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Lakhimpur Kheri News: कॅरिअर से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर हुई खुली चर्चा
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युवराज दत्त महाविद्यालय में खाली समय में क्लास में पठन पाठन पर चर्चा करते बीए और बीएससी के छात्
लखीमपुर खीरी। कॉलेज जीवन सिर्फ किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह वह जगह है जहां विचार, सपने और सवाल आकार लेते हैं। युवराज दत्त महाविद्यालय में बृहस्पतिवार को दोपहर बाद बीए और बीएससी फर्स्ट सेमेस्टर के कुछ छात्र-छात्राएं जब पढ़ाई से खाली हुए तो क्लासरूम ही उनका संवाद का मंच बन गया। माहौल हल्का-फुल्का जरूर था, लेकिन बातचीत गंभीर और सार्थक।
सबसे पहले छात्र रंजीत कन्नौजिया ने सुझाव दिया कि कॉलेज में कॅरिअर काउंसलिंग नियमित रूप से होनी चाहिए, ताकि छात्रों को भविष्य की दिशा और अवसरों की जानकारी मिल सके। इस पर छात्र किशन ने सुभाष चंद्रा सर का हवाला देते हुए कहा कि कॉलेज में न सिर्फ पढ़ाई बल्कि कॅरिअर गाइडेंस, शिक्षण से जुड़ी गोष्ठियां और अन्य कार्यक्रम भी होते रहते हैं, जो छात्रों को आगे बढ़ने में मददगार साबित होते हैं।
चर्चा के दौरान नई शिक्षा नीति के तहत लागू सेमेस्टर प्रणाली भी मुद्दा बनी। छात्र आदित्य मौर्या ने कहा कि पहले क्लास की पढ़ाई व्यवस्थित चलती थी, लेकिन अब हर छह माह में परीक्षा आने से दबाव बढ़ गया है और तैयारी का समय कम हो गया है।
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इसी बीच छात्रा साक्षी ने आजकल चर्चित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का विषय उठाया। उनका कहना था कि अगर शिक्षक एआई पर विशेष सत्र आयोजित करें तो छात्रों को नई तकनीक की सही दिशा में जानकारी मिलेगी। इस पर छात्रा एलमा ने सहमति जताई, लेकिन साथ ही आगाह किया कि एआई के फायदे जितने हैं, उतने ही नुकसान भी हैं। एक क्लिक में जानकारी मिलना उपयोगी है, लेकिन डेटा साझा होने से जोखिम भी बड़ा है।
चर्चा केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रही। वहां मौजूद छात्रा राधा, छात्र आदित्य मौर्य, शिवा, अना, उरूज, सरोज रानी ने लैब की पढ़ाई, खेलकूद और कॉलेज की अन्य गतिविधियों को भी याद किया। कुछ ने कहा कि खेल से टीमवर्क की भावना आती है, तो कुछ ने लैब में प्रयोगों को सीखने का अलग ही अनुभव बताया।
कुल मिलाकर यह कुछ घंटे छात्रों के लिए सिर्फ समय काटने का जरिया नहीं रहे, बल्कि आपसी विचार-विमर्श का अनौपचारिक मंच बन गए। इसमें उनके सपने, सवाल और भविष्य की योजनाएं झलकती दिखीं।
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सबसे पहले छात्र रंजीत कन्नौजिया ने सुझाव दिया कि कॉलेज में कॅरिअर काउंसलिंग नियमित रूप से होनी चाहिए, ताकि छात्रों को भविष्य की दिशा और अवसरों की जानकारी मिल सके। इस पर छात्र किशन ने सुभाष चंद्रा सर का हवाला देते हुए कहा कि कॉलेज में न सिर्फ पढ़ाई बल्कि कॅरिअर गाइडेंस, शिक्षण से जुड़ी गोष्ठियां और अन्य कार्यक्रम भी होते रहते हैं, जो छात्रों को आगे बढ़ने में मददगार साबित होते हैं।
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चर्चा के दौरान नई शिक्षा नीति के तहत लागू सेमेस्टर प्रणाली भी मुद्दा बनी। छात्र आदित्य मौर्या ने कहा कि पहले क्लास की पढ़ाई व्यवस्थित चलती थी, लेकिन अब हर छह माह में परीक्षा आने से दबाव बढ़ गया है और तैयारी का समय कम हो गया है।
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इसी बीच छात्रा साक्षी ने आजकल चर्चित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का विषय उठाया। उनका कहना था कि अगर शिक्षक एआई पर विशेष सत्र आयोजित करें तो छात्रों को नई तकनीक की सही दिशा में जानकारी मिलेगी। इस पर छात्रा एलमा ने सहमति जताई, लेकिन साथ ही आगाह किया कि एआई के फायदे जितने हैं, उतने ही नुकसान भी हैं। एक क्लिक में जानकारी मिलना उपयोगी है, लेकिन डेटा साझा होने से जोखिम भी बड़ा है।
चर्चा केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रही। वहां मौजूद छात्रा राधा, छात्र आदित्य मौर्य, शिवा, अना, उरूज, सरोज रानी ने लैब की पढ़ाई, खेलकूद और कॉलेज की अन्य गतिविधियों को भी याद किया। कुछ ने कहा कि खेल से टीमवर्क की भावना आती है, तो कुछ ने लैब में प्रयोगों को सीखने का अलग ही अनुभव बताया।
कुल मिलाकर यह कुछ घंटे छात्रों के लिए सिर्फ समय काटने का जरिया नहीं रहे, बल्कि आपसी विचार-विमर्श का अनौपचारिक मंच बन गए। इसमें उनके सपने, सवाल और भविष्य की योजनाएं झलकती दिखीं।