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Lakhimpur Kheri News: दस विधायक मिलकर भी नहीं जिता पाए अपने प्रत्याशी को
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लखीमपुर। भाजपा दिग्गजों ने इस तरह के नतीजों की उम्मीद नहीं की थी। शुरुआत से यह माना जा रहा था कि इस बार दोनों सीटों पर हार-जीत में अंतर आ सकता है, लेकिन हैट्रिक जो जरूर लगेगी। अपनी जीत के प्रति अजय मिश्र टेनी और रेखा अरुण वर्मा भी आश्वस्त नजर आ रही थीं, लेकिन दस विधायक मिलकर भी दोनों प्रत्याशियों को नहीं जिता सके।
किला ढहने वाले नतीजे आने के बाद भाजपा के उन विधायकों की चर्चाएं तेज हो गई हैं जो दिग्गजों से अंदरखाने नाराज चल रहे थे। कई बैठकों से विधायक गायब रहे। इनकी चर्चाएं खूब रही हैं। नतीजों के बाद भाजपा पार्टी कार्यकर्ता भी स्पष्ट कह रहे हैं कि अभी तक कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी जा रही थी, अब जनता जर्नादन ने दिग्गजों की नहीं सुनी।
खीरी लोकसभा क्षेत्र में गोला, निघासन, पलिया, लखीमपुर, कस्ता विधानसभा क्षेत्र आते हैं। जबकि धौरहरा लोकसभा क्षेत्र में मोहम्मदी, श्रीनगर, धौरहरा के सीतापुर जिले के हरगांव और महोली विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इन सभी सीटों पर वर्तमान में भाजपा विधायक हैं। 2022 में हुए विस चुनाव की बात करें तो पलिया से भाजपा विधायक रोमी साहनी, कस्ता से सौरभ सिंह, निघासन से शशांक वर्मा, लखीमपुर से योगेश वर्मा, गोला अमन गिरि, धौरहरा से विनोद शंकर अवस्थी, श्रीनगर से मंजू त्यागी, मोहम्मदी से लोकेंद्र प्रताप सिंह के अलावा हरगांव से सुरेश राही और महोली से शशांक तिवारी विधायक हैं।
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प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री स्वयं मैदान में उतरे थे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से लेकर राज्य सरकार के दोनों डिप्टी सीएम और कई मंत्रियाें ने खीरी और धौरहरा सीट पर जनता जर्नादन का दिल जीतने के लिए दिन रात कर दी थी। इसके बावजूद दोनों सीटें नहीं जीत पाए थे।
अखिलेश ने सिर्फ दो जनसभाएं कीं और जीत ले गए मैदान
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखीमपुर शहर और कस्ता में जनसभाएं की थीं। अखिलेश की जनसभाओं में जिस कदर भीड़ उमड़ी थी, उससे यही माना जा रहा था कि अखिलेश की जनसभाएं गेमचेंजर के रूप में काम करेंगी। वैसा ही हुआ। दो जनसभाएं कर अखिलेश दोनों सीटें जिता ले गए।
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जनता का जनादेश स्वीकार है। इतना सब करने के बाद चूक कहां हुई, इसका राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर पर मंथन किया जाएगा। कार्यकर्ता हताश और निराश न हों, हम उनके साथ खड़े हैं।
- सुनील सिंह, जिलाध्यक्ष बीजेपी
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किला ढहने वाले नतीजे आने के बाद भाजपा के उन विधायकों की चर्चाएं तेज हो गई हैं जो दिग्गजों से अंदरखाने नाराज चल रहे थे। कई बैठकों से विधायक गायब रहे। इनकी चर्चाएं खूब रही हैं। नतीजों के बाद भाजपा पार्टी कार्यकर्ता भी स्पष्ट कह रहे हैं कि अभी तक कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी जा रही थी, अब जनता जर्नादन ने दिग्गजों की नहीं सुनी।
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खीरी लोकसभा क्षेत्र में गोला, निघासन, पलिया, लखीमपुर, कस्ता विधानसभा क्षेत्र आते हैं। जबकि धौरहरा लोकसभा क्षेत्र में मोहम्मदी, श्रीनगर, धौरहरा के सीतापुर जिले के हरगांव और महोली विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इन सभी सीटों पर वर्तमान में भाजपा विधायक हैं। 2022 में हुए विस चुनाव की बात करें तो पलिया से भाजपा विधायक रोमी साहनी, कस्ता से सौरभ सिंह, निघासन से शशांक वर्मा, लखीमपुर से योगेश वर्मा, गोला अमन गिरि, धौरहरा से विनोद शंकर अवस्थी, श्रीनगर से मंजू त्यागी, मोहम्मदी से लोकेंद्र प्रताप सिंह के अलावा हरगांव से सुरेश राही और महोली से शशांक तिवारी विधायक हैं।
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प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री स्वयं मैदान में उतरे थे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से लेकर राज्य सरकार के दोनों डिप्टी सीएम और कई मंत्रियाें ने खीरी और धौरहरा सीट पर जनता जर्नादन का दिल जीतने के लिए दिन रात कर दी थी। इसके बावजूद दोनों सीटें नहीं जीत पाए थे।
अखिलेश ने सिर्फ दो जनसभाएं कीं और जीत ले गए मैदान
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखीमपुर शहर और कस्ता में जनसभाएं की थीं। अखिलेश की जनसभाओं में जिस कदर भीड़ उमड़ी थी, उससे यही माना जा रहा था कि अखिलेश की जनसभाएं गेमचेंजर के रूप में काम करेंगी। वैसा ही हुआ। दो जनसभाएं कर अखिलेश दोनों सीटें जिता ले गए।
जनता का जनादेश स्वीकार है। इतना सब करने के बाद चूक कहां हुई, इसका राष्ट्रीय, प्रदेश और जिला स्तर पर मंथन किया जाएगा। कार्यकर्ता हताश और निराश न हों, हम उनके साथ खड़े हैं।
- सुनील सिंह, जिलाध्यक्ष बीजेपी