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बाघ की मौत से मॉनीटरिंग पर उठे सवाल

Sun, 03 Jan 2016 10:48 PM IST
लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी Updated Sun, 03 Jan 2016 10:48 PM IST
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A question on the monitoring of tiger death
संरक्षित वन क्षेत्र हो या फॉरेस्ट एरिया से दुर्लभ जंतु बाघ ढेर हो रहे हैं। हर वर्ष दुर्लभ वन्य जंतु बाघ की मौतों से व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अक्सर दुर्लभ जंतु की मौत का कारण स्वाभाविक मौत भी होती है। रविवार को भी मिले बाघ के कंकाल से एक बार फिर वन विभाग की मॉनीटरिंग सवालों में आ गई। क्योंकि दो से तीन महीने पहले मृत यह बाघ इतने दिनों तक गायब रहा तो इसकी जानकारी मॉनीटरिंग करने वाले वन कर्मचारियों को कैसे नहीं हुई। गौरतलब है कि जब भी बाघ का शव मिलता है तो वन महकमे की नींद टूटती है और वन्य जंतुओं की रक्षा के लिए योजनाएं बनाने का काम शुरू हो जाता है, लेकिन फिर जस की तस व्यवस्था में इन जंतुओं पर खतरा मंडराता रहता है।
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अब तक हुई बाघ की मौतों पर एक नजर
जनवरी 2014: बांकेगंज इलाके में खीरी ब्रांच नहर में बाघ का शव उतराता हुआ जमुनाबाद फार्म के बाद बरामद हुआ।
24 मई 2012 : पीलीभीत की हरीपुर रेंज के खिरकिया नाले में बाघ का शव मिला।
25 मई 2012 : पीलीभीत की हरीपुर रेंज के धनारा कंपार्टमेंट नंबर दो में बाघ का एक और शव बरामद।
12 अगस्त 2012 : पूरनपुर के घुंघचाई क्षेत्र में हरदोई ब्रांच बड़ी नहर में उतराता मिला बाघ का शव।
05 जनवरी 2010 : खीरी के परसपुर जंगल में मृत मिला टाइगर।
2007 : कतरनिया घाट में सड़क दुर्घटना में बाघ की मौत।
15 अप्रैल 2006 : दुधवा स्टेशन से पहले ट्रेन की टक्कर से बाघिन की मौत।
29 मई 2005 : दुधवा के सोनारीपुर रेंज में ट्रेन की टक्कर से बाघ शावक की मौत।
डीएफओ बोले, स्वाभाविक है मौत का कारण
डीएफओ साउथ नीरज कुमार का कहना है कि बाघ की मौत दो से तीन महीने पहले हुई लग रही है। बाघ की स्वाभाविक मौत प्रतीत हो रही है। बाघ की हड्डियां, दांत और खोपड़ी का हिस्सा अपनी जगह पर ही मिले हैं।
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