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मां के स्वरूपों का किया गुणगान
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sat, 08 Oct 2016 12:01 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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शारदीय नावरात्र: छठे दिन हुई मां कात्यायनी की पूजा
शारदीय नवरात्र के छठे (सातवें) दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने मां कात्यायनी की आराधना की। पूरे दिन देवी मंदिर मां के जयकारों और घंटा घड़ियाल की ध्वनि से गूंजते रहे। शहर में स्थापित कई पूजा पंडालों में रात्रि जागरण का आयोजन किया गया। जहां कलाकारों के साथ श्रद्धालुओं ने मां का गुणगान किया। शहर के सबसे प्राचीन मां संकटादेवी मंदिर में दिनभर मेला लगा रहा।
जयदेव संगीत विद्यालय में पूजा पंडाल बनाकर मां कात्यायनी देवी की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई। बनारस से आए बंगाल के विद्वान पंडित बुद्धदेव भट्टाचार्य ने वैदिक मंत्रों के बीच मां कात्यायनी की प्रतिमा स्थपित की। यहां लोगों ने सार्वजनिक दुर्गा पूजा में हिस्सा लिया। कई स्थानों पर देवी जागरण आयोजित किए गए।
प्राचीन संकटादेवी मंदिर में सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। सुबह सात बजते-बजते मंदिर में दर्शनार्थियों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। लोगों ने मां को चूनर, शृंगार सामग्री, फल मिष्ठान और नारियल भेंट कर पूजा की। मंदिर में शुक्रवार को भी बच्चों के मुंडन, अन्नप्रासन आदि संस्कार कराने की धूम रही। मंदिर में धार्मिक उत्सव सा माहौल रहा।
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शहर के मां शीतला देवी मंदिर, वंकटादेवी मंदिर और भुंइयां माता मंदिर समेत सभी देवी मंदिरों में सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। नवरात्र का व्रत रखने वाले लोग अपने घरों पर दुर्गा सप्तशती का नियमित पाठ कर रहे हैं।
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शारदीय नवरात्र के छठे (सातवें) दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने मां कात्यायनी की आराधना की। पूरे दिन देवी मंदिर मां के जयकारों और घंटा घड़ियाल की ध्वनि से गूंजते रहे। शहर में स्थापित कई पूजा पंडालों में रात्रि जागरण का आयोजन किया गया। जहां कलाकारों के साथ श्रद्धालुओं ने मां का गुणगान किया। शहर के सबसे प्राचीन मां संकटादेवी मंदिर में दिनभर मेला लगा रहा।
जयदेव संगीत विद्यालय में पूजा पंडाल बनाकर मां कात्यायनी देवी की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई। बनारस से आए बंगाल के विद्वान पंडित बुद्धदेव भट्टाचार्य ने वैदिक मंत्रों के बीच मां कात्यायनी की प्रतिमा स्थपित की। यहां लोगों ने सार्वजनिक दुर्गा पूजा में हिस्सा लिया। कई स्थानों पर देवी जागरण आयोजित किए गए।
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प्राचीन संकटादेवी मंदिर में सुबह चार बजे से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। सुबह सात बजते-बजते मंदिर में दर्शनार्थियों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। लोगों ने मां को चूनर, शृंगार सामग्री, फल मिष्ठान और नारियल भेंट कर पूजा की। मंदिर में शुक्रवार को भी बच्चों के मुंडन, अन्नप्रासन आदि संस्कार कराने की धूम रही। मंदिर में धार्मिक उत्सव सा माहौल रहा।
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शहर के मां शीतला देवी मंदिर, वंकटादेवी मंदिर और भुंइयां माता मंदिर समेत सभी देवी मंदिरों में सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। नवरात्र का व्रत रखने वाले लोग अपने घरों पर दुर्गा सप्तशती का नियमित पाठ कर रहे हैं।