फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   wild life

150 किलोमीटर का सफर तय कर बरेली पहुंची किशनपुर सेंक्चुरी की बाघिन

Sun, 12 Apr 2020 11:35 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 12 Apr 2020 11:35 PM IST
विज्ञापन
wild life
बांकेगंज। लॉकडाउन के दौरान जहां इंसानों की गतिविधियां और आवाजाही ठप है, वहीं जंगली जानवरों की चहलकदमी बढ़ गई है। दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी की एक बाघिन करीब 150 किलोमीटर की दूरी तय कर बरेली पहुंच गई और वहां कई सालों से सुनसान पड़ी रबर फैक्टरी में डेरा जमा दिया। अब इस बाघिन को फिर से वापस जंगल लाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। दुधवा टाइगर रिजर्व की एक रेस्क्यू टीम भी बरेली में कैंप कर रही है।
विज्ञापन

दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी में साल 2018 में रिपोर्ट की गई बाघिन लॉकडाउन के दौरान पीलीभीत टाइगर रिजर्व होते हुए बरेली पहुंच गई और इन दिनों सुनसान पड़ी रबर फैक्टरी में डेरा जमा लिया है। तीन दिन पहले जब इसका पता लगा तो वन विभाग के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में वन विभाग ने किसी तरह बाघिन को फैक्टरी में ही कैद कर दिया और इसकी सूचना प्रदेश के आला अधिकारियों को दी।
विज्ञापन

बरेली रबर फैक्टरी में बाघिन के आने की सूचना मिलते ही उसे रेस्क्यू करके वापस दुधवा के जंगल में छोड़ने की कवायद शुरू हो गई। पहले तो दुधवा टाइगर रिजर्व में वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट आफ इंडिया (डब्लूटीआई) के डॉ. दया के नेतृत्व में तीन सदस्सीय टीम में शामिल चांदू और भागूराम की टीम बाघिन को ट्रैंक्युलाइज कर दुधवा वापस लाने की कोशिश कर रही है। इस दौरान भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के डेटा से मिलान करने पर पता चला कि यह बाघिन किशनपुर सेंक्चुरी की है। जिसे 2018 में कैमरा ट्रैप के दौरान देखा गया था। डीटीआर के फील्ड डाइरेक्टर संजय पाठक ने भी शनिवार बरेली रबर फैक्ट्री पहुंचकर चलाए जा रहे रेस्क्यू अभियान का जायजा लिया और टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

बताते हैं कि बरेली रबर फैक्टरी के अंदर घना जंगल है, जिसमें बड़ी संख्या में नीलगाय भी हैं। ऐसी दशा में बाघिन को वहां भोजन की कमी नहीं हैं। फिर भी इसे रेस्क्यू कर वापस दुधवा लाने का प्रयास किया जा रहा है। बरेली वन विभाग की टीम के एसडीओ वीके सिंह के नेतृत्व में बाघिन पर नजर रखी जा रही है।
नौ महीने पहले रबर फैक्टरी पहुंच गए थे दो जंगली हाथी
मालूम हो कि पिछले साल जुलाई माह में नेपाल के जंगल से निकले दो हाथी लग्गा-बग्गा के रास्ते पीलीभीत टाइगर रिजर्व होते हुए बरेली की रबर फैक्टरी पहुंच गए थे। वहां से इन हाथियों ने रामपुर जिले तक मूवमेंट किया था। इन हाथियों को जब तक रेस्क्यू किया जाता तब तक इन हाथियों ने पांच ग्रामीणों और एक वनकर्मी भी मार डाला था। बाद में दुधवा से गए पालतू हाथियों की मदद से उन्हें ट्रैंक्युलाइज कर रेस्क्यू किया गया था।

डीटीआर की किशनपुर सेंक्चुरी से चलकर बरेली की रबर फैक्ट्री तक पहुंची बाघिन को रेस्क्यू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कोशिश है कि बाघिन को बिना कोई क्षति पहुंचाए वापस उसके घर लाया जा सके। मैने स्वयं भी शनिवार को चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया है।
- संजय पाठक, फील्ड डाइरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed