{"_id":"68fbca206f4af4b35504f637","slug":"after-a-week-you-will-get-the-thrill-of-seeing-tigers-and-rhinos-roaming-in-the-forest-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1010-159159-2025-10-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: हफ्ते भर बाद मिलेगा जंगल में घूमते बाघ और गैंडों को देखने का रोमांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: हफ्ते भर बाद मिलेगा जंगल में घूमते बाघ और गैंडों को देखने का रोमांच
Sat, 25 Oct 2025 12:19 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 25 Oct 2025 12:19 AM IST
विज्ञापन
दुधवा में पांच शावकों संग विचरण करती बाघिन। स्रोत : वन विभाग
लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) में वर्ष 2025-26 का पर्यटन सत्र शुरू होने में अब मात्र एक हफ्ते का समय शेष है। इसके बाद मीलों फैले साल के घने जंगलों में स्वच्छंद घूमते बाघ, गैंडों समेत अन्य दुर्लभ वन्यजीवों का दीदार पर्यटक कर सकेंगे। यहां जंगल सफारी का आनंद उठाने के लिए देश-विदेश से आने वाले सैलानियों के स्वागत के लिए टाइगर रिजर्व प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है।
बीती 15 जून को दुधवा के द्वार पर्यटकों के लिए बंद कर दिए गए थे। अब ठीक साढ़े चार माह बाद एक नवंबर से दुधवा टाइगर रिजर्व में एक बार फिर जंगल सफारी का रोमांच लौटेगा। यहां आने वाले पर्यटक जंगल में कुलांचे भरते हिरन, सफरी के रास्तों पर शावकों संग मस्ती करती बाघिन, हाथियों की चिंघाड़ और जलाशयों में कलरव करते रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट सुनकर रोमांचित होंगे। जंगल में स्वछंद विचरण करते और बाड़े में रह रहे एक सींग वाले गैंडे सैलानियों का खास आकर्षण होंगे।
भारत-नेपाल सीमा पर 490 वर्ग किलोमीटर पर फैला दुधवा नेशनल पार्क का हरा-भरा जंगल अपनी समृद्ध जैव विविधता के चलते पूरे विश्व में मशहूर है। यह साल, खैर, शीशम के पेड़ों के अलावा घने घास के मैदानों और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। यह सूबे का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। नेशनल पार्क के अलावा दुधवा टाइगर रिजर्व का किशनपुर अभयारण्य हर साल बाघों की साइटिंग के लिए प्रसिद्ध है।
विज्ञापन
यहां लगातार बाघों का दीदार सैलानियों को होता है। इसी जंगल में बेलडंडा के नाम से मशहूर बाघिन अपने शावकों से संग पर्यटन मार्ग पर बैठी दिखाई देती है। यह नजारा देख जिप्सियों पर बैठे सैलानी खुशी से झूम उठते हैं। वहीं, दुधवा रेंज में भी बाघ दिखते हैं, लेकिन दुधवा के बाघों के राजा व रानी किशनपुर अभयारण्य में ही पाए जाते हैं।
इंसेट
दक्षिण सोनारीपुर रेंज में भालू का करें दीदार
अगर आपको दुधवा नेशनल पार्क में भालू के दीदार करने हों तो दुधवा जंगल सफारी का मजा लें। यहां दुधवा की सोनारीपुर रेंज में सैलानियों को भालू के दीदार होते हैं। जंगल में भालुओं को स्वछंद विचरण करते देख उनकी बांछें खिल जाती हैं।
जंगली हाथी भी बनेंगे आकर्षण केंद्र
दुधवा नेशनल पार्क में जंगल सफारी का लुत्फ उठाने आने वाले सैलानियों को जंगली हाथियों के झुंड भी आकर्षित करेंगे। दुधवा में 150 के करीब जंगली हाथी हैं। नेपाल से भी अक्सर हाथियों के झुंड यहां आते हैं और यहां प्रवास करने के बाद चले जाते हैं। इस बार भी दुधवा में कई जगहों पर जंगली हाथियों के झुंड दिखाई दिए हैं।
गैंडा साइटिंग सैलानियों को करेगी रोमांचित
