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22 गुना अधिक उपज की बिक्री करके आढ़ती बन गया अव्वल किसान
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लखीमपुर खीरी। मंडी परिषद के अधिकारी का कारनामा कहे या फिर कथित किसान की उपलब्धि। एक वर्ष में ही शहर के एक थोक व्यापारी(आढ़ती) ने अपने खेत में 22 गुना अधिक उत्पादन किया और उससे प्राप्त उपज की मंडी में बिक्री करके अव्वल दर्जे का किसान बन गया। मंडी परिषद ने आढ़ती से किसान बने व्यापारी को अव्वल किसान घोषित करते हुए 30 किसानों की सूची में पहले स्थान पर काबिज कर दिया है। जबकि इसी किसान का नाम व्यापारी(आढ़ती) की सूची में भी छठे नंबर पर दर्ज है।
दरअसल यह सब कुछ किया जा रहा है मंडी समिति के सभापति चुनाव को लेकर। मंडी समितियों का गठन किया जाना है। इसके लिए प्रत्येक मंडी समिति में 10 से 12 सदस्यीय बोर्ड का गठन किया जाएगा। इसके बाद इन्हीं सदस्यों में सभापति और उप सभापति का चुनाव किया जाएगा। करीब तीन दशक पहले भाजपा सरकार में मंडी समितियों का गठन किया गया था। इसके बाद की सरकारों समितियों को भंग करके एसडीएम को सभापति बनाने की प्रथा डाली थी, जो आज भी चली आ रही है। योगी सरकार आने के बाद फिर से मंडी समितियों का गठन करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए हाल के पिछले तीन वित्तीय वर्ष में अधिकतम कृषि उपज बिक्री करने वाले बड़े, लघु और सीमांत 30-30 किसानों की सूची बनाई गई है। इसके अलावा तीन सालों में अधिकतम मंडी शुल्क जमा करने वाले 20 थोक व्यापारियों और 20 आढ़तियों की सूची तैयार की गई है। इस सूची का अनंतिम प्रकाशन करके आपत्तियां निस्तारित की जानी थी, लेकिन गुपचुप तरीके से सूची फाइनल कर ली गई। इसकी जानकारी किसी अन्य किसान या आढ़ती को नहीं हुई।
आढ़ती ऐसे बना अव्वल किसान
शहर के मोहल्ला पुरानी गल्ला मंडी निवासी एक आढ़ती ने सभापति बनने के लिए पूरा सिस्टम ही हैक कर लिया। 2.343 हेक्टेअर जमीन में 2016-17 में 9,52,400 रुपये की उपज बेची। 2017-18 में 1,12,000 रुपये की उपज बेची, जबकि 2018-19 में 23,48,750 रुपये की उपज बिक्री दिखाई है। यानी आखिरी साल में सीधे 22 गुना अधिक उपज बिक्री करके यह आढ़ती सूची में शामिल अन्य 29 किसानों से काफी अव्वल पोजीशन पर पहुंच गया। सूत्रों की माने तो यही आढ़ती सभापति बनने की दौड़ में सबसे आगे है। सभापति बनने के लिए किसान होना जरूरी है।
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किसानों और व्यापारी/आढ़तियों की सूची बनाने में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। एक बड़े किसान के नाम पर अभी तक किसी ने आपत्ति नहीं दर्ज कराई है। सूचियां मंडी परिषद के निदेशक को भेज दी गई हैं। -रामबाबू शर्मा, मंडी सचिव, लखीमपुर
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दरअसल यह सब कुछ किया जा रहा है मंडी समिति के सभापति चुनाव को लेकर। मंडी समितियों का गठन किया जाना है। इसके लिए प्रत्येक मंडी समिति में 10 से 12 सदस्यीय बोर्ड का गठन किया जाएगा। इसके बाद इन्हीं सदस्यों में सभापति और उप सभापति का चुनाव किया जाएगा। करीब तीन दशक पहले भाजपा सरकार में मंडी समितियों का गठन किया गया था। इसके बाद की सरकारों समितियों को भंग करके एसडीएम को सभापति बनाने की प्रथा डाली थी, जो आज भी चली आ रही है। योगी सरकार आने के बाद फिर से मंडी समितियों का गठन करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए हाल के पिछले तीन वित्तीय वर्ष में अधिकतम कृषि उपज बिक्री करने वाले बड़े, लघु और सीमांत 30-30 किसानों की सूची बनाई गई है। इसके अलावा तीन सालों में अधिकतम मंडी शुल्क जमा करने वाले 20 थोक व्यापारियों और 20 आढ़तियों की सूची तैयार की गई है। इस सूची का अनंतिम प्रकाशन करके आपत्तियां निस्तारित की जानी थी, लेकिन गुपचुप तरीके से सूची फाइनल कर ली गई। इसकी जानकारी किसी अन्य किसान या आढ़ती को नहीं हुई।
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आढ़ती ऐसे बना अव्वल किसान
शहर के मोहल्ला पुरानी गल्ला मंडी निवासी एक आढ़ती ने सभापति बनने के लिए पूरा सिस्टम ही हैक कर लिया। 2.343 हेक्टेअर जमीन में 2016-17 में 9,52,400 रुपये की उपज बेची। 2017-18 में 1,12,000 रुपये की उपज बेची, जबकि 2018-19 में 23,48,750 रुपये की उपज बिक्री दिखाई है। यानी आखिरी साल में सीधे 22 गुना अधिक उपज बिक्री करके यह आढ़ती सूची में शामिल अन्य 29 किसानों से काफी अव्वल पोजीशन पर पहुंच गया। सूत्रों की माने तो यही आढ़ती सभापति बनने की दौड़ में सबसे आगे है। सभापति बनने के लिए किसान होना जरूरी है।
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किसानों और व्यापारी/आढ़तियों की सूची बनाने में पूरी पारदर्शिता बरती गई है। एक बड़े किसान के नाम पर अभी तक किसी ने आपत्ति नहीं दर्ज कराई है। सूचियां मंडी परिषद के निदेशक को भेज दी गई हैं। -रामबाबू शर्मा, मंडी सचिव, लखीमपुर