गैस चाहिए तो साबुन और चाय पत्ती तो लेना ही होगा

Lakhimpur Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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वो भी दोगुने दाम पर, गैस एजेंसियों पर मनमानी से उपभोक्ता पसीना-पसीना
होम डिलीवरी पाना तो बड़ा ही मुश्किल काम
कालाबाजारी के चलते गैस पाने को तरसते उपभोक्ता
अशोक निगम
लखीमपुर खीरी। बिजली-पानी ही नहीं, रसोई गैस ने भी लोगों के पसीने छुड़ा दिए हैं। वैसे तो गैस की किल्लत बारहों महीने की है लेकिन पारा 41 से ऊपर हो और लाइन में पसीने से तरबतर होकर घंटों इंतजार करना पड़े तो उफ! निकल जाना स्वाभाविक है। दरअसल इस किल्लत के पीछे कालाबाजारिये हैं। जाड़े के मौसम में उपलब्धता कम होने के नाम पर तो गर्मी में होम डिलीवरी में लेटलतीफी परेशानी का सबब बनती है। ऊपर से एजेंसी मालिक गैस के साथ साबुन, चाय की पत्ती और गैस पाइप आदि लेने को भी बाध्य करते हैं वह भी बिक्री मूल्य से ड्योढे़ दूने दामों पर। ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालत और भी ज्यादा बदतर हैं।
रसोई गैस के मूल्यों में लगातार इजाफा होने के साथ गैस मिलने में दिक्कतें भी बढ़ती जा रही हैं। जिले में कुल 15 गैस एजेंसियां हैं इनमें से चार एजेसियां केवल शहर में हैं। एक एजेंसी भारत गैस की है तो दूसरी हिंदुस्तान की और तीसरी इंडेन की है। पुलिस लाइन के लिए एक गैस एजेंसी काम कर रही है। कमोवेश सभी एजेंसियों पर एक जैसे हालत है। भारत गैस की भगवान गैस एजेंसी पर सबसे ज्यादा गैस कनेक्शन हैं। इसके चलते लोगों को परेशानी भी सबसे ज्यादा इसी एजेंसी से है।
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बुकिंग और पूछताछ के लिए फोन ही नहीं उठता
भगवान गैस एजेंसी का आलम तो यह है कि यहां का फोन कभी उठता ही नहीं। लोगों को अपना काम छोड़कर एजेंसी पर गैस बुक कराने के लिए जाना पड़ता है। इसके बाद गैस आने के इंतजार का सिलसिला शुरू होता है। गैस न आने पर भी पूछताछ के लिए एजेंसी पर जाने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं है।
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गैस की होम डिलीवरी फेल
गैस की होम डिलीवरी शहर में पूरी तरह फेल है। गैस बुक करने के बाद डीलर गैस उपभोक्ता के घर पहुंचाना भूल जाते हैं। याद दिलाने पर कहा जाता है कि वेंडर नहीं आ रहे। जल्दी है तो खाली सिलेंडर ले आइए और गोदाम से गैस ले जाइए। वरना गैस पहुंचने में कम से कम बीस से पच्चीस दिन तक का समय लग जाएगा। यह समस्या भी सबसे ज्यादा भगवान गैस एजेंसी पर ही सामने आती है।
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डिपो से गैस लाने की दिक्कत
होम डिलीवरी समय से न होने पर उपभोक्ताओं को साइकिल, स्कूटर या मोटर साइकिल से खाली सिलेंडर डिपो तक ले जाना पड़ता है। वहां घंटाें लाइन में लगने के बाद ही सिलेंडर मिलता है। इसमें समय खर्च के साथ लोगों का भारी मानसिक तनाव भी झेलने पड़ता है। विशेष रूप से उन लोगों को खासी दिक्कत होती है जो सरकारी कर्मचारी या दुकानदार हैं।
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कालाबाजारी है गैस की किल्लत का सबसे बड़ा कारण
गैस की किल्लत का सबसे बड़ा कारण कालाबाजारी है। रसोई गैस सिलेंडरों का बड़े पैमाने पर व्यवसायिक उपयोग हो रहा है। बड़े सिलेंडरों से छोटे सिलेंडरों को भरने का धंधा भी बेरोक टोक चल रहा है। गाड़ियों में एलपीजी गैस का उपयोग और व्यवसायिक कनेक्शनों की जगह घरेलू गैस का प्रयोग किया जा रहा है।
