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‘जली झोपड़ी तो महल भी जलेंगे।’
अमर उजाला ब्यूरो-गोला गोकर्णनाथ।
Updated Mon, 25 Apr 2016 11:46 PM IST
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मुशायरा
- फोटो : अमर उजाला
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गंगा जमुनी तहजीब का सबब बना कुल हिंद मुशायरा
छोटी काशी में ऐतिहासिक मेला चैती के सांस्कृतिक मंच पर 24 अप्रैल रविवार को कुलहिन्द मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें मुल्क के नामचीन शायरों ने अपने शेरों से महफिल को रोशन किया, श्रोता देर रात तक डटेे रहे।
चैती मेला के सांस्कृतिक मंच पर मधुकर शैदाई के संयोजन में हुए कुलहिन्द मुशायरे का आगाज मुख्य अतिथि जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष चंद्रमोहन सिंह और नगर पालिका परिषद की सदर मीनाक्षी अग्रवाल ने शमां रोशन कर किया। नगर पालिका परिषद की सदर और सदस्यों ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी स्मरणीय सेवाएं देने वाले अवधेश सिंह, इखलाक, हाजी मुस्तफा हुसेन, मौलाना आजाद, विशाल करनाकर, जयेंद्र वर्मा, अबरारुल हक, हाफिज अब्दुल मलिक हमीदी, मौलाना अब्दुल अख्तर, मोहम्मद यासीन, श्रीकान्त अवस्थी, मोहम्मद इलियास आदि को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम संचालन मनोज श्रीवास्तव एडवोकेट ने किया।
शायर तारिक इस्लाम ने नाकाम गोलवी की पुस्तक से नात पढ़कर शेरो शायरी का दौर शुरू किया।
मंच पर वाहिद अली वाल्दि ने फरमाया-
अभी जल रहे और कल भी जलेंगे, जला झील का जल, कंबल भी जलेंगे।
मोहब्बत की बस्ती जलाने चलोगे, जली झोपड़ी तो महल भी जलेंगे।
वासिफ फारूकी ने संचालन करते हुए फरमाया-
जो तारे, मुस्कुराहट, फूल दिल, खुशबू समझते हैं।
वो सारे लोग मेरे मुल्क में उर्दू समझते है।।
उस्मान मीनाई ने यूं कहा-
कोई भी काम सलीके से कर नहीं सकते,
तुम्हारा हाल है, उर्दू अकादमी की तरह।
अल्ताफ जिया ने कहा-
परिन्दे बहुत फड़फड़ाने लगे हैं, जो नोचे गए थे वो पर आ गए क्या।
रुड़की से आए सिकंदर हयात गड़बड़ ने फरमाया-
हम उससे इश्क फरमाने गए तो नाप के उसने हमारी टांग तोड़ी और हमारा सर मुड़ाया है।
हमारी देख कर हालत कहा माशूक ने हंसकर बहारो फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है।
अमरोहा से आए निकहत अमरोही ने फरमाया-
क्या करूं मैं मेरा बाप मजदूर है, मेरी डोली उठाने से मजबूर है।
जिस हथेली पे शादी की मेहंदी रचे मेरे हाथों में ऐसी हथेली नहीं।।
दिल्ली उर्दू अकादमी दिल्ली उपाध्यक्ष डॉ माजिद देवबंदी ने कहा-
खुद को भी आजमाओ तो पहले, कुछ नया कर दिखाओ तो पहले।
बन ही जाएंगे मंदिरों मस्जिद, दिल से दिल मिलाओ तो पहले।।
उज्जैन(मध्य प्रदेश) से आई मोहतरमा शबाना शबनम ने फरमाया-
वक्त की मांग है अब होश में आओ लोगों,
अपने हाथों से न घर अपना जलाओ लोगों।
बाद में हिन्दू मुसलमान सिख ईसाई बनो
पहले इंसान जरा बन के दिखाओ लोगों?
