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45 आवासों के आवंटन में बड़ा घोटाला उजागर
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 24 May 2016 10:43 PM IST
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- आरटीआई से प्राप्त सूचना में हुआ खुलासा
- एक ही व्यक्ति को दो से तीन बार दिया लाभ
- लोगों के नाम आवंटन कर धन का हुआ बंदरबाट
- सूची में नाम पर लाभार्थी का गांव में नहीं है ठिकाना
ब्लाक बांकेगंज की ग्राम पंचायत पुनर्भूग्रंट में 45 आवासों के आवंटन मेें बड़े पैमाने पर घोटाले का मामला सामने आया है। आरटीआई के जरिये मिली सूचना में इसका खुलासा हुआ है कि वर्ष 2007-08 से 2015-16 तक कई लोगों के नाम पर धनराशि निकालकर बंदरबाट किया गया, क्योंकि लाभार्थियों के आवास नहीं बने हैं। इसी तरह कई लाभार्थियों को रेवड़ी की तरह आवास दो से तीन बार बांटे गए। सूची में ऐसे भी नाम शामिल हैं, जिनके नाम पर धन निकाला जा चुका है लेकिन वह गांव में रहते ही नहीं हैं। इस मामले में आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार और प्रेमशंकर यादव ने सीडीओ को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की हैै।
ग्राम पंचायत पुनर्भूग्रंट में विकास कार्यों में घपले के आरोप पहले भी लगते रहे, जिसमें मौके पर जांच करने गए अधिकारियों को तब अभिलेख ही नहीं मिले थे। गांव निवासी प्रेमशंकर यादव, विनोद कुमार ने जनसूचना अधिकार के तहत ग्राम पंचायत में 2005 से 2016 तक बनाए गए इंदिरा आवासों की सूची मांगी थी। काफी प्रयासों के बाद ग्राम पंचायत अधिकारी 2007-08 से 2015-16 तक आवंटित आवासों की सूची आवेदनकर्ताओं को उपलब्ध कराई। आरटीआई कार्यकर्ता प्रेमशंकर और विनोद कुमार ने सूची का मौके पर जाकर सत्यापन किया, तो बड़ी खामियां निकलकर सामने आ गईं। इस दौरान ग्राम पंचायत में कुल 165 इंदिरा आवास आवंटित किए गए, जिसमें 45 आवासों में खामियां पाई गई हैैं। मसलन सूची में 12 नाम ऐसे शामिल हैं, जो गांव में रहते ही नहीं हैं। जबकि 20 लाभार्थियों के नाम पर धनराशि निकल चुकी है, लेकिन उनका आवास नहीं बना है। इसी तरह नौ आवास ऐसे मिले हैैं, जिन्हें पहली मंजिल पर बनाया गया है या फिर दो से तीन बार आवास मुहैया कराए गए हैं।
मनरेगा में भी हुआ घपला
ग्राम पंचायत पुनर्भूग्रंट में आवास आवंटन में घोटाले के अलावा मनरेगा में गड़बड़ी किए जाने की शिकायत हैै। आरटीआई से प्राप्त सूचना में खुलासा हुआ है कि कुछ लोग गोला चीनी मिल में काम करते थे, उन्हीं के नाम पर उसी दिन का मनरेगा से भुगतान किया गया हैै। एक ही मजदूर दो जगहों पर कैसे काम कर सकता है। लिहाजा इस गांव में मनरेगा से कराए गए कार्यों की जांच कराने की मांग की गई है।
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ऐसे लाभार्थी जो गांव में नहीं रहते
