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चलता मिला फर्जी अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 29 May 2016 12:10 AM IST
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झोलाछाप
- फोटो : अमर उजाला
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डिप्टी सीएमओ की जांच में हुआ खुलासा, सीएमओ को भेजी रिपोर्ट
तहसील दिवस में हुई शिकायत के बाद हुई जांच
अस्पताल का रजिस्ट्रेशन न ही मेडिकल स्टोर का
झोलाछाप डॉक्टरों पर अंकुुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग भले ही तमाम कार्रवाई करने का दावा करता हो लेकिन जिले के उपनगर गोला गोकर्णनाथ कसबे में ही जहॉनपुर रोड पर वर्षों से एक घर में फर्जी अस्पताल चलता रहा और जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी। तहसील दिवस में शिकायत पर डिप्टी सीएमओ डॉ. रविंद्र नाथ ने जांच की तो यह फर्जीवाड़ा सामने आया। डिप्टी सीएमओ ने मामले की रिपोर्ट सीएमओ को भेजी है।
डिप्टी सीएमओ डा. रविंद्र नाथ ने बताया कि तहसील दिवस में गोला क्षेत्र के गांव कालीचरनपुर निवासी सुनीता देवी और हफीजपुर के मोहम्मद अरशद ने क्रमश: बुखार और गुर्दे में दर्द होने पर इस अस्पताल में इलाज के दौरान हजारों रुपये लूटे जाने की शिकायत की थी। शिकायत कर्ताओं ने यह भी बताया कि उन्हें अस्पताल में खून भी चढ़ाया गया था। सीएमओ के निर्देश पर गोला पीएचसी के प्रभारी डॉ डीपी वर्मा सहित टीम के साथ उन्होंने अस्पताल में जांच की तो यह फर्जी निकला। डॉ. रविंद्र ने बताया कि अस्पताल संचालक के पास इलेक्ट्रो होम्योपैथी की डिग्री मिली है लेकिन वह एलोपैथी इलाज करते पाए गए। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं है। यहां गैर पंजीकृत मेडिकल स्टोर भी है। अस्पताल में सात बेड मिले। छह पर मरीज भर्ती थे, जिन्हें ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था। उन्होंने कथित डॉक्टर की डिग्री आदि कब्जे में लेते हुए मामले की रिपोर्ट सीएमओ को भेजी है। अस्पताल को बंद करने का निर्देश दिया है।
सिर्फ जिला अस्पताल में है ब्लड चढ़ाने के सुविधा
डिप्टी सीएमओ का कहना है कि सरकारी स्तर पर सिर्फ जिला अस्पताल में ही ब्लड चढ़ाने की सुविधा है। ब्लड चढ़ाने के लिए क्रिटिकल यूनिट का होना जरूरी होता है, जिसमें फिजीशियन से लेकर एमडी तक के डॉक्टर और फार्मेसिस्ट तथा जीवनरक्षक दवाइयां और ऑक्सीजन होनी चाहिए।
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भर्ती मिले ये मरीज
भुड़वारा निवासी अनीता, मदनपुर निवासी सुनीता देवी, सौंठन निवासी रामकुमार, लक्ष्मीपुर निवासी विद्यावती, नंदापुर निवासी प्रदीप और सिनेमा रोड निवासी राहुल भर्ती मिले। सभी को ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था। इन मरीजों को सिर्फ बुखार, कमजोरी लगने आदि की शिकायतें थीं।
मामूली बीमार भी कर लेते हैं भर्ती
डिप्टी सीएमओ का कहना है कि पेट दर्द, बुखार, खांसी जैसे मामूली रोग के मरीजों की सभी जांचें करके दो हजार रुपये तक तथा भर्ती करके इतने का इलाज करके उनकी जेबें काटी जा रही थीं।
मामला संज्ञान में नहीं है। डिप्टी सीएमओ की जांच में फर्जी अस्पताल मिला है तो सीएमओ की रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल संचालक के विरुद्ध विधिक कार्रवाई कराई जाएगी। जिले में चलने वाले ऐसे फर्जी अस्पतालों पर भी अंकुश लगाया जाएगा।
