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Lakhimpur Kheri News: वन विभाग के रिकॉर्ड में नहीं, जिले में है काले हिरन का कुनबा
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उचौलिया क्षेत्र में खेतो में टहलता काला हिरन
लखीमपुर खीरी। खीरी जिले में शाकाहारी वन्यजीवों की सूची से काला हिरन गायब है। जबकि दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैगलगंज रेंज में करीब आठ साल पहले बड़ी संख्या में काले हिरन दिखाई दिए थे। करीब 70-80 काले हिरनों के दो झुंड यहां लगभग रोज ही ग्रामीणों को दिखते थे। बावजूद इसके इन काले हिरनों को कभी वन विभाग ने गणना में नहीं दर्शाया।
तत्कालीन डीएफओ नीरज कुमार ने दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैगलगंज रेंज में काले हिरनों के दो बड़े झुंड देखकर उसकी तस्वीर भी जारी की थी। उन्होंने बताया था कि हरदोई जिले की सीमा पर मैगलगंज के उचौलिया के आसपास यह हिरन दिख रहे हैं। यह भी बताया था कि आमतौर पर शुष्क स्थानों पर रहने वाले काले हिरनों का कुनबा खीरी जिले में भी बढ़ रहा है। उधर वर्ष 2016, 2019 और 2022 में हुई शाकाहारी वन्यजीवों की गणना में दक्षिण खीरी के किसी भी रेंज एक भी काले हिरन का उल्लेख नहीं किया गया। दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन में वर्ष 2022 की गणना में दो काले हिरन दर्शाए गए हैं।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के महेशपुर रेंज में बिहारीपुर के किसान और उचौलिया के कई किसान बताते हैं कि काले हिरनों का यह झुंड अक्सर उनके खेतों में आ जाता था।
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वन विभाग की नजर से ओझल काले हिरन
दो साल पहले मैगलगंज क्षेत्र में नेशनल हाईवे के किनारे घायल अवस्था में एक काला हिरन मिला था, जिसकी बाद में मौत हो गई थी। एक साल पहले खीरी कस्बे के पास खेतों में एक काला हिरन घायल अवस्था में मिला था। कई बार मैगलगंज रेंज में काले हिरन कुत्तों के शिकार बन चुके हैं। फिलहाल मैगलगंज क्षेत्र में हिरनों का झुंड है तो दक्षिण खीरी वन प्रभाग में ही लगुचा के निकट भी अक्सर काले हिरनों का झुंड दिखाई देता है। इसके बावजूद वन विभाग को काले हिरन नजर नहीं आ रहे है। इससे काले हिरनों के प्रति वन विभाग की उदासीनता साफ नजर आ रही है।
किसान ने पाला था काले हिरन का जोड़ा
काला हिरन (ब्लेक बक) शेड्यूल-एक का प्राणी है। यह जंगलों के बजाय मैदानों और शुष्क जलवायु में रहना पसंद करता है। ग्रामीणों ने बताया खीरी जिले की सीमा पर हरदोई जिले के एक किसान ने करीब दस साल पहले काले हिरनों का एक जोड़ा पाल रखा था। उससे करीब आधा दर्जन बच्चे हुए। जिन्हें किसान ने खुला छोड़ दिया। उनसे काले हिरनों की आबादी बढ़ना शुरू हुई। अनुकूल प्राकृतिक जलवायु, प्राकृतिक आवास, भोजन मिलने से इनका कुनबा बढ़ना हुआ, लेकिन निगरानी न होने से उनकी सुरक्षा खतरे में है।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैगलगंज, महेशपुर और शारदानगर के कुछ क्षेत्रों में काले हिरन की मौजूदगी की सूचनाएं मिली हैं। गणना के समय इनके न दिखने से शाकाहारी वन्यजीवों की गणना में इन्हें शामिल नहीं किया जा सका। इन्हें खोज कर काले हिरनों की निगरानी बढ़ाई जाएगी।
- संजय विस्वाल, डीएफओ दक्षिण खीरी वन प्रभाग
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तत्कालीन डीएफओ नीरज कुमार ने दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैगलगंज रेंज में काले हिरनों के दो बड़े झुंड देखकर उसकी तस्वीर भी जारी की थी। उन्होंने बताया था कि हरदोई जिले की सीमा पर मैगलगंज के उचौलिया के आसपास यह हिरन दिख रहे हैं। यह भी बताया था कि आमतौर पर शुष्क स्थानों पर रहने वाले काले हिरनों का कुनबा खीरी जिले में भी बढ़ रहा है। उधर वर्ष 2016, 2019 और 2022 में हुई शाकाहारी वन्यजीवों की गणना में दक्षिण खीरी के किसी भी रेंज एक भी काले हिरन का उल्लेख नहीं किया गया। दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन में वर्ष 2022 की गणना में दो काले हिरन दर्शाए गए हैं।
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दक्षिण खीरी वन प्रभाग के महेशपुर रेंज में बिहारीपुर के किसान और उचौलिया के कई किसान बताते हैं कि काले हिरनों का यह झुंड अक्सर उनके खेतों में आ जाता था।
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वन विभाग की नजर से ओझल काले हिरन
दो साल पहले मैगलगंज क्षेत्र में नेशनल हाईवे के किनारे घायल अवस्था में एक काला हिरन मिला था, जिसकी बाद में मौत हो गई थी। एक साल पहले खीरी कस्बे के पास खेतों में एक काला हिरन घायल अवस्था में मिला था। कई बार मैगलगंज रेंज में काले हिरन कुत्तों के शिकार बन चुके हैं। फिलहाल मैगलगंज क्षेत्र में हिरनों का झुंड है तो दक्षिण खीरी वन प्रभाग में ही लगुचा के निकट भी अक्सर काले हिरनों का झुंड दिखाई देता है। इसके बावजूद वन विभाग को काले हिरन नजर नहीं आ रहे है। इससे काले हिरनों के प्रति वन विभाग की उदासीनता साफ नजर आ रही है।
किसान ने पाला था काले हिरन का जोड़ा
काला हिरन (ब्लेक बक) शेड्यूल-एक का प्राणी है। यह जंगलों के बजाय मैदानों और शुष्क जलवायु में रहना पसंद करता है। ग्रामीणों ने बताया खीरी जिले की सीमा पर हरदोई जिले के एक किसान ने करीब दस साल पहले काले हिरनों का एक जोड़ा पाल रखा था। उससे करीब आधा दर्जन बच्चे हुए। जिन्हें किसान ने खुला छोड़ दिया। उनसे काले हिरनों की आबादी बढ़ना शुरू हुई। अनुकूल प्राकृतिक जलवायु, प्राकृतिक आवास, भोजन मिलने से इनका कुनबा बढ़ना हुआ, लेकिन निगरानी न होने से उनकी सुरक्षा खतरे में है।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैगलगंज, महेशपुर और शारदानगर के कुछ क्षेत्रों में काले हिरन की मौजूदगी की सूचनाएं मिली हैं। गणना के समय इनके न दिखने से शाकाहारी वन्यजीवों की गणना में इन्हें शामिल नहीं किया जा सका। इन्हें खोज कर काले हिरनों की निगरानी बढ़ाई जाएगी।
- संजय विस्वाल, डीएफओ दक्षिण खीरी वन प्रभाग