रुड़की उत्तराखंड से आए सज्जाद झंझट ने कहा-
इतना तरसाया है शादी की तमन्ना ने मुझे, अब तो हर शख्स मुझे अपना ससुर लगता है।
बाराबंकी से आए उसमान मीनाई ने फरमाया-
दल बदलुओं की चांदी में सोने में रख दिया, लेकिन पुराने लोगों को कोने में रख दिया।
लखनऊ के वाहिद अली वाहिद ने फरमाया-
न भूखा रहेगा, न नंगा रहेगा, कसम खा लो घर में न दंगा रहेगा।
इस मौके पर आशा देवी प्रजापति, रीता त्रिवेदी, काशी विश्वनाथ तिवारी, जमाल अहमद राईन, रफी अहमद, आशीष अवस्थी लालू, हेमू शुक्ला, विमलेश मिश्र, डॉ वेदप्रकाश अग्निहोत्री, आनन्द प्रकाश शुक्ला, कफील, इमरान मलिक, सुरेश जायसवाल, ओपी भारती, रामकुमार वर्मा, संजीव गुप्ता, विरेन्द्र कुमार, रामकृष्ण मिश्र एडवोकेट, राजेश वर्मा, रमेश जायसवाल, राजेश गिरि एडवोकेट, राजेश बाजपेयी, राकेश कुमार, निरेंद्र कुमार धाकड़े, श्रीशचंद त्रिपाठी, श्रीराम शुक्ला, गोपाल स्वरूप मिश्र, अजय वर्मा, मोहित गिरि, अमित श्रीवास्तव, वैभव त्रिपाठी, अशोक मिश्र, प्रेमप्रकाश पाठक, अरविन्द कुमार, रविशंकर, श्रेष्ठ रस्तोगी आदि मौजूद रहे।
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गुलदस्ता ए नात का हुआ विमोचन
कुल हिन्द मुशायरे में नगर के मशहूर शायर स्वर्गीय अल्ला बख्श कुरैशी (नाकाम गोलवी) की पुस्तक गुलदस्ता ए नात का विमोचन डॉ माजिद देवबंदी के हाथों पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल की मौजूदगी में किया गया गया। नाकाम गोलवी की रचनाओं को संग्रह करके मधुकर शैदाई ने गुलदस्ता ए नात का प्रकाशन कराया है।
चैती मेले में आज
गोला गोकर्णनाथ। नगर के ऐतिहासिक चैती मेले के सांस्कृतिक मंच पर 26 अप्रैल मंगलवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन रात्रि आठ बजे से।
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छोटी काशी में ऐतिहासिक मेला चैती के सांस्कृतिक मंच पर 24 अप्रैल रविवार को कुलहिन्द मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसमें मुल्क के नामचीन शायरों ने अपने शेरों से महफिल को रोशन किया, श्रोता देर रात तक डटेे रहे।
चैती मेला के सांस्कृतिक मंच पर मधुकर शैदाई के संयोजन में हुए कुलहिन्द मुशायरे का आगाज मुख्य अतिथि जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष चंद्रमोहन सिंह और नगर पालिका परिषद की सदर मीनाक्षी अग्रवाल ने शमां रोशन कर किया। नगर पालिका परिषद की सदर और सदस्यों ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी स्मरणीय सेवाएं देने वाले अवधेश सिंह, इखलाक, हाजी मुस्तफा हुसेन, मौलाना आजाद, विशाल करनाकर, जयेंद्र वर्मा, अबरारुल हक, हाफिज अब्दुल मलिक हमीदी, मौलाना अब्दुल अख्तर, मोहम्मद यासीन, श्रीकान्त अवस्थी, मोहम्मद इलियास आदि को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम संचालन मनोज श्रीवास्तव एडवोकेट ने किया।
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शायर तारिक इस्लाम ने नाकाम गोलवी की पुस्तक से नात पढ़कर शेरो शायरी का दौर शुरू किया।
मंच पर वाहिद अली वाल्दि ने फरमाया-
अभी जल रहे और कल भी जलेंगे, जला झील का जल, कंबल भी जलेंगे।
