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नहीं मिल रहीं पर्चियां किसानों में हाहाकार
धौरहरा/ईसानगर
Updated Sun, 15 Feb 2015 04:58 PM IST
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गोविंद शुगर मिल ऐरा और गुलरिया चीनी मिल के किसान अपना गन्ना बेचने के लिए पर्चियों का इंतजार कर रहे हैं। छोटे और मध्यम किसानों की पर्चियां जारी नहीं हो रही हैं बल्कि बड़े किसान और गन्ना माफिया को खूब पर्चियां मिल रहीं हैं। इन चीनी मिलों के अधिकारी, किसानों को सिस्टम से पर्चियां देने का दावा कर रहे हैं। उधर किसानों का आरोप है कि उन्हें कैलेंडर के हिसाब से पर्चियां नहीं दी जा रही हैं बल्कि मिल प्रशासन मनमाने ढंग से बिचौलियों की पर्चियां जारी कर रहा है।
ऐरा चीनी मिल को गन्ना सप्लाई करने वाले शेखनापुर निवासी किसान त्रिभुवन ने बताया है कि उनका 16 पर्चियाें का सट्टा है। उन्हें अभी तक मात्र एक पर्ची मिली है। इसी गांव के किसान सत्यप्रकाश, नंदराम, पद्मावती और माधुरी देवी का कहना है कि कैलेंडर के मुताबिक पर्चियां नहीं दी जा रही हैं। वहीं शेरपुर के किसान त्रिजुगीनरायन, दिनेश, भट्ठीपुरवा के किसान दीपक मिश्रा ने आरोप लगाया है कि मिल के एक बडे़ अधिकारी खुद बिचौलियों से मिलकर नानपारा फैक्ट्री के किसानों का गन्ना खरीद रहे हैं, जबकि क्षेत्र के किसानों को एक-एक पर्ची के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं गुलरिया चीनी मिल के किसानों का आरोप है कि कैलेंडर के अनुसार पर्चियां नहीं मिल रही हैं।
सचिव, सहकारी गन्ना विकास समिति ऐरा टीएन यादव ने बताया कि हमने बांडिंग रुकवा दी है। इससे छोटे किसानों को फायदा होगा। बाहरी गन्ना खरीदे जाने की जानकारी नहीं है। मामला संज्ञान में आता है तो जांच कराई जाएगी।
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ऐरा चीनी मिल को गन्ना सप्लाई करने वाले शेखनापुर निवासी किसान त्रिभुवन ने बताया है कि उनका 16 पर्चियाें का सट्टा है। उन्हें अभी तक मात्र एक पर्ची मिली है। इसी गांव के किसान सत्यप्रकाश, नंदराम, पद्मावती और माधुरी देवी का कहना है कि कैलेंडर के मुताबिक पर्चियां नहीं दी जा रही हैं। वहीं शेरपुर के किसान त्रिजुगीनरायन, दिनेश, भट्ठीपुरवा के किसान दीपक मिश्रा ने आरोप लगाया है कि मिल के एक बडे़ अधिकारी खुद बिचौलियों से मिलकर नानपारा फैक्ट्री के किसानों का गन्ना खरीद रहे हैं, जबकि क्षेत्र के किसानों को एक-एक पर्ची के लिए भटकना पड़ रहा है। वहीं गुलरिया चीनी मिल के किसानों का आरोप है कि कैलेंडर के अनुसार पर्चियां नहीं मिल रही हैं।
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सचिव, सहकारी गन्ना विकास समिति ऐरा टीएन यादव ने बताया कि हमने बांडिंग रुकवा दी है। इससे छोटे किसानों को फायदा होगा। बाहरी गन्ना खरीदे जाने की जानकारी नहीं है। मामला संज्ञान में आता है तो जांच कराई जाएगी।
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