रामप्रसाद पुत्र रामेश्वर दयाल, ओमकार पुत्र कालिका प्रसाद, चेतराम पुत्र पूरनलाल, सोना श्री पत्नी माखनलाल निवासी मजरा गदियाना, कामिनी देवी पत्नी रामखेलावन निवासी बाबूगंज, भरोसे पुत्र मोलहे निवासी गदियाना, रामबेटी पत्नी दिनेश निवासी गदियाना, नूरजहां पत्नी शहंशाह निवासी इस्लामनगर, उमेश चंद्र पुत्र बंशीलाल निवासी गुप्ता कालोनी, शांती देवी पत्नी हजारीलाल निवासी गदियाना, रामगुनी पत्नी जगदीश निवासी गदियाना।
ऐसे लाभार्थी जिनका आवास बना नहीं या अपूर्ण हैै
विशुना देवी पत्नी रमेश चंद्र, मिश्री पुत्र माखन, शिवरानी पत्नी बालकराम, गया प्रसाद पुत्र इतवारी, बलस्टर पुत्र शंभर, रामलाल पुत्र छोटेलाल निवासी पुनर्भूग्रंट, छेदाना पत्नी नोखे निवा डल्लापुरवा, सुधा देवी पत्नी बसंत निवासी बाबूगंज, सुमन पत्नी मन्नी निवासी गदियाना, सत्यवती पत्नी चंद्रिका, लज्जावती पत्नी रामभरोसे, शशिबाला पत्नी रामकुमार, रामदेवी पत्नी रामफल, सरस्वती पत्नी राधेश्याम, गीता पत्नी बाबूराम, आरती पत्नी राजेंद्र, बिटोली पत्नी बालकराम, मंजू पत्नी मनोज कुमार, कांती पत्नी शिवराज, कलावती पत्नी फेरूलाल, नीलम पत्नी संतकुमार, सत्यवती पत्नी अशर्फीलाल, नंदरि पुत्र रघुनंदन, राकेश पुत्र मैकू।
ऐसे लाभार्थी जिन्हें दुबारा लाभ मिला
सयंता पत्नी सुुरेश, मीना पत्नी रामदुलारे, गीता पत्नी बालकराम, अनीता पत्नी छविनाथ, चंद्रावती पत्नी चेतराम, किरन पत्नी सर्वेश, रामदुलारे पुत्र जयपाल, गुड्डी पत्नी अच्छन।
मामला संज्ञान में नहीं है। शिकायत मिलती है तो जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कराकर गबन की गई धनराशि वसूल की जाएगी।
- अमित सिंह बंसल, सीडीओ
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- एक ही व्यक्ति को दो से तीन बार दिया लाभ
- लोगों के नाम आवंटन कर धन का हुआ बंदरबाट
- सूची में नाम पर लाभार्थी का गांव में नहीं है ठिकाना
ब्लाक बांकेगंज की ग्राम पंचायत पुनर्भूग्रंट में 45 आवासों के आवंटन मेें बड़े पैमाने पर घोटाले का मामला सामने आया है। आरटीआई के जरिये मिली सूचना में इसका खुलासा हुआ है कि वर्ष 2007-08 से 2015-16 तक कई लोगों के नाम पर धनराशि निकालकर बंदरबाट किया गया, क्योंकि लाभार्थियों के आवास नहीं बने हैं। इसी तरह कई लाभार्थियों को रेवड़ी की तरह आवास दो से तीन बार बांटे गए। सूची में ऐसे भी नाम शामिल हैं, जिनके नाम पर धन निकाला जा चुका है लेकिन वह गांव में रहते ही नहीं हैं। इस मामले में आरटीआई कार्यकर्ता विनोद कुमार और प्रेमशंकर यादव ने सीडीओ को शिकायती पत्र देकर कार्रवाई की मांग की हैै।