मोहब्बत की बस्ती जलाने चलोगे, जली झोपड़ी तो महल भी जलेंगे।
वासिफ फारूकी ने संचालन करते हुए फरमाया-
जो तारे, मुस्कुराहट, फूल दिल, खुशबू समझते हैं।
वो सारे लोग मेरे मुल्क में उर्दू समझते है।।
उस्मान मीनाई ने यूं कहा-
कोई भी काम सलीके से कर नहीं सकते,
तुम्हारा हाल है, उर्दू अकादमी की तरह।
अल्ताफ जिया ने कहा-
परिन्दे बहुत फड़फड़ाने लगे हैं, जो नोचे गए थे वो पर आ गए क्या।
रुड़की से आए सिकंदर हयात गड़बड़ ने फरमाया-
हम उससे इश्क फरमाने गए तो नाप के उसने हमारी टांग तोड़ी और हमारा सर मुड़ाया है।
हमारी देख कर हालत कहा माशूक ने हंसकर बहारो फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है।
अमरोहा से आए निकहत अमरोही ने फरमाया-
क्या करूं मैं मेरा बाप मजदूर है, मेरी डोली उठाने से मजबूर है।
जिस हथेली पे शादी की मेहंदी रचे मेरे हाथों में ऐसी हथेली नहीं।।
दिल्ली उर्दू अकादमी दिल्ली उपाध्यक्ष डॉ माजिद देवबंदी ने कहा-
खुद को भी आजमाओ तो पहले, कुछ नया कर दिखाओ तो पहले।
बन ही जाएंगे मंदिरों मस्जिद, दिल से दिल मिलाओ तो पहले।।
उज्जैन(मध्य प्रदेश) से आई मोहतरमा शबाना शबनम ने फरमाया-
वक्त की मांग है अब होश में आओ लोगों,
अपने हाथों से न घर अपना जलाओ लोगों।
बाद में हिन्दू मुसलमान सिख ईसाई बनो
पहले इंसान जरा बन के दिखाओ लोगों?
रुड़की उत्तराखंड से आए सज्जाद झंझट ने कहा-
इतना तरसाया है शादी की तमन्ना ने मुझे, अब तो हर शख्स मुझे अपना ससुर लगता है।
बाराबंकी से आए उसमान मीनाई ने फरमाया-
दल बदलुओं की चांदी में सोने में रख दिया, लेकिन पुराने लोगों को कोने में रख दिया।
लखनऊ के वाहिद अली वाहिद ने फरमाया-
न भूखा रहेगा, न नंगा रहेगा, कसम खा लो घर में न दंगा रहेगा।
इस मौके पर आशा देवी प्रजापति, रीता त्रिवेदी, काशी विश्वनाथ तिवारी, जमाल अहमद राईन, रफी अहमद, आशीष अवस्थी लालू, हेमू शुक्ला, विमलेश मिश्र, डॉ वेदप्रकाश अग्निहोत्री, आनन्द प्रकाश शुक्ला, कफील, इमरान मलिक, सुरेश जायसवाल, ओपी भारती, रामकुमार वर्मा, संजीव गुप्ता, विरेन्द्र कुमार, रामकृष्ण मिश्र एडवोकेट, राजेश वर्मा, रमेश जायसवाल, राजेश गिरि एडवोकेट, राजेश बाजपेयी, राकेश कुमार, निरेंद्र कुमार धाकड़े, श्रीशचंद त्रिपाठी, श्रीराम शुक्ला, गोपाल स्वरूप मिश्र, अजय वर्मा, मोहित गिरि, अमित श्रीवास्तव, वैभव त्रिपाठी, अशोक मिश्र, प्रेमप्रकाश पाठक, अरविन्द कुमार, रविशंकर, श्रेष्ठ रस्तोगी आदि मौजूद रहे।
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गुलदस्ता ए नात का हुआ विमोचन
कुल हिन्द मुशायरे में नगर के मशहूर शायर स्वर्गीय अल्ला बख्श कुरैशी (नाकाम गोलवी) की पुस्तक गुलदस्ता ए नात का विमोचन डॉ माजिद देवबंदी के हाथों पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी अग्रवाल की मौजूदगी में किया गया गया। नाकाम गोलवी की रचनाओं को संग्रह करके मधुकर शैदाई ने गुलदस्ता ए नात का प्रकाशन कराया है।
चैती मेले में आज
गोला गोकर्णनाथ। नगर के ऐतिहासिक चैती मेले के सांस्कृतिक मंच पर 26 अप्रैल मंगलवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन रात्रि आठ बजे से।