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Kushinagar News: आग रोकने के लिए हाथ में बाल्टी का पानी लेकर जूझते रहे ग्रामीण
Thu, 11 May 2023 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
Updated Thu, 11 May 2023 01:02 AM IST
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अग्निशमन विभाग का दस्ता पहुंचा विलंब से, ग्रामीणों ने जताया गुस्सा
माघी मठिया गांव में लील ली पांच जिंदगियां
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। रामकोला थाना क्षेत्र के माघी मठिया गांव में आग लगते ही पूरा गांव एकजुट हो गया। अग्निशमन विभाग को सूचना दी, लेकिन खुद ही आग बुझाने में जुट गए। बच्चे, बूढ़े, नौजवान सभी हाथ में बाल्टी लेकर आग बुझाने की कोशिश करते रहे। ग्रामीणों ने अथक प्रयास कर आग पर काबू पाया। आग बुझने के बाद जो मंजर सामने था, वह हर किसी को झकझोर रहा था।
माघी मठिया गांव में बुधवार को लगी आग में एक परिवार के पांच लोग ही जिंदा नहीं जले, बल्कि दो पीढि़यों को प्रभावित किया। एक जिंदगी और मौत से जूझ रही है। मां-बेटी के एक साथ जले शवों को देखकर गांववालों का कलेजा फट गया।
बुधवार की दोपहर पक्के मकान में शेर मोहम्मद की पत्नी फातिमा, पुत्री रोकई, अमीना, आयसा और दो माह की दुधमुंही खतीजा को लेकर घर में सो रही थी। बगंल के कमरे में शेर मोहम्मद के दादा सफीद, दादी मोतीरानी और उनके साथ उसकी बेटी कुलसुम बैठकर बातें कर रहे थे। इसी समय अचानक आग घर आगे झोपड़ी में आग लग गई। वे आग की लपटों की वजह से नहीं निकल पाए।
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..और झुलस गए सफीद
उपचार के दौरान सफीद ने बताया कि आग की चपेट के समय वह अपने पत्नी और अपने पोते की बेटी के साथ बातें कर रहे थे। आग की लपटें देखकर वह भागने का प्रयास किए, लेकिन आग की लपटों में घिर गए। इसके बाद वह आनन-फानन घर में रखे पीने के पानी को आग की ओर फेंककर भागना चाहे, फिर भी सफल नहीं हो पाए और झुलस गए।
आंख के सामने ही जल गए चिल्लाते रहे बचाओ-बचाओ
सफीद ने बताया कि आग की चपेट में आई झोपड़ी को राख बनने में कुछ मिनट ही लगे। दूसरे कमरे में उनकी नाती-पतोह बचाओ-बचाओ चिल्ला रही थीं। जब वह बचाने गए तो खुद झुलस गए। होश आया तो अस्पताल में थे। सफीद ने बताया कि उनके सामने ही सभी जिंदा जल रही थीं। जुड़वा बहन की मौत से अस्पताल में रोती रही कुलसुम
झुलसी हुई कुलसुम ने बताया कि वह और रोकई जुड़वा हैं। वे एक साथ खेलती थीं। इसके साथ उनकी अन्य बहनें स्नेह करती थीं। वह अपनी मां की मौत पर दहाड़ मारकर अस्पताल में रोने लगी। यह मार्मिक दृश्य देखकर अस्पताल में मौजूद लोगों की आंखों में आंसू आ गए।
दो बच्चे आंखों के सामने ही झुलस गए
शेर मोहम्मद की दादी मोतीरानी ने बताया कि वह आग की लपटों में सभी लोग भागने का प्रयास किए, लेकिन भाग नहीं पाए। उन्होंने बताया कि ताप के कारण दो बच्चे आग के सामने की झुलस गए। उसके बाद से घर में धुआं से घर में अंधेरा हो गया। वह केवल छटपटा रही थीं। वह कह रही थीं कि छोटे बच्चों को आग की लपटों से निकाल लिया जाए। रोते हुए बताया कि उनकी उम्र हो गई है। अल्ला उनको जलाकर बच्चों को बचा लिया होता।
