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नदी कटान ने छीन ली ईद की खुशियां
Lakhimpur
Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
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वर्षों से साथ रह रहे लोगों को सता रहा बिछड़ने का गम
घाघरा की तबाही से बर्बाद हो गए भदईपुरवा के सैकड़ों परिवार
ईसानगर। ‘कल जो चमन था, आज सेहरा हुआ, देखते ही देखते ये क्या हुआ’। यह पंक्तियां ग्राम भदईपुरवा पर सटीक बैठती हैं। दो ग्राम पंचायतों के हिस्से वाले इस गांव के लोगों की मानो दुनिया ही उजड़ गई। ईद का त्योहार सिर पर है, पर इस गांव के मुस्लिम बच्चों के चेहरे पर्र ईद की खुशी के बजाय नदी के कटान के खौफ की झलक दिखाई देती है। ईद की सिवइयों और नए कपड़ों के लिए मचलने वाले ये बच्चे डरे सहमे मायूसी से आने जाने वालों को देखते हैं।
मिर्जापुर ग्राम पंचायत के हिस्से वाले भदईपुरवा के सभी 138 परिवार अपना सब कुछ खोकर सड़क पर आ चुके हैं। गांव का यह भाग पूरी तरह नदी लील चुकी है। गांव के लोगों का एक ही दर्द बार-बार सामने आता है कि सदियों से साथ रहने वाले बिछुड़ गए। अब जीवन में कभी मिल पाएंगे या नहीं?
उधर सरैंया कलां वाले भदईपुरवा में बचे परिवारों में सन्नाटा बिखरा पड़ा है। कटान की दहशत के मारे गांव वालों का बुरा हाल है। इस गांव के आज तक 107 परिवार बेघर होकर इधर-उधर पड़े हैं। कल तक आलीशान दो मंजिला मकानों में रहने वाले आज रोड किनारे बचे छप्परों में रह रहे हैं। रात के अंधेरे में बच्चे डर जाते हैं तो रात भर जागकर लोग अपने बचे सामान की सुरक्षा करते हैं। मुस्लिम बहुल इस गांव के लोगों के लिए ईद का त्योहार ईद के चांद की तरह दुर्लभ दिखाई दे रहा है। कल तक संपन्न लोगों में गिने जाने वाले लोग आज मजदूरी के सहारे अपने परिवार को चलाने के लिए विवश हैं। चंद दिनों में ही राजा से रंक बने इस गांव के बाशिंदे अपने आप को असहाय महसूस कर रहे हैं।
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लोगों का कहना है कि प्रशासन ने जिस तरह अहेतुक सहायता सहित गृह अनुदान वितरण करने में चुस्ती दिखाई है काश उसी तरह कटान के प्रति गत वर्ष ही गंभीर हो जाता तो शायद इस गांव की खुशियों को कभी ग्रहण नहीं लगता।
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घाघरा की तबाही से बर्बाद हो गए भदईपुरवा के सैकड़ों परिवार
ईसानगर। ‘कल जो चमन था, आज सेहरा हुआ, देखते ही देखते ये क्या हुआ’। यह पंक्तियां ग्राम भदईपुरवा पर सटीक बैठती हैं। दो ग्राम पंचायतों के हिस्से वाले इस गांव के लोगों की मानो दुनिया ही उजड़ गई। ईद का त्योहार सिर पर है, पर इस गांव के मुस्लिम बच्चों के चेहरे पर्र ईद की खुशी के बजाय नदी के कटान के खौफ की झलक दिखाई देती है। ईद की सिवइयों और नए कपड़ों के लिए मचलने वाले ये बच्चे डरे सहमे मायूसी से आने जाने वालों को देखते हैं।
मिर्जापुर ग्राम पंचायत के हिस्से वाले भदईपुरवा के सभी 138 परिवार अपना सब कुछ खोकर सड़क पर आ चुके हैं। गांव का यह भाग पूरी तरह नदी लील चुकी है। गांव के लोगों का एक ही दर्द बार-बार सामने आता है कि सदियों से साथ रहने वाले बिछुड़ गए। अब जीवन में कभी मिल पाएंगे या नहीं?
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उधर सरैंया कलां वाले भदईपुरवा में बचे परिवारों में सन्नाटा बिखरा पड़ा है। कटान की दहशत के मारे गांव वालों का बुरा हाल है। इस गांव के आज तक 107 परिवार बेघर होकर इधर-उधर पड़े हैं। कल तक आलीशान दो मंजिला मकानों में रहने वाले आज रोड किनारे बचे छप्परों में रह रहे हैं। रात के अंधेरे में बच्चे डर जाते हैं तो रात भर जागकर लोग अपने बचे सामान की सुरक्षा करते हैं। मुस्लिम बहुल इस गांव के लोगों के लिए ईद का त्योहार ईद के चांद की तरह दुर्लभ दिखाई दे रहा है। कल तक संपन्न लोगों में गिने जाने वाले लोग आज मजदूरी के सहारे अपने परिवार को चलाने के लिए विवश हैं। चंद दिनों में ही राजा से रंक बने इस गांव के बाशिंदे अपने आप को असहाय महसूस कर रहे हैं।
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लोगों का कहना है कि प्रशासन ने जिस तरह अहेतुक सहायता सहित गृह अनुदान वितरण करने में चुस्ती दिखाई है काश उसी तरह कटान के प्रति गत वर्ष ही गंभीर हो जाता तो शायद इस गांव की खुशियों को कभी ग्रहण नहीं लगता।