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शीघ्र ही जंगल से सटे गांवों में  चलेगा जागरूकता अभियान

Wed, 27 Jul 2016 09:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी। Updated Wed, 27 Jul 2016 09:41 PM IST
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Shortly forest bordering villages Awareness campaigns will
इंसान और जंगली जानवर में टकराव - फोटो : amar ujala

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इंसानों और वन्यजीवों में टकराव रोकने की कवायद
जंगल से निकलकर आबादी के इलाके में वन्यजीवों के आने से जानवरों और इंसानों के बीच टकराव की स्थिति आम होती जा रही है। इस टकराव में न केवल इंसानों का बल्कि जंगली जानवरों का भी नुकसान होता है। इस स्थिति से बचने के लिए वन विभाग जिले में जंगल के आसपास बसे गांवों में बड़े स्तर पर जागरूकता अभियान शुरू करने जा रहा है। 
पिछले दस साल के अंदर तीन दर्जन से अधिक लोग बाघ का निवाला बन चुके हैं तो दर्जनों लोग घायल हुए हैं। इसके साथ ही कई लोग हाथियों के हमले में मारे गए। इन घटनाओं के बाद कई बार लोग बदले की भावना से जंगली जानवरों को भी नुकसान पहुंचा देते हैं। धौरहरा तहसील क्षेत्र में कई साल पहले लगातार हमलावर हो रहे एक तेंदुए को ग्रामीणों ने जिंदा जला दिया था। 
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डीएफओ नार्थ सूरज ने बताया कि ऐसी स्थितियों से बचने के लिए वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया है। इस अभियान के तहत वन विभाग के अधिकारी और वन्यजीव विशेष गांवों में बैठकें कर आबादी के निकट आने वाले जंगली जानवरों से बचाव के उपाय बताएंगे। 
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उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को यह बताया जाएगा कि बाघ तेंदुआ, गैंडा या दूसरे जानवरों के पगमार्क को किस तरह पहचाने। उन्हें यह बताया जाएगा कि यदि आबादी के निकट या खेतों में किसी जंगली जानवर की उपस्थिति का आभास होता है या किसी जानवर के पगमार्क दिखाई देते हैं तो वह संबंधित वनकर्मियों को सूचित करें। जागरूकता अभियान के तहत ग्रामीणों को वन विभाग के अधिकारियों के फोन नंबर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

डीएफओ सूरज ने बताया कि उत्तर खीरी वन प्रभाग के कुछ रेंजों में हाथी का उत्पात ज्यादा होता है। इन इलाकों में ग्रामीणों को इस बात के लिए जागरूक किया जाएगा कि वह हाथियों को खदेड़ने के लिए क्या करें। किस तरह उनसे अपने खेतों का किस तरह बचाव करें। इस जागरूकता अभियान को संचालित करने के लिए मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया है। 
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