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तीन साल में भी नहीं बन सकीं 77 गांवों की सड़कें
लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 02 Mar 2015 06:45 PM IST
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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत 2012-13 में स्वीकृत हुए 105 कार्य (सड़क) अभी तक पूरे नहीं कराए जा सके हैं, जिससे सरकार के दावों की पोल खुली है। वहीं ऐसे ग्रामीणोें को झटका लगा है, जो गांव तक सड़क का ख्वाब संजोए थे। तीन साल में प्रगति के नाम पर सिर्फ 28 कार्य पूरे कराए जा सके हैं। कछुए की चाल से भी धीमी प्रगति के पीछे विभागीय अधिकारी बजट की कमी प्रमुख कारण बता रहे हैं। इस योजना से ज्यादातर 500 की आबादी वाली बसावटों को सड़क से जोड़ा जाना है। इस स्थिति के चलते वित्तीय वर्ष 2013-14 और 2014-15 में कोई कार्ययोजना स्वीकृत नहीं हुई।
बता दें कि वित्तीय वर्ष 2012-13 में बसावटों को जोड़ने और उच्चीकरण के लिए 105 कार्य स्वीकृत हुए थे, जिसकी कुल लंबाई 221.314 किमी है। इन कार्यों पर 121.08 करोड़ लागत आने का अनुमान है, जिसकी डिमांड सरकार से की गई थी। इसके सापेक्ष अभी तक जिले को 22.11 करोड़ की धनराशि प्राप्त हुई है, जिससे करीब 30 कार्य पूरे कराए जा सकते हैं। इस पर भी विभाग की सुस्ती का आलम यह है कि 28 कार्य (सड़कें) पूरे कराए जा सके हैं। जबकि दो कार्यों की शीघ्र पूरा कराने की बात अधिकारी कह रहे हैं। 2012-13 की कार्ययोजना पूरा न होने के चलते 2013-14 और 2014-15 में कार्ययोजना स्वीकृत नहीं हो सकी। हालांकि 2013-14 में 30 किमी दूरी के चार मार्गों के निर्माण का प्रस्ताव था, लेकिन स्वीकृति न मिलने के कारण पेंडिंग है। इसी तरह 2014-15 में किसी प्रस्ताव को शामिल करने की जहमत नहीं उठाई गई।
प्राप्त बजट के सापेक्ष 30 कार्य पूर्ण कराए जाने थे, जिसमें 28 कार्य पूरे कर लिए गए हैं। अवशेष दो कार्य भी शीघ्र पूरे कर लिए जाएंगे। बजट की कमी के चलते स्वीकृत 105 कार्यों में से 77 कार्य अभी पूरे नहीं कराए जा सकते हैं।
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-इं.संतोष कुमार, अधिशाषी अभियंता, पीएमजीएसवाई
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बता दें कि वित्तीय वर्ष 2012-13 में बसावटों को जोड़ने और उच्चीकरण के लिए 105 कार्य स्वीकृत हुए थे, जिसकी कुल लंबाई 221.314 किमी है। इन कार्यों पर 121.08 करोड़ लागत आने का अनुमान है, जिसकी डिमांड सरकार से की गई थी। इसके सापेक्ष अभी तक जिले को 22.11 करोड़ की धनराशि प्राप्त हुई है, जिससे करीब 30 कार्य पूरे कराए जा सकते हैं। इस पर भी विभाग की सुस्ती का आलम यह है कि 28 कार्य (सड़कें) पूरे कराए जा सके हैं। जबकि दो कार्यों की शीघ्र पूरा कराने की बात अधिकारी कह रहे हैं। 2012-13 की कार्ययोजना पूरा न होने के चलते 2013-14 और 2014-15 में कार्ययोजना स्वीकृत नहीं हो सकी। हालांकि 2013-14 में 30 किमी दूरी के चार मार्गों के निर्माण का प्रस्ताव था, लेकिन स्वीकृति न मिलने के कारण पेंडिंग है। इसी तरह 2014-15 में किसी प्रस्ताव को शामिल करने की जहमत नहीं उठाई गई।
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प्राप्त बजट के सापेक्ष 30 कार्य पूर्ण कराए जाने थे, जिसमें 28 कार्य पूरे कर लिए गए हैं। अवशेष दो कार्य भी शीघ्र पूरे कर लिए जाएंगे। बजट की कमी के चलते स्वीकृत 105 कार्यों में से 77 कार्य अभी पूरे नहीं कराए जा सकते हैं।
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-इं.संतोष कुमार, अधिशाषी अभियंता, पीएमजीएसवाई