लखीमपुर खीरी: ककराही गांव में तेंदुए की दहशत, बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ा, इलाके में ड्रोन से निगरानी
लखीमपुर खीरी जिले में युवक पर तेंदुए के हमले के बाद ककराही गांव में दहशत का माहौल है। डर के कारण शनिवार को गांव के बच्चे स्कूल नहीं गए। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में जाने से भी डर रहा है। उन्होंने वन विभाग से तेंदुए पकड़ने की मांग की है।
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लखीमपुर खीरी जिले के बरवर के गलरई भट्ठे के पास शुक्रवार को युवक पर तेंदुए के हमले के बाद गांव और आसपास के इलाके में दहशत का माहौल है। तेंदुए के डर से ग्रामीण खेतों की ओर जाने से बच रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी पशुपालकों के सामने है। ग्रामीण अपने पशुओं के लिए खेतों से चारा तक नहीं ला पा रहे हैं। वहीं बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक भी चिंतित हैं। तेंदुए के डर से गांव के कई बच्चे शनिवार को स्कूल नहीं गए।
शुक्रवार सुबह गन्ने के खेत में घास काट रहे ककराही गांव निवासी केपी जोशी (22 वर्ष) पर तेंदुए ने हमला कर दिया था। युवक की चीख सुनकर मौके पर पहुंचे उसके पिता शिवकरन लाठी लेकर तेंदुए से भिड़ गए थे। बाद में आसपास के किसानों के पहुंचने पर तेंदुआ केपी को छोड़कर गन्ने के खेत में भाग गया था। घायल केपी को पहले जिला अस्पताल लखीमपुर खीरी लाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर शाहजहांपुर रेफर कर दिया गया था।
शाहजहांपुर में चल रहा इलाज, हालत में कुछ सुधार
परिजनों के मुताबिक केपी का इलाज जिला अस्पताल शाहजहांपुर में चल रहा है। उसकी हालत में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन अभी वह पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुआ है। माता-पिता अस्पताल में उसके साथ मौजूद हैं और लगातार उसकी देखभाल कर रहे हैं। हमले में केपी की गर्दन के पिछले हिस्से में तेंदुए ने हमला किया था और शरीर पर पंजों के निशान भी आए थे।
पिंजरा लगाकर तेंदुए को पकड़ने की मांग
हमले के बाद से ग्रामीणों में तेंदुए को लेकर भय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि जब तक तेंदुआ पकड़ा नहीं जाता, तब तक खेतों में काम करना मुश्किल है। ग्रामीण वन विभाग से क्षेत्र में पिंजरा लगाकर तेंदुए को पकड़ने की मांग कर रहे हैं। वन विभाग की टीम तेंदुए की तलाश और उसकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। कैमरे की निगरानी के बाद तेंदुए की मौजूदगी और उसकी सही पहचान की पुष्टि होने की उम्मीद है।
वन विभाग ने तेंदुए की लोकेशन जानने के लिए शनिवार को गांव के आसपास ड्रोन कैमरे को भी उड़ाया। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए के पकड़े जाने तक बच्चों को स्कूल भेजना और खेतों में पशुओं के लिए चारा लेने जाना भी जोखिम भरा लग रहा है।