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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   The idol of mother Ashapurna, the Kuldevi of the princely state of Jangra, has been imprisoned in the Malkhana for 27 years.

27 साल से मालखाने में कैद है जांगड़ा रियासत की कुलदेवी मां आशापूर्णा की मूर्ति

Wed, 06 Apr 2022 12:00 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 06 Apr 2022 12:00 AM IST
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The idol of mother Ashapurna, the Kuldevi of the princely state of Jangra, has been imprisoned in the Malkhana for 27 years.
आशापूर्णा देवी की अष्टधातु मूर्ति चोरी होने के बाद स्थापित की गई पीतल की मूर्ति - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। धौरहरा तहसील क्षेत्र के कफारा के आशापूर्णा मंदिर में स्थापित चार सौ साल पुरानी मां आशापूर्णा देवी की मूर्ति पिछले 27 वर्षों से कोतवाली के मालखाने में बंद है। जांगड़ा रियासत का हिस्सा रहे कफारा में 26 साल बाद भी आस्था की देवी की मूर्ति मालखाने से मुक्त नहीं हो पाई है। श्रद्धालुओं ने तीन वर्ष पहले अष्टधातु की मूर्ति की जगह पीतल की दूसरी मूर्ति स्थापित कर पूजा अर्चना शुरू कर दी।
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लखीमपुर मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर धौरहरा तहसील का कफारा गांव ईसानगर स्टेट के जागड़ा राजवंश की रियासत का हिस्सा था। मौजूदा समय में आशापूर्णा देवी मंदिर की देखभाल करने वाले सुमित तिवारी का कहना है कि कफारा गांव में विराजमान महिषासुर मर्दिनी महाकाली स्वरूपा मां आशापूर्णा देवी इसी जांगड़ा राजवंश की कुल देवी थीं।
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करीब दो सौ साल पहले तत्कालीन जांगड़ा राजा ज्योति सिंह ने यहां लखौरी ईंटों से भव्य महल और मंदिर बनवाया था। इसी मंदिर में वर्ष 1707 में अष्टधातु से निर्मित मूर्ति स्थापित की थी। राजा ज्योति सिंह के रिश्तेदार राजा सुरेंद्र विक्रम सिंह अपनी महारानी अंबरि कुंवरि के साथ कफारा के इसी महल में रहते थे।
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1857 में राजा सुरेंद्र विक्रम सिंह को अंग्रेजी हुकूमत से बगावत करने आरोप में गिरफ्तार कर काला पानी की सजा दी गई। महारानी अंबरि कुंवरि अकेली रह गईं। कुछ समय बार सुरेंद्र विक्रम सिंह की कालापानी के दौरान ही मौत हो गई। जब रानी को यह सूचना मिली तो वह सदमा बर्दाश्त न कर सकीं और पति की मौत के तीसरे महीने उनकी भी मौत हो गई।
रानी की मां आशापूर्णा के प्रति गहरी आस्था थी। उनकी मौत के बाद देवी आशापूर्णा मंदिर को जनता ने रानी मंदिर का नाम दे दिया। सुमित बताते हैं कि अष्टधातु से निर्मित मां आशापूर्णा देवी की बहुमूल्य मूर्ति अक्तूबर 1995 में चोरी हो गई थी। चोरी के आरोपी पकड़े गए, जेल गए। उनसे बरामद मां की मूर्ति मालखाने में जमा कर दी गई। आरोपी तो जमानत पर छूट भी गए लेकिन मूर्ति अब तक मालखाने में ही है।
चोरी की घटना के वक्त अष्टधातु से बनी इस मूर्ति की कीमत पांच करोड़ रुपये थी। बुजुर्गों की मानें तो यह मूर्ति काली देवी कलकत्ता की मूर्ति के सांचे में ढली है। लखौरी ईंटों से बना ऐतिहासिक रानी महल अब खंडहर होने की कगार पर है। भले ही मां आशापूर्णा देवी की मूर्ति धौरहरा कोतवाली के मालखाने में माल मुकदमाती के रूप में कैद है, लेकिन मां अपने भक्तों की मन्नत पूरी करती हैं।

मंदिर में जो भी श्रद्धालु मनौती मांगता है, वह अवश्य पूरी होती है। धौरहरा कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक डीपी शुक्ला ने बताया कि अभी तक किसी ने मूर्ति रिलीज कराने के लिए अदालत में दावा ही नहीं किया है। यदि पक्षकार अदालत में दावा पेश करें तो मूर्ति रिलीज हो सकती है। संवाद
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