ग्राम पंचायत पुनर्भूग्रंट में विकास कार्यों में घपले के आरोप पहले भी लगते रहे, जिसमें मौके पर जांच करने गए अधिकारियों को तब अभिलेख ही नहीं मिले थे। गांव निवासी प्रेमशंकर यादव, विनोद कुमार ने जनसूचना अधिकार के तहत ग्राम पंचायत में 2005 से 2016 तक बनाए गए इंदिरा आवासों की सूची मांगी थी। काफी प्रयासों के बाद ग्राम पंचायत अधिकारी 2007-08 से 2015-16 तक आवंटित आवासों की सूची आवेदनकर्ताओं को उपलब्ध कराई। आरटीआई कार्यकर्ता प्रेमशंकर और विनोद कुमार ने सूची का मौके पर जाकर सत्यापन किया, तो बड़ी खामियां निकलकर सामने आ गईं। इस दौरान ग्राम पंचायत में कुल 165 इंदिरा आवास आवंटित किए गए, जिसमें 45 आवासों में खामियां पाई गई हैैं। मसलन सूची में 12 नाम ऐसे शामिल हैं, जो गांव में रहते ही नहीं हैं। जबकि 20 लाभार्थियों के नाम पर धनराशि निकल चुकी है, लेकिन उनका आवास नहीं बना है। इसी तरह नौ आवास ऐसे मिले हैैं, जिन्हें पहली मंजिल पर बनाया गया है या फिर दो से तीन बार आवास मुहैया कराए गए हैं।
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मनरेगा में भी हुआ घपला
ग्राम पंचायत पुनर्भूग्रंट में आवास आवंटन में घोटाले के अलावा मनरेगा में गड़बड़ी किए जाने की शिकायत हैै। आरटीआई से प्राप्त सूचना में खुलासा हुआ है कि कुछ लोग गोला चीनी मिल में काम करते थे, उन्हीं के नाम पर उसी दिन का मनरेगा से भुगतान किया गया हैै। एक ही मजदूर दो जगहों पर कैसे काम कर सकता है। लिहाजा इस गांव में मनरेगा से कराए गए कार्यों की जांच कराने की मांग की गई है।
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ऐसे लाभार्थी जो गांव में नहीं रहते
रामप्रसाद पुत्र रामेश्वर दयाल, ओमकार पुत्र कालिका प्रसाद, चेतराम पुत्र पूरनलाल, सोना श्री पत्नी माखनलाल निवासी मजरा गदियाना, कामिनी देवी पत्नी रामखेलावन निवासी बाबूगंज, भरोसे पुत्र मोलहे निवासी गदियाना, रामबेटी पत्नी दिनेश निवासी गदियाना, नूरजहां पत्नी शहंशाह निवासी इस्लामनगर, उमेश चंद्र पुत्र बंशीलाल निवासी गुप्ता कालोनी, शांती देवी पत्नी हजारीलाल निवासी गदियाना, रामगुनी पत्नी जगदीश निवासी गदियाना।
ऐसे लाभार्थी जिनका आवास बना नहीं या अपूर्ण हैै
विशुना देवी पत्नी रमेश चंद्र, मिश्री पुत्र माखन, शिवरानी पत्नी बालकराम, गया प्रसाद पुत्र इतवारी, बलस्टर पुत्र शंभर, रामलाल पुत्र छोटेलाल निवासी पुनर्भूग्रंट, छेदाना पत्नी नोखे निवा डल्लापुरवा, सुधा देवी पत्नी बसंत निवासी बाबूगंज, सुमन पत्नी मन्नी निवासी गदियाना, सत्यवती पत्नी चंद्रिका, लज्जावती पत्नी रामभरोसे, शशिबाला पत्नी रामकुमार, रामदेवी पत्नी रामफल, सरस्वती पत्नी राधेश्याम, गीता पत्नी बाबूराम, आरती पत्नी राजेंद्र, बिटोली पत्नी बालकराम, मंजू पत्नी मनोज कुमार, कांती पत्नी शिवराज, कलावती पत्नी फेरूलाल, नीलम पत्नी संतकुमार, सत्यवती पत्नी अशर्फीलाल, नंदरि पुत्र रघुनंदन, राकेश पुत्र मैकू।
ऐसे लाभार्थी जिन्हें दुबारा लाभ मिला
सयंता पत्नी सुुरेश, मीना पत्नी रामदुलारे, गीता पत्नी बालकराम, अनीता पत्नी छविनाथ, चंद्रावती पत्नी चेतराम, किरन पत्नी सर्वेश, रामदुलारे पुत्र जयपाल, गुड्डी पत्नी अच्छन।
मामला संज्ञान में नहीं है। शिकायत मिलती है तो जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कराकर गबन की गई धनराशि वसूल की जाएगी।
- अमित सिंह बंसल, सीडीओ