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नदियों में प्रदूषण से भूगर्भीय जल भी प्रदूषित 

Fri, 03 Jun 2016 11:05 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी। Updated Fri, 03 Jun 2016 11:05 PM IST
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Rivers polluted underground water from pollution
river - फोटो : amar ujala
शहर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण से लोग हो रहे बहरेपन का शिकार
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फसलों में इस्तेमाल हो रहे कीटनाशकों, रसायनिक खादों और नदियों में डाले जा रहे औद्योगिक कचरे से नदियों का पानी प्रदूषित हो रहा है। इससे लोगों में त्वचा संबंधी बीमारियां हो रही हैं। कैंसर और उदर रोगों से लोग पीड़ित हो रहे हैं। वाहनों और जनरेटरों के धुएं से जहां वायुमंडल जहरीला हो रहा है वहीं वाहनों और लाउडस्पीकरों का शोर ध्वनि प्रदूषण बढ़ा रहा है। लगातार बढ़ते ध्वनि  प्रदूषण से लोग बहरे होते जा रहे हैं। शादी विवाह के मौसम में तो तेज आवाज में बजते बैंड और डीजे से लोगों का सोना तक दुश्वार हो जाता है। 
शहर और कस्बों के पास बहने वाली नदियां शहर के कूड़ा कचरा का डलावघर बन गई हैं। शहर के सटकर बहने वाली उल्ल नदी के पास शहर का सारा कूड़ा डाला जा रहा है। यह कूड़ा हवा में उड़कर या बरसात के पानी के साथ बहकर नदी में पहुंच रहा हैै। शहर के अधिकतर गंदे नालों का रुख उल्ल नदी की ओर है। इस गंदे पानी के साथ कपड़े धोने में इस्तेमाल होने वाले डिटर्जेंट के रसायन से उल्ल नदी का पानी बुरी तरह प्रदूषित कर रहा है। 
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उल्ल नदी में खंभारखेड़ा चीनी मिल, कठिना में कुंभी चीनी मिल और सरायन नदी में बजाज हिंदुस्थान चीनी मिल गोला का औद्योगिक कचरा बहाया जा रहा है।  इस औद्योगिक कचरे के रसायनों से भी नदियों का पानी जहरीला होता जा रहा है। कई नदियों का पानी तो इतना प्रदूषित हो चुका है कि इस पानी के कीड़े मकोडे, मछलियां और अन्य जलीव जीव गायब हो चुके हैं। उल्ल नदी के पानी के प्रदूषण का यह आलम है कि करीब छह साल पहले उल्ल नदी का पानी पीने से कई भैंसों की मौत हो गई थी। 
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फसलों में इस्तेमाल होने वाले पेस्टीसाइट्स और इंसेक्टीसाइट्स पानी के साथ घुल कर अंतत: नदियों में जाते हैं। इससे नदियों का इको सिस्टम गड़बड़ाता जा रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि खीरी जिले की अधिकतर नदियों का पानी इतना ज्यादा प्रदूषित हो चुका है कि इसके आसपास का भूजल तक प्रदूषित हो गया है। सर्वे में यह बात सामने आई है कि शारदा नदी के आसपास आर्सेनिक का प्रभाव बढ़ता जा रहा हे। इस भूगर्भीय जल का इस्तेमाल करने से लोग त्वचा रोग और कैंसर जैसी बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। 
उधर जिले में ध्वनि प्रदूषण एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। तेज आवाज में बजते लाउडस्पीकर, सड़कों पर ध्वनि प्रसारण यंत्र लगाकर प्रचार करते प्रचार वाहन, तेज हार्न बजाते वाहन और शादी विवाह के मौके पर तेज आवाज में बजते बैंड और डीजे ध्वनि प्रदूषण पैदा कर रहे है। बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के कारण लोग बहरेपन का शिकार होते जा रहे हैं। नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ. जय सिंह का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण के कारण लोगों में लगातार बहरेपन की शिकायतें  बढ़ रही है। 


जिले की उल्ल, कंडवा, कठिना और सरायन नदियों में का पानी जल प्रदूषण के कारण अपनी उपयोगिता खो चुका है। शारदा के आसपास आर्सेनिक की मात्रा बढ़ती जा रही है। औद्योगिक कचरा पेस्टीसाइट्स और इंसेक्टीसाइट्स के अंश नदियों के पानी को जहरीला बना रहे हैं। 
-डॉ. वीपी सिंह, पर्यावरणविद् 
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