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धोखाधड़ी का आरोपी प्रधान पुत्र सचिव सस्पेंड
Updated Tue, 12 Dec 2017 11:22 PM IST
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- फोटो : Prosecutor Prosecutor Suspend
लखीमपुर खीरी। मितौली ब्लॉक की ग्राम पंचायत चटौरा में प्रधानमंत्री आवास योजना के सात आवासों की धनराशि गबन के मामले में यहीं की महिला प्रधान के सचिव पुत्र (ग्राम पंचायत अधिकारी) राघवेंद्र प्रताप वर्मा को सस्पेंड किया गया है। प्रधान पुत्र सचिव इसी ब्लॉक में तैनात है, जिसकी साजिश से फर्जीवाड़ा कर लाखों की रकम हड़पी गई थी। जन सुनवाई के तहत दर्ज कराई गई शिकायत पर संज्ञान लेते हुए सीएमओ कार्यालय ने जांच कराई, जिसके बाद डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद ने प्रधान पुत्र सचिव के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की जांच नकहा के एडीओ पंचायत को सौंपी गई है।
चटौरा ग्राम पंचायत में सात प्रधानमंत्री आवासों की रकम फर्जी आईडी से हड़पे जाने के मामले में कुछ समय पूर्व ही ग्राम प्रधान कमला देवी और उनके पुत्र (सचिव) राघवेंद्र प्रताप वर्मा समेत पांच लोगों के खिलाफ मितौली थाने में मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। अभी मामले की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। इस दौरान चटौरा निवासी वीरेंद्र कुमार, विवेक कुमार आदि के नाम से मुख्यमंत्री ऑनलाइन जनसुनवाई शिकायत कर दी गई, जिसकी जांच सीडीओ अमित सिंह बंसल और पीडी रामकृपाल चौधरी ने जांच की। जांच में ग्राम प्रधान कमला देवी और उनके पुत्र राघवेंद्र प्रताप वर्मा (इसी ब्लाक में सचिव) को दोषी पाया गया, जिन्होंने कूटरचित तरीके से दूसरे लोगों के नाम पर आवास देकर सरकारी धन का गबन किया है। इस जांच के बाद एफआईआर में नामित तीन अन्य आरोपियों की भूमिका तय होनी शेष है। डीपीआरओ ने सचिव राघवेंद्र प्रताप वर्मा को मितौली ब्लॉक मुख्यालय पर संबद्ध किया है और सचिव के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए नकहा ब्लॉक के एडीओ पंचायत को नामित किया है।
सेक्रेटरी को मितौली ब्लॉक में कार्यरत रहकर अपनी प्रधान मां के साथ मिलकर सरकारी धन का दुरुपयोग करने का दोषी पाया गया है। इस मामले में नकहा एडीओ पंचायत को जांच सौंपी गई है, जिनसे 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
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चंद्रिका प्रसाद, डीपीआरओ
आरोप लगाकर मुझे फंसाया जा रहा है। सातों आवासों के लाभार्थी पात्र हैं। कोई अधिकारी मौके पर जांच के लिए नहीं पहुंचा है।
राघवेंद्र प्रताप वर्मा, निलंबित सचिव
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चटौरा ग्राम पंचायत में सात प्रधानमंत्री आवासों की रकम फर्जी आईडी से हड़पे जाने के मामले में कुछ समय पूर्व ही ग्राम प्रधान कमला देवी और उनके पुत्र (सचिव) राघवेंद्र प्रताप वर्मा समेत पांच लोगों के खिलाफ मितौली थाने में मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है। अभी मामले की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। इस दौरान चटौरा निवासी वीरेंद्र कुमार, विवेक कुमार आदि के नाम से मुख्यमंत्री ऑनलाइन जनसुनवाई शिकायत कर दी गई, जिसकी जांच सीडीओ अमित सिंह बंसल और पीडी रामकृपाल चौधरी ने जांच की। जांच में ग्राम प्रधान कमला देवी और उनके पुत्र राघवेंद्र प्रताप वर्मा (इसी ब्लाक में सचिव) को दोषी पाया गया, जिन्होंने कूटरचित तरीके से दूसरे लोगों के नाम पर आवास देकर सरकारी धन का गबन किया है। इस जांच के बाद एफआईआर में नामित तीन अन्य आरोपियों की भूमिका तय होनी शेष है। डीपीआरओ ने सचिव राघवेंद्र प्रताप वर्मा को मितौली ब्लॉक मुख्यालय पर संबद्ध किया है और सचिव के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए नकहा ब्लॉक के एडीओ पंचायत को नामित किया है।
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सेक्रेटरी को मितौली ब्लॉक में कार्यरत रहकर अपनी प्रधान मां के साथ मिलकर सरकारी धन का दुरुपयोग करने का दोषी पाया गया है। इस मामले में नकहा एडीओ पंचायत को जांच सौंपी गई है, जिनसे 15 दिन में रिपोर्ट मांगी है।
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चंद्रिका प्रसाद, डीपीआरओ
आरोप लगाकर मुझे फंसाया जा रहा है। सातों आवासों के लाभार्थी पात्र हैं। कोई अधिकारी मौके पर जांच के लिए नहीं पहुंचा है।
राघवेंद्र प्रताप वर्मा, निलंबित सचिव