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योग को आज के युग की मौलिक आवश्यकता
ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 16 Mar 2016 12:13 AM IST
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याोग
- फोटो : अमर उजाला
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विनोदिनी प्रेरणा योग केंद्र ने लगाया ध्यान साधना शिविर
भारतीय योग संस्थान के विनोदिनी प्रेरणा योग केंद्र के बारहवें स्थापना दिवस के केंद्र ने ध्यान साधना शिविर का आयोजन किया। इसमें जेसीआई, इनरव्हील सेंट्रल, नवदिशा, स्त्री सेवा सत्संग दल, इनरव्हील मेन्स, सत्संग समिति, सौजन्या, महिला क्लब समेत शहर की विभिन्न संस्थाओं की महिलाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में ‘आप अनूठी शक्ति के पुंज हो’ शीर्षक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन और योगेश्वर श्री कृष्ण के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम संयोजिका शालू गुप्ता ने बताया कि आज की मल्टीटास्किंग दौर में हम कंप्यूटर से भी अधिक तेजी से अपने शारीरिक अंगों का उपयोग करना चाहते हैं। यह चाहत गलत नहीं है, लेकिन इस अपेक्षित क्षमता विस्तार के लिए शरीर को समय और साधन भी दें। यदि हम प्रतिदिन कुछ क्षण ध्यान करें-आत्म दर्शन और आत्म निरीक्षण की सुंदर पुरातन वैज्ञानिक विधि को अपनाएं तो स्वत: ही हमारा व्यक्तिगत विकास और सुधार शुरू हो जाएगा। हम आत्मसंयम, आत्म संतुलन और व्यवहार कौशल्य के नए आयाम छुएंगे। चित्त् की शुद्ध चेतना को जगाकर हम इस दुर्लभ मानव जीवन का सार्थक उपयोग कर सकेंगे।
कार्यक्रम का संचालन निष्कर्ष सेठ और अंशू मित्तल ने किया। दीपा, सोनी, पूजा, प्रीती, बीना, शैरी राखी, सोनी गुप्ता ने सुंदर और लयबद्ध तरीके से अपनी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव ने योग को आज के युग की मौलिक आवश्यकता बताई। विशिष्ट अतिथि डॉ. उमा कटियार ने योग की बारीकियों और योग से होने वाले लाभ के बारे में बताया। अंजू गुप्ता ने कार्यक्रम के शीर्षक को चरितार्थ करने पर जोर दिया।
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भारतीय योग संस्थान के विनोदिनी प्रेरणा योग केंद्र के बारहवें स्थापना दिवस के केंद्र ने ध्यान साधना शिविर का आयोजन किया। इसमें जेसीआई, इनरव्हील सेंट्रल, नवदिशा, स्त्री सेवा सत्संग दल, इनरव्हील मेन्स, सत्संग समिति, सौजन्या, महिला क्लब समेत शहर की विभिन्न संस्थाओं की महिलाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में ‘आप अनूठी शक्ति के पुंज हो’ शीर्षक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन और योगेश्वर श्री कृष्ण के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। कार्यक्रम संयोजिका शालू गुप्ता ने बताया कि आज की मल्टीटास्किंग दौर में हम कंप्यूटर से भी अधिक तेजी से अपने शारीरिक अंगों का उपयोग करना चाहते हैं। यह चाहत गलत नहीं है, लेकिन इस अपेक्षित क्षमता विस्तार के लिए शरीर को समय और साधन भी दें। यदि हम प्रतिदिन कुछ क्षण ध्यान करें-आत्म दर्शन और आत्म निरीक्षण की सुंदर पुरातन वैज्ञानिक विधि को अपनाएं तो स्वत: ही हमारा व्यक्तिगत विकास और सुधार शुरू हो जाएगा। हम आत्मसंयम, आत्म संतुलन और व्यवहार कौशल्य के नए आयाम छुएंगे। चित्त् की शुद्ध चेतना को जगाकर हम इस दुर्लभ मानव जीवन का सार्थक उपयोग कर सकेंगे।
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कार्यक्रम का संचालन निष्कर्ष सेठ और अंशू मित्तल ने किया। दीपा, सोनी, पूजा, प्रीती, बीना, शैरी राखी, सोनी गुप्ता ने सुंदर और लयबद्ध तरीके से अपनी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. इरा श्रीवास्तव ने योग को आज के युग की मौलिक आवश्यकता बताई। विशिष्ट अतिथि डॉ. उमा कटियार ने योग की बारीकियों और योग से होने वाले लाभ के बारे में बताया। अंजू गुप्ता ने कार्यक्रम के शीर्षक को चरितार्थ करने पर जोर दिया।
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