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अरहर की दाल में मिला सिंथेटिक कलर, दो दुकानों के नमूने फेल

Fri, 17 Dec 2021 12:55 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 17 Dec 2021 12:55 AM IST
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Synthetic color found in tur dal, samples of two shops failed
बाजार में सजी अनाज की दुकान। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
खराब दानों को रंगकर लोगों की सेहत से किया जा रहा था खिलवाड़
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दोनों दुकानदारों के खिलाफ दायर होगा मुकदमा, आयुक्त से अनुमति मांगी
लखीमपुर खीरी। सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाने वाली अरहर की दाल लोगों को नुकसान पहुंचा रही है, क्योंकि इसे पीला चमकदार बनाने के लिए सिंथेटिक कलर (अखाद्य रंग) मिलाया जा रहा है। इसका खुलासा बीते दिनों दो दुकानों से भरे सैंपल में हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन अब इन दोनों दुकानदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी में है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी राकेश कुमार ने 28 जुलाई 2021 को बेहजम रोड नीमगांव स्थित इलियास की किराना दुकान से चमकीली पीले रंग की अरहर दाल का नमूना भरा था, जिसके दो दिन बाद 31 जुलाई 2021 को मितौली में अस्पताल रोड स्थित गिरीश कुमार की किराना दुकान से भी पीले रंग की चमकीली अरहर दाल का नमूना भरा था। दोनों नमूनों को जांच के लिए लैब भेजा गया था।
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अब रिपोर्ट प्राप्त होने पर पता चला है कि इन दालों के खराब दानों को चमकीला पीले रंग का बनाने के लिए सिंथेटिक कलर का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें खतरनाक टाट्राजिन नामक तत्व पाया गया है। यह टाट्राजिन पेट की बीमारियों के साथ ही कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को भी जन्म देने में सक्षम है। इसलिए खाद्य परीक्षक ने इस अरहर दाल को अखाद्य व सेहत के लिए असुरक्षित करार दिया है और बताया है कि दाल के दाने भी डिफेक्टिव यानी खराब मिले हैं। लिहाजा खराब दानों को चमकीला पीला रंग का बनाने के लिए सिंथेटिक कलर का इस्तेमाल किया गया है।
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अभिहित अधिकारी कौशलेंद्र शर्मा ने बताया कि अरहर दाल के खराब दानों को चमकीला पीले रंग का बनाने के लिए अखाद्य सिंथेटिक कलर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें टाट्राजिन नामक हानिकारक तत्व पाया गया है। दोनों दुकानदारों के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा, जिसके लिए आयुक्त से अनुमति मांगी गई है।

अरहर दाल को असुरक्षित यानी खाने योग्य नहीं पाया गया है। इसलिए संबंधित दुकानदार के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा चलाया जाएगा। इस अपराध में संबंधित दुकानदार के खिलाफ छह माह की सजा और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
- कौशलेंद्र शर्मा, अभिहित अधिकारी, एफएसडीए
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