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अस्पताल आएं तो सतर्कता बरतें...कहीं हो न जाएं कोरोना के शिकार

Wed, 02 Sep 2020 12:20 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2020 12:20 AM IST
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Be cautious when you come to the hospital ... Do not be coronation victims
लखीमपुर खीरी। जिले में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच लोगों को इससे बचने के लिए लगातार आगाह किया जा रहा है। मगर, लोग हैं कि मानने का तैयार नहीं है। न तो इन्हें अपनी परवाह है और न ही घर परिवार के लोगों की। जिला अस्पताल में आए दिन होने वाली भीड़ कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है। मरीज और तीमारदारों की मनमानी से अस्पताल प्रशासन भी अब सख्ती न कर उन्हें उनके हालात पर छोड़ रहा है। ऐसे में अस्पताल में बरती जा रही लापरवाही भविष्य के लिए खतरे की घंटी बजा रही है।
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जिला अस्पताल में इस तरह की भीड़ तकरीबन रोजाना होती है। कोरोना को लेकर न तो मरीज फिक्रमंद है और न ही अस्पताल प्रशासन। इसकी हकीकत पर्चा काउंटर से लेकर डॉक्टर कक्ष के आगे की लगी भीड़ बयां करती है। जबकि जिला अस्पताल में कोरोना फैलने की संभावना सबसे ज्यादा हैं। अस्पताल में ही कोरोना की जांच रिपोर्ट लेने के संदिग्ध पहुंचते हैं। इसमें कई लोग ऐसे होते हैं जो रिपोर्ट लेने के बाद स्वयं को संक्रमित जान पाते हैं। इससे पहले वह रिपोर्ट कहां मिलेगी इसके लिए मरीज और तीमारदारों से कई जगह पूछते हुए निर्धारित काउंटर तक पहुंचते हैं। इसलिए अस्पताल आना खतरे से खाली नहीं है। इसके बावजूद लोग अस्पताल आकर न तो मास्क लगाते हैं और न ही डॉक्टर को दिखाने के दौरान सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करते हैं।
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एईएस पीड़ित मिले तीन बच्चे, आईसीयू में संख्या हुई छह
जिला अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती बुखार पीड़ित बच्चों में तीन एईएस पीड़ित मिले हैं। इन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। बुखार आने पर सोमवार को नौ साल के अनुराग, ढाई साल की आर्या और पांच साल के मोहित, पांच वर्षीय नजमा, तीन वर्षीय फतेह सिंह चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कराए गए थे। इनमें से अनुराग, मोहित एवं आर्या को एईएस के चलते मंगलवार को आईसीयू में शिफ्ट करा दिया गया। इससे वहां पर भर्ती होने वाले बच्चों की संख्या छह हो गई। सभी बच्चों की हालत में सुधार होना बताया जा रहा है।
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मरीजों को निरंतर जागरूक किया जाता है। बेवजह लोग अस्पताल न आएं इसलिए दोनो गेट पर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। इसके बावजूद मरीज भीड़ लगाने से गुरेज नहीं करते। डॉक्टरों को भी को निर्देशित कर दिया है कि अपने कक्ष के आगे भीड़ न लगने दें।
-डॉ. आरसी अग्रवाल, सीएमएस
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