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माघी मठिया गांव में लील ली पांच जिंदगियां
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। रामकोला थाना क्षेत्र के माघी मठिया गांव में आग लगते ही पूरा गांव एकजुट हो गया। अग्निशमन विभाग को सूचना दी, लेकिन खुद ही आग बुझाने में जुट गए। बच्चे, बूढ़े, नौजवान सभी हाथ में बाल्टी लेकर आग बुझाने की कोशिश करते रहे। ग्रामीणों ने अथक प्रयास कर आग पर काबू पाया। आग बुझने के बाद जो मंजर सामने था, वह हर किसी को झकझोर रहा था।
माघी मठिया गांव में बुधवार को लगी आग में एक परिवार के पांच लोग ही जिंदा नहीं जले, बल्कि दो पीढि़यों को प्रभावित किया। एक जिंदगी और मौत से जूझ रही है। मां-बेटी के एक साथ जले शवों को देखकर गांववालों का कलेजा फट गया।
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बुधवार की दोपहर पक्के मकान में शेर मोहम्मद की पत्नी फातिमा, पुत्री रोकई, अमीना, आयसा और दो माह की दुधमुंही खतीजा को लेकर घर में सो रही थी। बगंल के कमरे में शेर मोहम्मद के दादा सफीद, दादी मोतीरानी और उनके साथ उसकी बेटी कुलसुम बैठकर बातें कर रहे थे। इसी समय अचानक आग घर आगे झोपड़ी में आग लग गई। वे आग की लपटों की वजह से नहीं निकल पाए।
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..और झुलस गए सफीद
उपचार के दौरान सफीद ने बताया कि आग की चपेट के समय वह अपने पत्नी और अपने पोते की बेटी के साथ बातें कर रहे थे। आग की लपटें देखकर वह भागने का प्रयास किए, लेकिन आग की लपटों में घिर गए। इसके बाद वह आनन-फानन घर में रखे पीने के पानी को आग की ओर फेंककर भागना चाहे, फिर भी सफल नहीं हो पाए और झुलस गए।
आंख के सामने ही जल गए चिल्लाते रहे बचाओ-बचाओ
सफीद ने बताया कि आग की चपेट में आई झोपड़ी को राख बनने में कुछ मिनट ही लगे। दूसरे कमरे में उनकी नाती-पतोह बचाओ-बचाओ चिल्ला रही थीं। जब वह बचाने गए तो खुद झुलस गए। होश आया तो अस्पताल में थे। सफीद ने बताया कि उनके सामने ही सभी जिंदा जल रही थीं। जुड़वा बहन की मौत से अस्पताल में रोती रही कुलसुम
झुलसी हुई कुलसुम ने बताया कि वह और रोकई जुड़वा हैं। वे एक साथ खेलती थीं। इसके साथ उनकी अन्य बहनें स्नेह करती थीं। वह अपनी मां की मौत पर दहाड़ मारकर अस्पताल में रोने लगी। यह मार्मिक दृश्य देखकर अस्पताल में मौजूद लोगों की आंखों में आंसू आ गए।
दो बच्चे आंखों के सामने ही झुलस गए
शेर मोहम्मद की दादी मोतीरानी ने बताया कि वह आग की लपटों में सभी लोग भागने का प्रयास किए, लेकिन भाग नहीं पाए। उन्होंने बताया कि ताप के कारण दो बच्चे आग के सामने की झुलस गए। उसके बाद से घर में धुआं से घर में अंधेरा हो गया। वह केवल छटपटा रही थीं। वह कह रही थीं कि छोटे बच्चों को आग की लपटों से निकाल लिया जाए। रोते हुए बताया कि उनकी उम्र हो गई है। अल्ला उनको जलाकर बच्चों को बचा लिया होता।