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जानिए, सपा ने क्यों बदले यूपी में 4 प्रत्याशी
लखनऊ/अखिलेश वाजपेयी
Updated Sat, 01 Jun 2013 01:26 AM IST
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समाजवादी पार्टी लोकसभा चुनाव के समीकरणों को दुरुस्त करने में जुटी है। शुक्रवार को लोकसभा चुनाव के चार प्रत्याशियों में बदलाव सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की इसी कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।
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लोकसभा चुनाव में सूबे से कम से कम 60 सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही सपा के मुखिया कहीं कोई चूक न होने देना चाहते। इसीलिए उन्होंने समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए चार टिकट बदले हैं।
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गोंडा में कृषि मंत्री आनंद सिंह के पुत्र कीर्तिवर्धन सिंह का टिकट काटने के पीछे बेनी को घेरने की कोशिश मुख्य वजह बताई जा रही है।
बताया जाता है कि देवीपाटन मंडल में जातीय समीकरणों को सपा के पक्ष में करने की कोशिश के तहत कीर्तिवर्धन सिंह का टिकट काटा गया है। गोंडा के आसपास लोकसभा की श्रावस्ती, कैसरगंज व बहराइच सीटें आती हैं।
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गोंडा के समीकरण इन सीटों को भी प्रभावित करते हैं। देवीपाटन मंडल के अंतर्गत आने वाली इन सीटों में सपा ने अभी तक किसी सीट पर ब्राह्मण उम्मीदवार नहीं उतारा था, जबकि इस इलाके में ब्राह्मणों की अच्छी संख्या है।
समझा जाता है कि ब्राह्मण मतदाताओं को आकर्षित करके अन्य सीटों पर इसका फायदा लेने के लिए कीर्तिवर्धन की जगह राहुल शुक्ल को मैदान में उतारा है।
सपा मुस्लिम, गैर कुर्मी पिछड़े मतदाताओं और ब्राह्मणों व ठाकुरों को जोड़कर बेनी की राह को जितना मुश्किल बना सकती है, बना देना चाहती है।
दरअसल, बेनी ने पिछले कुछ दिनों से जिस तरह मुलायम सिंह यादव के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उसके मद्देनजर सपा ने भी बेनी की पराजय को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है।
टिकट बदलने के पीछे यह फॉर्मूला तो नहीं
पिछले दिनों गोंडा के ही कुछ विधायकों व स्थानीय नेताओं ने लखनऊ में सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से मिलकर कीर्तिवर्धन सिंह से बेनी को कड़ी टक्कर न मिल पाने की बात कही थी।
बेनी की पराजय को प्रतिष्ठा बनाकर चल रही सपा ने इसी के चलते गोंडा से ब्राह्ण चेहरे को उतारने का फैसला किया।
बताया जाता है कि इसके लिए कीर्तिवर्धन सिंह के पिता कृषि मंत्री आनंद सिंह से बातचीत करके उन्हें विश्वास में लिया गया।
कृषि मंत्री के नजदीकी लोगों के अनुसार, सपा नेताओं ने कीर्तिवर्धन को राज्यसभा भेजने का आश्वासन दिया है।
ब्राह्मण गणित
राहुल के पिता स्व. घनश्याम शुक्ल को इस इलाके में ब्राह्मणों का काफी समर्थन प्राप्त था। यह समर्थन व सहानुभूति आज भी घनश्याम के परिवार के साथ बताई जाती है।
घनश्याम की लोकसभा के 2004 में हुए चुनाव में मतदान के दिन संदिग्ध परिस्थितियों में दुर्घटना में मौत हो गई थी।
घनश्याम समर्थकों ने इसे हत्या बताया था। साथ ही भाजपा के ही एक स्थानीय नेता पर संदेह व्यक्त किया था। पर, भाजपा द्वारा इस मुद्दे पर कुछ न करने के बाद ही पार्टी के कई ब्राह्मण नेताओं ने भाजपा से नाता तोड़ दिया था।
उसी के बाद भाजपा इस इलाके में ज्यादा कमजोर हुई। बाद में उनकी पत्नी नंदिता शुक्ला सपा में शामिल हो गई थी। सपा ने राहुल के जरिये इस क्षेत्र के ब्राह्मणों का समर्थन पाने की कोशिश की है।
संयोग का खेल
कुछ भी हो लेकिन गोंडा की राजनीति में एक बार फिर संयोग ने खेल खेला है। घनश्याम को भाजपा ने तत्कालीन भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के स्थान पर गोंडा से उम्मीदवार बनाया गया था।
बृजभूषण को बलरामपुर भेज दिया गया था। वहां से जीतने के बाद बृजभूषण भाजपा सांसद रहते सपा में शामिल हो गए थे। एक बार गोंडा की राजनीतिक परिस्थितियां 2004 जैसी फिर हो गई हैं।
तब एक ठाकुर चेहरे बृजभूषण की जगह घनश्याम को टिकट दिया गया था। इस बार कीर्तिवर्धन सिंह की जगह उनके घनश्याम के पुत्र राहुल शुक्ल को उम्मीदवार बनाया गया है।
अलीगढ़ में छवि ठीक करने की कोशिश
अलीगढ़ में सपा विधायक गुड्डू पंडित की पत्नी काजल शर्मा का टिकट बदलने के पीछे सपा का छवि सुधारने का प्रयास बताया जा रहा है। आपराधिक छवि के गुड्डू को लेकर लगातार शिकायतें मुखर हो रही थीं।
दो महीना पहले सपा मुख्यालय पर हुई बैठक में अलीगढ़ से आए कई लोगों ने सपा मुखिया मूलायम सिंह यादव से भी गुड्डू की शिकायत की थी। गुड्डू भी बैठक में थे।
अलीगढ़ के लोगों ने कहा था कि गुड्डू को अलीगढ़ में घूमने से रोक दिया जाए तो पार्टी जीत सकती है। पिछले दिनों गुड्डू मारपीट और अन्य कुछ घटनाओं को लेकर विवाद में आए। संभवत: इसीलिए गुड्डू की पत्नी का टिकट काटकर मुस्लिम चेहरेको उतारा गया। जिससे छवि भी ठीक रहे। साथ ही मुस्लिम वोटों का भी लाभ मिले।
बिजनौर सहित बाकी सीटों की गणित
बिजनौर से अनुराधा चौधरी के बारे में भी पार्टी के पास सूचनाएं ठीक नहीं आ रही थीं। पार्टी को बिजनौर से मिली रिपोर्ट में बताया गया था कि अनुराधा को न तो जाटों का समर्थन मिल रहा है और न मुस्लिमों का। इसीलिए उनकी जगह अमीर आलम को मैदान में उतारा गया।
जानकारी के मुताबिक, अनुराधा को भी राज्यसभा भेज जाने की चर्चा है। सहारनपुर में सपा की कोशिश कांग्रेस से सांसद रशीद मसूद के भतीजे इमरान मसूद को मैदान में उतारने की थी।
पर, इमरान के सपा में शामिल होने की हामी न भरने के बाद पार्टी के पास किसी को उम्मीदवार घोषित करना ही था। बताया जाता है कि बलराम यादव आजमगढ़ में भाजपा सासंद रमाकांत यादव के सामने चुनाव नहीं लड़ना चाहते थे। इसलिए आजमगढ़ में सपा को टिकट बदलना पड़ा।