए भ्रामक सूचना क्यों दी है? उन्होंने बीडीओ द्वारा किए गए सत्यापन का मौके पर परीक्षण कर तत्काल अपेक्षित कार्रवाई के निर्देश देते हुए कहा है कि दोबारा वास्तविक स्थिति से अवगत कराएं। इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं होगी। इस पत्र के जारी होते ही जल निगम एवं डीपीआरओ कार्यालय में खलबली मची गई है।
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खंड विकास अधिकारियों की रिपोर्ट
खंड विकास अधिकारियों द्वारा दी गई सत्यापन रिपोर्ट में 18 पेयजल योजनाओं की जानकारी इस प्रकार से है। पटसेमरा पेयजल योजना चालू है। सतवांस पेयजल योजना में पानी कम निकल रहा है। खितवांस पेयजल योजना की पाइप लाइन मरम्मत के कारण आंशिक तौर पर बंद है। टीला पेयजल योजना का नलकूप रिबोर योग्य है। रीछपुरा पेयजल योजना एक वर्ष से बंद है। रजौरा पेयजल योजना में पानी नहीं आ रहा है। पड़ौरिया योजना चालू है। बिरारी योजना बीस दिन से खराब है। आलापुर, खजरा, जमालपुर योजना चालू हैं। नयागांव, कारीटोरन, गिरार योजना आंशिक रूप से चालू हैं। मथुराडांग व लागौन योजना की पाइप लाइन क्षतिग्रस्त है। मिर्चवारा योजना की मोटर जल गई है। पूराकलां पेयजल योजना में कम वोल्टेज की समस्या है।
जल निगम एवं डीपीआरओ की रिपोर्ट
जल निगम एवं डीपीआरओ के अफसरों ने अधिकतर परियोजना को पूर्ण क्षमता एवं आंशिक रूप से चालू दर्शाया था। इस वजह से उनकी रिपोर्ट को भ्रामक माना गया है।
परियोजना प्रबंधक एवं डीपीआरओ से किया जवाब तलब
जल निगम के परियोजना प्रबंधक एवं डीपीआरओ से मासिक रिपोर्ट मांगी गई थी। इसमें उन्होंने पाइप पेयजल परियोजनाओं को चालू दर्शाया था, लेकिन जब इसका बीडीओ से वेरीफिकेशन कराया तो तीन परियोजनाएं बंद पाई गई। इस संबंध में उनसे जवाब तलब किया गया है।
प्रवीण कुमार लक्षकार, मुख्य विकास अधिकारी