दुधवा में एक सींग वाला गैंडा पाया जाता है। इसके लिए पार्क प्रशासन की ओर से दो परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। बाड़ में रहने वाले गैंडे सैलानियों को जरूर दिखते हैं। हाथी पर बैठकर गैंडा साइटिंग करना सैलानियों को खूब भाता है और वह जमकर लुत्फ भी उठाते हैं। गैंडा साइटिंग के बाद बाघ देखना सैलानियों की दूसरी पसंद बनता जा रहा है, जिसके चलते सैलानी दुधवा के प्रति आकर्षित हो रहे हैं।
वर्जन
दुधवा टाइगर रिजर्व का पर्यटन सत्र एक नवंबर से शुरू करने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर अभयारण्य और कतर्निया घाट वन्यजीव में जंगल सफारी के लिए सैलानियों के लिए द्वार खुल जाएंगे।
- डॉ. एच राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व
विज्ञापन
बीती 15 जून को दुधवा के द्वार पर्यटकों के लिए बंद कर दिए गए थे। अब ठीक साढ़े चार माह बाद एक नवंबर से दुधवा टाइगर रिजर्व में एक बार फिर जंगल सफारी का रोमांच लौटेगा। यहां आने वाले पर्यटक जंगल में कुलांचे भरते हिरन, सफरी के रास्तों पर शावकों संग मस्ती करती बाघिन, हाथियों की चिंघाड़ और जलाशयों में कलरव करते रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट सुनकर रोमांचित होंगे। जंगल में स्वछंद विचरण करते और बाड़े में रह रहे एक सींग वाले गैंडे सैलानियों का खास आकर्षण होंगे।
विज्ञापन
भारत-नेपाल सीमा पर 490 वर्ग किलोमीटर पर फैला दुधवा नेशनल पार्क का हरा-भरा जंगल अपनी समृद्ध जैव विविधता के चलते पूरे विश्व में मशहूर है। यह साल, खैर, शीशम के पेड़ों के अलावा घने घास के मैदानों और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। यह सूबे का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है। नेशनल पार्क के अलावा दुधवा टाइगर रिजर्व का किशनपुर अभयारण्य हर साल बाघों की साइटिंग के लिए प्रसिद्ध है।
विज्ञापन
यहां लगातार बाघों का दीदार सैलानियों को होता है। इसी जंगल में बेलडंडा के नाम से मशहूर बाघिन अपने शावकों से संग पर्यटन मार्ग पर बैठी दिखाई देती है। यह नजारा देख जिप्सियों पर बैठे सैलानी खुशी से झूम उठते हैं। वहीं, दुधवा रेंज में भी बाघ दिखते हैं, लेकिन दुधवा के बाघों के राजा व रानी किशनपुर अभयारण्य में ही पाए जाते हैं।
इंसेट
दक्षिण सोनारीपुर रेंज में भालू का करें दीदार
अगर आपको दुधवा नेशनल पार्क में भालू के दीदार करने हों तो दुधवा जंगल सफारी का मजा लें। यहां दुधवा की सोनारीपुर रेंज में सैलानियों को भालू के दीदार होते हैं। जंगल में भालुओं को स्वछंद विचरण करते देख उनकी बांछें खिल जाती हैं।
जंगली हाथी भी बनेंगे आकर्षण केंद्र
दुधवा नेशनल पार्क में जंगल सफारी का लुत्फ उठाने आने वाले सैलानियों को जंगली हाथियों के झुंड भी आकर्षित करेंगे। दुधवा में 150 के करीब जंगली हाथी हैं। नेपाल से भी अक्सर हाथियों के झुंड यहां आते हैं और यहां प्रवास करने के बाद चले जाते हैं। इस बार भी दुधवा में कई जगहों पर जंगली हाथियों के झुंड दिखाई दिए हैं।
गैंडा साइटिंग सैलानियों को करेगी रोमांचित
दुधवा में एक सींग वाला गैंडा पाया जाता है। इसके लिए पार्क प्रशासन की ओर से दो परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। बाड़ में रहने वाले गैंडे सैलानियों को जरूर दिखते हैं। हाथी पर बैठकर गैंडा साइटिंग करना सैलानियों को खूब भाता है और वह जमकर लुत्फ भी उठाते हैं। गैंडा साइटिंग के बाद बाघ देखना सैलानियों की दूसरी पसंद बनता जा रहा है, जिसके चलते सैलानी दुधवा के प्रति आकर्षित हो रहे हैं।
वर्जन
दुधवा टाइगर रिजर्व का पर्यटन सत्र एक नवंबर से शुरू करने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर अभयारण्य और कतर्निया घाट वन्यजीव में जंगल सफारी के लिए सैलानियों के लिए द्वार खुल जाएंगे।
- डॉ. एच राजामोहन, एफडी, दुधवा टाइगर रिजर्व

दुधवा में पांच शावकों संग विचरण करती बाघिन। स्रोत : वन विभाग