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Kushinagar News: सार्वजनिक भूमि का पट्टा निरस्त कराने के लिए आमरण अनशन जारी
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तीसरे दिन भी अनशन पर रहे रामेश्वर, ग्रामीणों ने प्रशासन से की निष्पक्ष जांच की मांग
2009 में चंदा जुटाकर बनाई गई थी दीवार, विवाह समेत अन्य सार्वजनिक कार्यों में होती रही है भूमि का इस्तेमाल
दुदही (कुशीनगर)। विशुनपुरा थाना क्षेत्र की लोहरपट्टी ग्राम पंचायत के टोला चिरकुटहां में सार्वजनिक उपयोग की भूमि का पट्टा निरस्त कराने की मांग को लेकर रामेश्वर का आमरण अनशन शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। उन्होंने बुधवार सुबह 10 बजे गांव की विवादित भूमि पर अनशन शुरू किया था। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर पट्टा निरस्त करने और भूमि को सार्वजनिक उपयोग के लिए मुक्त कराने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, गाटा संख्या 358 में दर्ज 0.069 हेक्टेयर नवीन परती भूमि का इस्तेमाल पिछले करीब 30 वर्षों से विवाह समेत अन्य सार्वजनिक कार्यों के लिए किया जाता रहा है। वर्ष 2009 में ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर यहां दो कमरों के निर्माण के लिए पांच फीट ऊंची दीवार भी बनवाई थी। भूमि पर कटहल के पांच और महुआ का एक पेड़ भी है।
प्रशासन को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि कन्हई कुशवाहा ने ग्राम प्रधान को मोटी रकम देकर 22 फरवरी 2024 को भूमि का कृषि पट्टा अपने नाम करा लिया। ग्रामीणों का दावा है कि कन्हई कुशवाहा के पास पहले से खेती की जमीन और दो मंजिला मकान है, जबकि मुसहर समुदाय के लोग गरीब और भूमिहीन हैं।
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रामेश्वर ने बताया कि पट्टा निरस्त कराने के लिए ग्रामीण पहले भी कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। उस दौरान अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण और विवाद से मुक्त कराने की मांग की है।
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2009 में चंदा जुटाकर बनाई गई थी दीवार, विवाह समेत अन्य सार्वजनिक कार्यों में होती रही है भूमि का इस्तेमाल
दुदही (कुशीनगर)। विशुनपुरा थाना क्षेत्र की लोहरपट्टी ग्राम पंचायत के टोला चिरकुटहां में सार्वजनिक उपयोग की भूमि का पट्टा निरस्त कराने की मांग को लेकर रामेश्वर का आमरण अनशन शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। उन्होंने बुधवार सुबह 10 बजे गांव की विवादित भूमि पर अनशन शुरू किया था। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर पट्टा निरस्त करने और भूमि को सार्वजनिक उपयोग के लिए मुक्त कराने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, गाटा संख्या 358 में दर्ज 0.069 हेक्टेयर नवीन परती भूमि का इस्तेमाल पिछले करीब 30 वर्षों से विवाह समेत अन्य सार्वजनिक कार्यों के लिए किया जाता रहा है। वर्ष 2009 में ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर यहां दो कमरों के निर्माण के लिए पांच फीट ऊंची दीवार भी बनवाई थी। भूमि पर कटहल के पांच और महुआ का एक पेड़ भी है।
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प्रशासन को दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि कन्हई कुशवाहा ने ग्राम प्रधान को मोटी रकम देकर 22 फरवरी 2024 को भूमि का कृषि पट्टा अपने नाम करा लिया। ग्रामीणों का दावा है कि कन्हई कुशवाहा के पास पहले से खेती की जमीन और दो मंजिला मकान है, जबकि मुसहर समुदाय के लोग गरीब और भूमिहीन हैं।
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रामेश्वर ने बताया कि पट्टा निरस्त कराने के लिए ग्रामीण पहले भी कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। उस दौरान अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण और विवाद से मुक्त कराने की मांग की है।