खीरी में सारे कयास दरकिनार: अजय मिश्र टेनी फिर भाजपा के उम्मीदवार, धौरहरा में भी नहीं बदला प्रत्याशी
लखीमपुर खीरी जिले की दोनों लोकसभा सीटों पर मौजूदा सांसदों को टिकट दिया गया है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी पर भाजपा का भरोसा बरकरार है। धौरहरा से मौजूदा सांसद रेखा वर्मा को टिकट दिया गया है।
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने खीरी जिले की धौरहरा और खीरी संसदीय सीट पर प्रत्याशियों का एलान क्या किया कि जिले में सियासी पारा एकदम से चढ़ गया। क्योंकि, खुद भाजपा समेत विपक्ष में भी यह चर्चा जोरों पर थी कि इस बार दोनों सीटों पर टिकट बदल सकता है।
दरअसल, महीने भर से दबी जुबान में भाजपाइयों में चर्चा चल रही थी कि दोनों सांसद सहज रूप से नहीं मिलते हैं। चर्चा ये भी थी कि लगातार मिलती जीत से इतने निश्चिंत हो गए हैं कि कार्यकर्ताओं का काम भी नहीं कराते। हफ्भतेभर पहले टिकट को लेकर सीतापुर में हुई भाजपा की बैठक में सांसद अजय मिश्र टेनी के न जाने से भी उनके टिकट कटने के कयास लगाए जा रहे थे।
जातीय समीकरणों के मुताबिक सियासी जानकार धौरहरा से रेखा वर्मा की जगह कोई कुर्मी चेहरा लाने और खीरी से टेनी की जगह कोई ब्राह्मण चेहरा उतारने के कयास लगा रहे थे। ऐसे में धौरहरा से प्रभारी मंत्री आशीष पटेल और खीरी से टेनी की जगह जितिन प्रसाद के नाम की चर्चा हुई। खुलकर बोलने के लिए कोई राजी नहीं था लेकिन टिकटों के एलान के बाद से भाजपा के अंदर ही हलचल तेज हो गई कि आखिर यह कैसे हो गया? वहीं ठीक इसी तरह विपक्ष को भी झटका लगा है। क्योंकि विपक्ष में भी खीरी-धौरहरा दोनों जगह से टिकट बदले जाने की चर्चा थी।
दो दिन पहले दिल्ली में टिकट बंटवारे पर चली मैराथन बैठक के बाद लोनिवि मंत्री जितिन प्रसाद ने घोषणा की कि भाजपा ने उन्हें लोकसभा चुनाव की प्रबंध कमेटी का सह संयोजक बनाया गया है। तभी संकेत मिल रहा था कि टेनी का टिकट बरकरार रह सकता है।
भाजपा ने नहीं किया कोई बदलाव
पहले 2019 में लोकसभा चुनाव और फिर 2022 में हुए विधानसभा चुनाव और फिर संगठन के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में भी किसी को बदला नहीं गया।। सियासी जानकारों का कहना है कि वोट मोदी और योगी के नाम पर मिल रहा है, ऐसे में पार्टी ज्यादा रिस्क भी नहीं लेना चाहती।
2022 के चुनाव का परिणाम बड़ी वजह
धौरहरा से रेखा वर्मा और खीरी से अजय मिश्र टेनी को तीसरी बार टिकट देने की बड़ी वजह 2022 का सफल चुनावी परिणाम भी है। 2021 के पसगवां कांड में रेखा वर्मा के कई करीबियों को जेल भी जाना पड़ा था। चुनाव में कांग्रेस की ओर से पीड़िता के भी मैदान में उतरने के बावजूद रेखा वर्मा को शानदार जीत मिली थी।
अक्तूबर 2021 तिकुनिया हिंसा के बाद भी किसान नेता राकेश टिकैत और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लगातार टेनी का खुलकर विरोध किया था। बावजूद इसके विधानसभा की आठों सीटें भाजपा की झोली में गई थीं। ऐसे में भाजपा ने भी माना कि दोनों सांसदों का विरोध का चुनाव पर कोई असर नहीं पड़ा। यह भी दोनों को तीसरी बार टिकट दिलाने में बड़ी वजह बनी।