- आकाशदीप, डीएम
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तहसील दिवस में हुई शिकायत के बाद हुई जांच
अस्पताल का रजिस्ट्रेशन न ही मेडिकल स्टोर का
झोलाछाप डॉक्टरों पर अंकुुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग भले ही तमाम कार्रवाई करने का दावा करता हो लेकिन जिले के उपनगर गोला गोकर्णनाथ कसबे में ही जहॉनपुर रोड पर वर्षों से एक घर में फर्जी अस्पताल चलता रहा और जिम्मेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी। तहसील दिवस में शिकायत पर डिप्टी सीएमओ डॉ. रविंद्र नाथ ने जांच की तो यह फर्जीवाड़ा सामने आया। डिप्टी सीएमओ ने मामले की रिपोर्ट सीएमओ को भेजी है।
डिप्टी सीएमओ डा. रविंद्र नाथ ने बताया कि तहसील दिवस में गोला क्षेत्र के गांव कालीचरनपुर निवासी सुनीता देवी और हफीजपुर के मोहम्मद अरशद ने क्रमश: बुखार और गुर्दे में दर्द होने पर इस अस्पताल में इलाज के दौरान हजारों रुपये लूटे जाने की शिकायत की थी। शिकायत कर्ताओं ने यह भी बताया कि उन्हें अस्पताल में खून भी चढ़ाया गया था। सीएमओ के निर्देश पर गोला पीएचसी के प्रभारी डॉ डीपी वर्मा सहित टीम के साथ उन्होंने अस्पताल में जांच की तो यह फर्जी निकला। डॉ. रविंद्र ने बताया कि अस्पताल संचालक के पास इलेक्ट्रो होम्योपैथी की डिग्री मिली है लेकिन वह एलोपैथी इलाज करते पाए गए। अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं है। यहां गैर पंजीकृत मेडिकल स्टोर भी है। अस्पताल में सात बेड मिले। छह पर मरीज भर्ती थे, जिन्हें ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था। उन्होंने कथित डॉक्टर की डिग्री आदि कब्जे में लेते हुए मामले की रिपोर्ट सीएमओ को भेजी है। अस्पताल को बंद करने का निर्देश दिया है।
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सिर्फ जिला अस्पताल में है ब्लड चढ़ाने के सुविधा
डिप्टी सीएमओ का कहना है कि सरकारी स्तर पर सिर्फ जिला अस्पताल में ही ब्लड चढ़ाने की सुविधा है। ब्लड चढ़ाने के लिए क्रिटिकल यूनिट का होना जरूरी होता है, जिसमें फिजीशियन से लेकर एमडी तक के डॉक्टर और फार्मेसिस्ट तथा जीवनरक्षक दवाइयां और ऑक्सीजन होनी चाहिए।
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भर्ती मिले ये मरीज
भुड़वारा निवासी अनीता, मदनपुर निवासी सुनीता देवी, सौंठन निवासी रामकुमार, लक्ष्मीपुर निवासी विद्यावती, नंदापुर निवासी प्रदीप और सिनेमा रोड निवासी राहुल भर्ती मिले। सभी को ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था। इन मरीजों को सिर्फ बुखार, कमजोरी लगने आदि की शिकायतें थीं।
मामूली बीमार भी कर लेते हैं भर्ती
डिप्टी सीएमओ का कहना है कि पेट दर्द, बुखार, खांसी जैसे मामूली रोग के मरीजों की सभी जांचें करके दो हजार रुपये तक तथा भर्ती करके इतने का इलाज करके उनकी जेबें काटी जा रही थीं।
मामला संज्ञान में नहीं है। डिप्टी सीएमओ की जांच में फर्जी अस्पताल मिला है तो सीएमओ की रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल संचालक के विरुद्ध विधिक कार्रवाई कराई जाएगी। जिले में चलने वाले ऐसे फर्जी अस्पतालों पर भी अंकुश लगाया जाएगा।
- आकाशदीप, डीएम