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Lakhimpur Kheri News: जीवनभर बच्चों की जिंदगी सींची... बुढ़ापे में मां-बाप को कर दिया बेघर

Sun, 01 Oct 2023 02:41 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: बरेली ब्यूरो Updated Sun, 01 Oct 2023 02:41 PM IST
सार

लखीमपुर खीरी के सलेमपुर कोन स्थित वृद्धाश्रम में तमाम ऐसे वृद्ध हैं, जिनकी संतानें तो हैं लेकिन वह आज भी अकेले ही हैं। वृद्धाश्रम ही उनका परिवार बन गया। यहां पर एक दूसरे के साथ हंसी मजाक और ठिठोली करते हुए समय बीता रहे हैं। 

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Painful story of elders living in old age home in Lakhimpur kheri
रुक्मणी, कांती और बाबूराम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हर मां बाप का सपना होता है कि उनकी संतान बुढ़ापे में उनका सहारा बने, लेकिन तमाम वृद्धजन बुढ़ापे की जिंदगी वृद्धाश्रम में गुजारने को मजबूर हैं। वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों को अपने बच्चों की याद सताती रहती है, लेकिन उनके बच्चे एक बार देखने तक नहीं आते हैं।

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लखीमपुर खीरी के सलेमपुर कोन स्थित वृद्धाश्रम में तमाम ऐसे वृद्ध हैं, जिनकी संतानें तो हैं लेकिन वह आज भी अकेले ही हैं। वृद्धाश्रम ही उनका परिवार बन गया। यहां पर एक दूसरे के साथ हंसी मजाक और ठिठोली करते हुए समय बीता रहे हैं। 
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यहां पर ऐसे कई वृद्ध रह रहे हैं, जिनके पास अकूत संपत्ति थी। लेकिन उनके बच्चों के अपमानजनक व्यवहार और खुद से साथ हो रहे भेदभाव से परेशान होकर उन्होंने घर, संपत्ति और बच्चों को छोड़कर वृद्धाश्रम में रहने ज्यादा महफूज समझा। वृद्धों की आपबीती सुनकर किसी भी इंसान की आंखें भर आएंगी लेकिन उनकी संतानों को अपने माता पिता की कोई फ्रिक नहीं दिखाई दे रही है।

 

बेटे और बहू के व्यवहार से दुखी पिता ने छोड़ा घर

जिस पिता ने अपने बेटे को उंगली पकड़कर चलना सिखाया। उसे जब सहारे की जरूरत हुई तो बेटे ने उसे वृद्धाश्रम छोड़ दिया। ऐसी ही कहानी है मोहम्मदी के बाबूराम की। करीब दो साल से बाबूराम वृद्धाश्रम में रह रहे हैं। 

उन्होंने बताया कि पहली पत्नी के देहांत हो जाने के बाद उन्होंने दूसरी शादी कर ली। बेटे और बहू के गलत व्यवहार से परेशान होकर दोनों वृद्धाश्रम को ही अपना घर समझ, यहां के लोगों को परिवार मानकर बची हुई जिंदगी गुजार रहे हैं। बाबूराम के एक बेटा और एक बेटी है। बेटी के लाख कहने पर भी बाबूराम उसके घर नहीं गए। बेटों ने आज तक उनका हाल भी जानने का प्रयास नहीं किया।

सारी प्रॉपर्टी बच्चों को दी, बदले में मिली उपेक्षा

शहर के मोहल्ला शिव कॉलोनी निवासी गंगा सिंह के पास लाखों रुपये की खेती और मकान था। पत्नी के गुजर जाने के बाद गंगाराम ने सारी प्रॉपर्टी बेचकर चारों बेटों को रुपये दे दिए। गंगाराम का कहना था कि बुढ़ापे में यही बच्चे उनका सहारा बनेंगे, लेकिन उनका सपना अधूरा रह गया। 

उन्होंने कहा कि करीब पांच लाख रुपये उन्होंने बुढ़ापे के लिए बचाए थे, एक बेटे ने जालसाजी से वो पैसे भी निकाल लिए। दो महीनों से वह यहीं वृद्धाश्रम में रहकर जिंदगी गुजार रहे हैं। कहा कि बेटों के पास जाने पर घर में लड़ाई-झगड़ा और बेटों के व्यवहार में काफी बदलाव हो जाता है, इसलिए यहीं रहना ठीक है।

बेटे ने मकान बेचकर कर दिया बेघर

65 वर्षीय सुकांति वैसे तो मेला मैदान में खुद के मकान में रहती थी, लेकिन बेटा शराबी का आदी है। उसने मकान को तीन हिस्सों में बांटकर बेच दिया। अब जब रहने के लिए जगह नहीं बची तो किराए के कमरे में रह रहा है। उसके पास रहने के लिए जाने पर वह शराब के नशे में गाली गलौज करता रहता है। बहू भी किसी मामले में फंसाने की धमकी देती है। इन्हीं बातों से परेशान होकर वह करीब पांच सालों से वृद्धाश्रम में रहकर जीवन गुजार रही हैं।

नहीं रहे पति तो बच्चों ने वृद्धाश्रम छोड़ा

रुकमणि की उम्र अभी 65 साल है। तीन साल पहले पति का देहांत हो जाने के बाद से वह वृद्धाश्रम में आकर रह रही है। रुंधे गले और नम आंखों से बताती हैं कि ऐसी संतानें होने से क्या फायदा, जो अपने माता पिता की देखरेख न कर पाएं। ऐसा नहीं है कि उनके पास जगह की कमी हो, लेकिन संतानों के व्यवहार ने उन्हें वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर कर दिया है।
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