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ग्रामीण इलाकों में और भी किल्लत
ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ताओं को गैस मिलने में और भी ज्यादा दिक्कतें पेश आती हैं। खीरी टाउन, निघासन, बेलरायां, सिंगाही, बेहजम और सिकंद्राबाद आदि जगहों पर कभी-कभी लोगों को गैस के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। बेहजम में हर सप्ताह गैस की गाड़ी ओयल से जाती है। जिन दिनों गैस की किल्लत होती है उन दिनों तो कई-कई सप्ताह गाड़ी आती ही नहीं, जब गाड़ी आती है तो गैस के लिए मारामारी होती है।
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सबसे ज्यादा गड़बड़ तो भगवान गैस एजेंसी पर
भगवान गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं का सबसे ज्यादा शोषण होता है। गैस सिलेंडर लेने पर उपभोक्ताओं को साबुन और चाय की पत्ती लेने पर बाध्य किया जाता है। डिपो से गैस उठाने पर भी और बेंडर के गैस लाने पर उपभोक्ताओं को कभी साबुन तो कभी चाय की पत्ती जबरन थमा दी जाती है। वह भी ड्योढ़े दूने दामों पर। उपभोक्ताओं के मना करने पर एजेंसी के लोग गैस देने से मना कर देते हैं। इसी तरह नया गैस कनेक्शन लेने पर उपभोक्ताओं को गैस चूल्हा एजेंसी से ही खरीदने पर बाध्य किया जाता है।
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किसी को बाध्य नहीं करते
एजेंसी के करीब 24,000 गैस कनेक्शन धारकों को हम पूरी सहूलियत देने का प्रयास करते हैं। टेलीफोन के जरिए गैस की बुकिंग की जाती है। होम डिलीवरी 24 घंटे से 48 घंटे के बीच हो जाती है। कु छ इलाकों के लिए बेंडरों की कमी है इससे कभी-कभार दिक्कत आती है। हम गैस के साथ साबुन, चाय की पत्ती और गैस पाइप भी बेंचते हैं लेकिन इसे खरीदने के लिए किसी को बाध्य नहीं किया जाता।
अतुल जायसवाल, पार्टनर, भगवान गैस एजेंसी
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फैक्ट फाइल
15 एजेंसियां हैं जिले में
04 एजेंसियां हैं शहर में
2,26,585 रसोई गैस कनेक्शन हैं जिले में
60,934 रसोई गैस कनेक्शन हैं लखीमपुर शहर में
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आदेश तो ये भी हैं
जिला पूर्ति अधिकारी ने गैस वितरकों को अपने कर्मचारियों और बेंडरों को फोटो युक्त पहचान पत्र जारी करने के आदेश दिए हैं। यह भी कहा है कि डीलर अपने गोदाम पर गैस की आमद और वितरण का रजिस्टर रखें, जिन स्थानों पर वितरण के लिए गैस दी गई है वह भी रजिस्टर में अंकित किया जाए। आग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। सभी बेंडर स्प्रिंग तुला अपने साथ रखें और उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर तोलकर दें।
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वेंडरों का चिट्ठा रहेगा
कालाबाजारी रोकने के लिए पूर्ति विभाग कड़े कदम उठा रहा है। गैस एजेंसियों को आदेश दिए गए हैं कि उपभोक्ताओं को बिना किसी परेशानी रसोई गैस उपलब्ध कराएं। कालाबाजारी रोकने के लिए एजेंसियों पर कार्यरत सभी कर्मचारियों व वेंडरों का नाम-पता व फोटो सहित विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है।
ध्रुवराज यादव, जिला पूर्ति अधिकारी

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