{"_id":"68e2bb8abba18e882403ca04","slug":"garima-is-bringing-light-of-education-in-the-lives-of-poor-children-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1001-157556-2025-10-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: गरीब बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजियारा भर रहीं गरिमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: गरीब बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजियारा भर रहीं गरिमा
Mon, 06 Oct 2025 12:10 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 06 Oct 2025 12:10 AM IST
विज्ञापन
बच्चों के साथ गरिमा सिंह व उनके पति जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह। संवाद
लखीमपुर खीरी। गरीब बच्चों को शिक्षा प्रदान करना पुण्य का कार्य है। बच्चे शिक्षित होंगे, तो ही आगे चलकर घर-परिवार और समाज के लिए उपयोगी साबित होंगे। इसी सोच के साथ जिला कृषि अधिकारी की गृहिणी पत्नी गरिमा सिंह निर्धन परिवार के बच्चों के जीवन में शिक्षा का उजियारा भर रही हैं।
पढ़ाई में कमजोर बच्चों को शिक्षित करने के साथ ही उनको हुनरमंद बनाने के लिए भी निस्वार्थ भाव से प्रशिक्षण दे रही हैं। इतना ही नहीं बच्चों को स्टेशनरी के साथ खाने-पीने की वस्तुएं भी वे अपने पास से ही उपलब्ध कराती हैं।
आफिसर्स कॉलोनी के पार्क में ही वो सभी बच्चों को पढ़ाई कराने के साथ ही सामाजिक गतिविधियों का ज्ञान भी देती हैं। खेल-खेल में ही देश-दुनिया के बारे में बताती हैं। यहां उनके पास एक दो नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर ऐसे 25 से 30 बच्चे आते हैं। वे ड्राइंग, पजल आदि हर एक गतिविधियों से बच्चों को जोड़ रही हैं। उनकी सबसे अच्छी खूबी ये है कि वे अपने बच्चे को भी समूह में शामिल करती हैं।
विज्ञापन
इस काम में उनके पति जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह भी पूरा सहयोग देते हैं। गरिमा ने बताया कि उन्होंने इसकी शुरुआत घर से की थी। उनके घर में जो आंटी काम करती हैं, उनके व उनके आसपास के बच्चों को उन्होंने साथ में जोड़ा। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती गई। कुछ बच्चे होते हैं, जो स्कूल नहीं जा पाते या स्कूल में ठीक से पढ़ाई नहीं होती, उनके लिए वह काम करती हैं, ताकि वो बच्चे भी कुछ कर सकें।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -
...तो यहां से मिलीं प्रेरणा
गरिमा सिंह ने बताया कि जब वो पढ़ती थीं, तब कई ऐसे बच्चे होते थे, जो स्कूल नहीं जा पाते थे। उसी दिन से दिमाग में था कि उनके आगे कुछ करूंगी। कोशिश की और धीरे-धीरे राह मिलती गई। पहले तो ऐसे ही काम किया, लेकिन बाद में ज्ञानोदय कल्याण फाउंडेशन के नाम से एक एनजीओ का पंजीकरण कराया। बच्चों के साथ जुड़ने से काफी अच्छा लगता है और दिल से सुकून मिलता है।
विज्ञापन
पढ़ाई में कमजोर बच्चों को शिक्षित करने के साथ ही उनको हुनरमंद बनाने के लिए भी निस्वार्थ भाव से प्रशिक्षण दे रही हैं। इतना ही नहीं बच्चों को स्टेशनरी के साथ खाने-पीने की वस्तुएं भी वे अपने पास से ही उपलब्ध कराती हैं।
विज्ञापन
आफिसर्स कॉलोनी के पार्क में ही वो सभी बच्चों को पढ़ाई कराने के साथ ही सामाजिक गतिविधियों का ज्ञान भी देती हैं। खेल-खेल में ही देश-दुनिया के बारे में बताती हैं। यहां उनके पास एक दो नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर ऐसे 25 से 30 बच्चे आते हैं। वे ड्राइंग, पजल आदि हर एक गतिविधियों से बच्चों को जोड़ रही हैं। उनकी सबसे अच्छी खूबी ये है कि वे अपने बच्चे को भी समूह में शामिल करती हैं।
विज्ञापन
इस काम में उनके पति जिला कृषि अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह भी पूरा सहयोग देते हैं। गरिमा ने बताया कि उन्होंने इसकी शुरुआत घर से की थी। उनके घर में जो आंटी काम करती हैं, उनके व उनके आसपास के बच्चों को उन्होंने साथ में जोड़ा। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती गई। कुछ बच्चे होते हैं, जो स्कूल नहीं जा पाते या स्कूल में ठीक से पढ़ाई नहीं होती, उनके लिए वह काम करती हैं, ताकि वो बच्चे भी कुछ कर सकें।
...तो यहां से मिलीं प्रेरणा
गरिमा सिंह ने बताया कि जब वो पढ़ती थीं, तब कई ऐसे बच्चे होते थे, जो स्कूल नहीं जा पाते थे। उसी दिन से दिमाग में था कि उनके आगे कुछ करूंगी। कोशिश की और धीरे-धीरे राह मिलती गई। पहले तो ऐसे ही काम किया, लेकिन बाद में ज्ञानोदय कल्याण फाउंडेशन के नाम से एक एनजीओ का पंजीकरण कराया। बच्चों के साथ जुड़ने से काफी अच्छा लगता है और दिल से सुकून मिलता है।